
कब लें कॅरियर की काउंसिलंग Publish Date : 30/01/2026
कब लें कॅरियर की काउंसिलंग
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
अकसर हम कैरियर काउंसिलिंग का समय पहचानने में देरी कर देते हैं। दरअसल, कैरियर काउंसलिंग का सही समय वह है जब बच्चे आगे की राह चुनने की दहलीज पर होते हैं। इसे आप हाई स्कूल (सेकेंडरी) ही मानिए, क्योंकि इसके बाद ही स्ट्डेंट्स के लिए स्ट्रीम चेंज करने का समय होता है और यही वह समय है जब उन्हें प्रॉपर गाइडेंस की जरूरत होती है।
पेरेंट्स को इसी फेज में बच्चों को कैरियर संबंधी गाइडेंस प्राँवाइड कराना चाहिए। इससे उसे सही सिर्फ सही सब्जेक्ट चुनने में मदद मिलती है, बल्कि वह यह भी जान पाता है कि किन विषयों में वाकई उसका रूझान है। अगर 11वीं में सही सब्जेक्ट का चुनाव न किया तो पूरा कॅरियर ही यू टर्न ले सकता है।

प्रफेशनल काउंसलर मनोवैज्ञानिक तरीके से छात्र से बातचीत करते हैं और मनोवैज्ञानिक या साइकोमेट्रिक टेस्ट के आधार पर स्टूडेंट के टैलेंट को समझते हैं।
काउंसिलिंग का महत्व
पेरेंट्स को बच्चे को पढ़ाई पर ध्यान तो देना ही चाहिए, जरूरत उन्हें। यह समझने की भी है कि बच्चे की रुचि किन सब्जेक्ट्स में है और वह उनमें कैसा कर रहा है। यह भी देखना चाहिए कि किन विषयों को पढ़ने में बच्चे का मन नहीं लगता। इसके बाद अभिभावक कॅरियर के चुनाव में बच्चे की मदद कर सकते हैं, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेरेंट्स बच्चों के लिए कितना वक्त निकाल पाता हैं, यह सब को मालूम है।
बच्चे का रिजल्ट भले पेरेंट्स को पता हो, लेकिन वे अकसर उसको पसंद को समझने में चूक जाते हैं। सिर्फ किसी सब्जेक्ट में अच्छे नंबर लाना उस सब्जेक्ट में बच्चे के आगे बेहत्तर करने की गारंटी नहीं है।
पेरेंट्स के लिए इस बात को समझना जरूरी है। इंजीनियरिंग-मेडिकल जैसे क्षेत्रों के प्रति फेज का ही वह नतीजा है कि मन मुताबिक पढ़ाई न कर पाने की वजह से बच्चे तनाव में घिर रहे हैं। यहीं पर बच्चों यानी स्टूडेंट्स को काउंसिलिंग की जरूरत होती है ताकि उनके पेरेंट्स उनकी प्रतिभा को पहचान सकें और उसे अपनी पसंद के रास्ते पर बढ़ने की अनुमति प्रदान कर सकें। यह कतई जरूरी नहीं है कि साइंस में 90 वा 100 फीसदी अंक लाने वाला छात्र साइंस स्ट्रीम हो पसंद करे।
हो सकता है उसकी रुचि गणित में न हो, क्योंकि 10वीं के बाद पढ़ाई का लेवल अचानक हाई हो जाता है और अगर स्टूडेंट की रुचि उसमें न हो तो उसका प्रदर्शन प्रभावित होने लगता है। काउंसिलिंग में इन्हीं बातों को पेंरेट्स की राय समझाने की कोशिश की जाती है।
नए क्षेत्रों की जानकारी

काउंसिलिंग का एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि काउंसलर आपकी वैसे सब्जेक्ट या उभरते क्षेत्रों के बारे में भी बताते हैं जिनसे आप अनजान होते हैं। आप ने उस फोल्ड के बारें में कभी सोचा ही नहीं होता है। मार्केट ट्रेड (देश-विदेश) के बारे में बताते हैं और इन सबसे ऊपर आपको अच्छा इंस्टीट्यूट चुनने में मदद करते हैं। सब्जेक्ट पसंद का होने में आप अपनी पसंद की यह पर बढ़ तो सकते हैं, लेकिन इस गला काट प्रतियोगिता के जमाने में अच्छे इंस्टीट्यूट का चुनाव करके ही आप दूसरों पर बढ़ते ले सकते हैं। आज मैनेजमेंट में कई नए सब्जेक्ट आ गए हैं। इसी तरह स्लों का क्षेत्र बढ़ गया है। फैशन टेक्नोलॉजी का बुखार और खुमार तो है ही, खेल के क्षेत्र में हो रहे सुचार और कमाई से इस क्षेत्र में इफेक्ट के अलावा नए ऑप्शन पर भी उभरे हैं। एक काउंसलर की सलाह यहीं कारगर होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
