
भूमि की बिगड़ती हुई दशा और जैविक खेती की तरफ किसानों के बढ़ते हुए कदम Publish Date : 01/02/2026
भूमि की बिगड़ती हुई दशा और जैविक खेती की तरफ किसानों के बढ़ते हुए कदम
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, डॉ0 रेशु चौधरी एवं गरिमा शर्मा
देश की आजादी के बाद भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए सरकार द्वारा हरित क्रान्ति शुरू हुई जो एम. एस. स्वामीनाथन ने 1965-1968 में शुरू की। इससे उत्पादन बढ़ा लेकिन फसलों में बहुत ज्यादा रसायनिक उर्वरकों का उपयोग किया गया। जिससे भूमि की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन कम होती गई और ज्यादा रसायनों के उपयोग से मनुष्य के स्वास्थ पर बुरा प्रभाव पड़ा। इससे पर्यावरण भी बहुत प्रदूषित हुआ जिससे भूमि में पाये जाने वाले सूक्ष्म जीव मर जाते है और पौधों की वृद्धि में कमी आती है। भूमि को अधिक समय तक बचाने के लिए सभी किसानों को जैविक खेती की तरफ कदम बढ़ाने पड़ेंगे।
किसानों का बढ़ता लालच
देश के किसान ज्यादा उत्पादन प्राप्त करनें के लिए रसायनों का बहुत अधिक उपयोग करते हैं जिससे फसलों की अच्छी कीमत मिलती है और जैविक खेती में ऐसा नहीं होता है। उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ता है, उसमें समय अधिक लगता है। इसलिए किसान जैविक कृषि की तरफ नहीं बढ़ रहे हैं।
नवयुवक क्यों नहीं करना चाहते कृषि
- कृषि कार्यों में कठिन परिश्रम
- जनसंख्या में वृद्धि के कारण
- कृषि कार्यों में अधिक लागत के कारण
- कृषि में कम उत्पादन के कारण
कृषि कार्यों में कठिन परिश्रम

कृषि कार्यों को करने के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है जो कि खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में बारिश व कड़ाके की ठंड में भी करना पड़ सकता है। इस कारण आज के नवयुवक कृषि कार्यों में रूचि नहीं रखते औरवह परिश्रम से बचना चाहते है।
जनसंख्या में वृद्धि के कारण
देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि भूमि में बँटवारा होता जा रहा है। इस कारण प्रति व्यक्ति जमीन का स्वामित्व कम होता जा रहा है। ज्यादातर किसानों के पास इतनी कम जमीन है कि कड़ी मेहनत करने के बाद भी उन्हें इतनी आय नहीं होती कि वे अपने परिवार का अच्छी तरह से पालन-पोषण कर पायें। इसलिए किसान धन कमाने के लिए शहरों में जाते हैं। यही कारण है कि किसान कृषि नहीं कर रहे हैं।
बदलते मौसम के कारण
बदलते मौसम के कारण बाढ़ एवं सूखा जैसी समस्याएँ प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं जिससे खेती करना मुश्किल होता जा रहा है जिससे फसलोत्पादन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। जिससे लोग खेती करना छोड़ रहे हैं।
कृषि कार्यों में अधिक लागत के कारण
देश में बढ़ती महँगाई के कारण कृषि कार्यों को करने के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता होती है, जिसकी वजह से किसान ग्रमीण बैंक से ज्यादा ब्याज पर ऋण लेता है और उपकरणों के अभाव में उत्पादन में कमी आ जाती हैं। जिसकी वजह से वह कर्ज में डूब जाता है और खेती करना छोड देता है।
कृषि में कम उत्पादन के कारण
किसान अभी भी पुराने तरीके से खेती करते हैं जिससे बीज और उर्वरकों की अधिक मात्रा उपयोग होती है। जिससे उनकी लागत में वृद्धि होती है और पुराने तरीके उपयोग करने से उत्पादन में कमी आ जाती है जिससे किसानों को हानि होती है। इसलिए लोग धीरे-धीरे खेती करना छोड़ रहे हैं।
सरकार द्वारा जैविक खेती के लिए उठाए गये कदम
देश में भूमि की बिगड़ती दुर्दशा को देखते हुए सरकार ने बहुत सारे कदम उठाये है जो इस प्रकार हैं:
- सरकार की ओर से संबंधित किसान को प्रति एकड़ सालाना ₹1800, 3000 और 2000 का अनुदान दिया जा रहा है।
- जैविक बीज किश्तों में ₹1,500 में दिये जाऐंगे।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- पी.एम. किसान के माध्यम से किसानों की आय सहायता
- कृषि के लिए कम ब्याज पर देने के लिए संस्थागत ऋण
- उत्पादन लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) तय करना।
जैविक खेती

जैविक कृषि एक ऐसी कृषि प्रक्रिया है जिसमें हम पौधों एंव जीव-जन्तुओं के बचे हुए अवशेषों का उपयोग भूमि की उर्वरक क्षमता और फसलोत्पादन बढ़ाने के लिए प्राकृतिक तरीकों से कार्य करते हैं इसमें उर्वरकों का उपयोग नहीं करते हैं जिससे भूमि और मनुष्य का स्वास्थ्य अच्छा रहता है
आज भूमि की बिगड़ती हुई दशा को देखते हुए बहुत से देशों ने अपने किसानों को जैविक खेती की तरफ प्रोत्साहित किया है। जैविक खेती में आस्ट्रेलिया दुनिया में नम्बर एक है और 35 मिलियान हेक्टेयर क्षेत्र पर जैविक खेती करता है, जो आस्ट्रेलिया की कृषि भूमि का 8.8 प्रतिशत हैं।
भारत जैविक खेती में दुनिया में नौ नम्बर पर है। वर्ष 2021 के सर्वक्षण के अनुसार भारत 23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर जैविक खेती की जाती है।
जैविक कृषि क्या है?
जैविक कृषि खेती की वह शाखा हैं। जिसमें हम केवल खादों का उपयोग करते हैं और बिना रसायन के खेती करते हैं उसे ही जैविक कृषि कहते हैं।
जैविक कृषि के प्रकार
ये दो प्रकार की होती है।
- शुद्ध जैविक कृषि
- एकीकृत जैविक कृषि
शुद्ध जैविक कृषि
यह एक ऐसी कृषि विधि है जिसमें उर्वरकों और कीट नियंत्रण साधनों का उपयोग जैविक पदार्थों के रूप में उपयोग करते है।
एकीकृत जैविक कृषि
इसमें फसलों में खाद के रूप में पशुओं के अपशिष्ट पदार्थों एवं उनके मृत अवशेषों का उपयोग करते है। जैसे गोबर की सड़ी खाद, पोल्ट्री खाद, वर्मीकम्पोस्ट व कम्पोस्ट आदि।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
