
पेड़ी प्रबंधन कैसे करें कुछ महत्वपूर्ण तथ्य Publish Date : 14/01/2026
पेड़ी प्रबंधन कैसे करें कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
कटाई:- पर्ची आने पर ही जमीन की सतह से आधा इंच नीचे पंक्तिबद्ध फरवरी से मार्च के महीने में कटाई करें।
ठूठों की छटाई:- गन्ना कटाई के बाद ऊपर निकले हुए ठूंठों की छटाई अवश्य करें जिससे गन्ना एक साथ अधिक किल्लों के साथ निकले।
ईथरल:- 20 ml ईथरल + 2 किलो यूरिया को 200 लीटर पानी में घोल बना कर ठूठों पर स्प्रे करें।
पत्ती बिछाना:- पत्तियों को जलाना नहीं है, 30 इंच मोटी परत गन्ने के नालियों के बीच में बिछानी है जिससे खर पतवार नहीं निकलेंगे और जल धारण क्षमता बढ़ती है।
जनवरी माह ठूठों पर पत्ती जरूर बिछाए, जिससे ठूठों पर काले फंगस न लगें और फरवरी में ठूठों से पत्ती हटा दे।
गोबर की खाद:- गोबर की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ की दर से डाले, जिससे मृदा उर्वरता और उत्पादकता दोनों बढ़ते हैं।
पहली सिंचाई:- खेत में सिंचाई गन्ना कटाई के तुरन्त बाद करें और 50 किलो यूरिया प्रति अकड़ डाले जिससे अच्छा फुटाव व पोषक तत्व का अवशोषण सुचारू रूप से होगा।

खादों की बेसल खुराक:- 50 किलो यूरिया + 70 किलो डीएपी + 40 किलो पोटाश + 10 किलो सल्फोजिंक अवश्य दें।
रिक्त स्थान भरना:- अच्छी उपज के लिए पेड़ी में खाली जगह में तैयार की गई नर्सरी से रिक्त स्थान की पूर्ति अवश्य करें।
बैटरी स्प्रेयर
हम बैटरी पंप के साथ आए एक ही "लाल या पीले" नोज़ल से हर तरह का स्प्रे कर देते हैं, यह एक बड़ी गलती है। सही नोज़ल चुनने से दवा का असर दोगुना हो जाता है, बर्बादी रुकती है और पैसे बचते हैं।
बैटरी स्प्रेयर के लिए यहाँ एक आसान और संक्षिप्त गाइड है:
1. खरपतवार नाशक (Herbicides/घास की दवा) के लिए
सही नोज़ल: फ्लैट फैन (Flat Fan) या फ्लड जेट (कट नोज़ल)।
क्यों: हमें बड़ी बूंदें चाहिए ताकि दवा हवा में उड़कर दूसरी फसल पर न जाए (Drift Control)। यह नोज़ल एक सार (uniform) पट्टी या चादर की तरह स्प्रे करता है, जिससे कोई घास छूटती नहीं है।
एक्सपर्ट टिप: बैटरी पंप का रेगुलेटर (प्रेशर) थोड़ा कम रखें।
2. कीटनाशक और फफूंदनाशक (Insecticides & Fungicides) के लिए-
सही नोज़ल: हॉलो कोन (Hollow Cone - गोल बारीक फव्वारा)।
क्यों: कीड़ों और बीमारी को मारने के लिए हमें बहुत बारीक धुंध (Mist) चाहिए। यह गोल घूमता हुआ फव्वारा पत्तों के नीचे और फसल के घने हिस्सों में घुसकर दवा पहुँचाता है।
एक्सपर्ट टिप: अच्छी बारीक धुंध बनाने के लिए पंप का प्रेशर तेज़ रखें।
3. मौसम का ध्यान रखें (हवा):
अगर खेत में हवा तेज़ चल रही है, तो हॉलो कोन (बारीक फव्वारा) का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। सारी महंगी दवा हवा में उड़ जाएगी।
ऐसी स्थिति में, मोटी बूंदों वाले नोज़ल (जैसे फ्लड जेट) का ही प्रयोग करें ताकि दवा सीधी ज़मीन/फसल पर गिरे।
याद रखें: सही नोज़ल का चुनाव मतलब कम खर्च में ज़्यादा पैदावार।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
