
अब 10वीं में फेल होने की टेंशन भी होने जा रही खत्म Publish Date : 28/11/2025
अब 10वीं में फेल होने की टेंशन भी होने जा रही खत्म
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
इसके बारे में क्या है एजुकेशन बोर्ड का प्लान?
एक जानकरी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में अब 10वीं कक्षा में छात्र फेल नहीं होंगे। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड छात्रों के लिए ऐसी पॉलिसी लेकर आया है, जिसके तहत अब छात्रों बोर्ड एग्जाम में फेल होने से डरने की कोई जरूरत नहीं है। स्कूल शिक्षा बोर्ड छात्रों को बोर्ड एग्जाम में परीक्षा के दो अवसर प्रदान कर रहा है, यानी की अब साल में एक बार नहीं बल्कि दो बार बोर्ड के एग्जाम होंगे।
कब-कब होंगे बोर्ड के एग्जाम?
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि 10वीं कक्षा के लिए साल में दो बार बोर्ड एग्जाम होंगे. यह नियम केवल 10वीं कक्षा के लिए ही लागू किया जा रहा है और 12वीं कक्षा के लिए ऐसा नहीं है। ऐसी ही नीति सीबीएसई भी लागू कर चुकी है।
बोर्ड की पहली परीक्षाः फरवरी मार्च में मुख्य परीक्षा (Main Exam) के रूप में होगी।
बोर्ड की दूसरी परीक्षाः जून-जुलाई में सुधार परीक्षा (Improvement Exam) के रूप ली जाएगी।
बोर्ड एग्जाम का क्राइटेरिया
बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि इन एग्जाम को लेकर शिक्षा बोर्ड ने एक क्राइटेरिया भी निर्धारित किया है। इसके तहत फरवरी-मार्च (मुख्य परीक्षा) में 10वीं कक्षा के सभी छात्र को बोर्ड एग्जाम देने होंगे. इसके बाद मुख्य परीक्षा के आधार पर यह तय होगा की कौन से छात्र जून-जुलाई (सुधार परीक्षा) में एग्जाम दे सकते हैं। मेन एग्जाम के आधार पर छात्रों को 3 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। यह तीन श्रेणियां है आवश्यक सुधार, वैकल्पिक सुधार और अनिवार्य पुनरावृत्ति। बोर्ड सचिव ने बताया कि 10वीं के लिए 5 अनिवार्य (Compulsory) सब्जेक्ट हैं।
आवश्यक सुधार (Compulsory Improvement): इसके तहत वे स्टूडेंट आते हैं, जो छात्र 5 में 3 सब्जेक्ट्स में पास हो जाते हैं और 2 सब्जेक्ट्स में फेल हो जाते हैं। ऐसे में इन छात्रों को जून-जुलाई में दूसरा मौका दिया जाएगा। जिन सब्जेक्ट्स में वे रह गए हैं, उन दोनों का दोबारा एग्जाम देना होगा, जो कि अनिर्वाय होगा। ऐसे में अगर वह इन दोनों एग्जाम में पास हो जाते हैं तो वे अगली क्लास के लिए क्वालीफाई किए जाएंगे और अगर एक एग्जाम में पास होते हैं तो उन्हें कंपार्टमेंट की श्रेणी में डाला जाएगा। वहीं, अगर दोबारा दोनों एग्जाम में क्वालीफाई नहीं कर पाए तो 10वीं कक्षा रिपीट करनी होगी।
वैकल्पिक सुधार (Optional Improvement): इस प्रक्रिया के तहत अगर कोई छात्र सभी पांचों सब्जेक्ट्स में पास है, लेकिन किसी सब्जेक्ट्स में उसके नंबर कम आए हैं और किसी भी वजह से एग्जाम अच्छा नहीं हुआ है तो उनके पास वैकल्पिक सुधार का ऑप्शन है। ऐसे छात्र जून-जुलाई में दोबारा एग्जाम देकर वांछित सुधार कर सकता है। हालांकि इसके लिए हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से केवल 3 सब्जेक्ट्स के लिए ही मंजूरी दी जाएगी, जिनमें छात्र सुधार कर सकता है। इस कैटेगरी में सिर्फ वह छात्र ही शामिल होंगे, जो सभी विषयों में पास हैं।
अनिवार्य पुनरावृत्ति (Essential Repeat): इस श्रेणी के तहत वह छात्र पात्र हैं, जो 5 में से 3 या तीन से अधिक सब्जेक्ट्स में फेल हो जाते हैं। ऐसे छात्रों को दोबारा से 10वीं कक्षा रिपीट करनी होगी। इन छात्रों को जून-जुलाई की परीक्षा की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। ऐसे छात्र साल में दो बार बोर्ड एग्जाम नहीं दे सकेंगे।
इन छात्रों को मिलेगा दूसरा एग्जाम देने का अवसर
हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि खेल गतिविधियों, खराब मौसम, बीमारी या दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में परीक्षा से अनुपस्थित रहे विद्यार्थियों को नियमानुसार दूसरी परीक्षा में अवसर दिया जाएगा, ताकि उनका एक साल बच सके और दूसरी परीक्षा में वह 10वीं का बोर्ड एग्जाम दे सकें।
कब से लागू होगी अधिसूचना?
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ये अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत एकेडमिक सेशन 2025-26 से 10वीं कक्षा के लिए साल में 2 बार बोर्ड के एग्जाम होंगे। यह अधिसूचना मार्च 2026 से लागू हो जाएगी। यानी कि अभी जो छात्र 10वीं कक्षा में हैं, उन्हें दो बार बोर्ड एग्जाम देने का अवसर मिलेगा।
पुरानी नीति के तहत क्या थी व्यवस्था?
बता दें कि इससे पहले 10वीं बोर्ड एग्जाम के तहत 5 अनिर्वाय सब्जेक्ट्स में से 4 सब्जेक्ट्स क्वालीफाई करना जरूरी होता था। एक सब्जेक्ट में फेल होने पर उसे कंपार्टमेंट कैटेगरी में रखा जाता था, जबकि 2 सब्जेक्ट्स में क्वालीफाई न कर पाने वाले छात्र को भी 10वीं कक्षा रिपीट करनी पड़ती थी। बोर्ड सचिव ने बताया कि इन छात्रों की संख्या काफी अधिक थी, जो 5 में से 2 सब्जेक्ट्स में फेल हो जाते थे। ऐसे में अब नई पॉलिसी के तहत इन छात्रों को स्कूल शिक्षा बोर्ड बड़ा मौका दे रही है कि ऐसे छात्र जून-जुलाई में दोबार से बोर्ड एग्जाम देकर अपना साल बचा सकते हैं।
क्यों होंगे साल में 2 बार एग्जाम?
शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि ‘न्यू एजुकेशन पॉलिसी’ हाई स्ट्रेस एग्जाम के बारे में बात करती है। एनईपी के अनुसार जब साल में केवल एक बार ही बोर्ड का एग्जाम होता है, तो इससे छात्रों पर तनाव बढ़ता है। ऐसे में पॉलिसी के तहत छात्रों के इस तनाव को डिस्ट्रीब्यूट करने की कोशिश करनी चाहिए। इसी दिशा में हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड ने यह फैसला लिया है, जिसके तहत 10वीं कक्षा के बोर्ड के एग्जाम साल में 2 बार होंगे। इनमें से पहला एग्जाम फरवरी-मार्च को होगा और दूसरा एग्जाम जून-जुलाई में होगा।
अब नहीं होगा ‘फेलियर’ शब्द का उपयोग

शिक्षा बोर्ड सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि पहले जो छात्र 5 में से 2 या उससे अधिक सब्जेक्ट्स में क्वालीफाई नहीं कर पाते थे, उनके लिए ‘फेलियर’ शब्द का प्रयोग किया जाता था, लेकिन अब उसके स्थान पर ‘एसेंशियल रिपीट’ शब्द का यूज किया जाएगा। बोर्ड सचिव ने कहा कि ‘फेलियर’ शब्द छात्रों में तनाव (Stress) और हीन भावना पैदा करता है, इसलिए इस शब्द को अब बदल कर ‘एसेंशियल रिपीट’ कर दिया गया है, यानी कि जो बच्चे अब 3 या तीन से अधिक सब्जेक्ट्स में क्वालीफाई नहीं कर पाएंगे, उन्हें दोबारा से 10वीं कक्षा में बैठना होगा।
कब आएगा रिजल्ट?
हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि पहली परीक्षा (फरवरी-मार्च) का रिजल्ट अप्रैल-मई में आएगा, जबकि दूसरी परीक्षा (जून-जुलाई) का रिजल्ट जुलाई-अगस्त में घोषित कर दिया जाएगा। दोनों परीक्षाओं में से बेहतर प्राप्तांक को ही अंतिम माना जाएगा और इसके बाद ही छात्रों को मार्क शीट दी जाएगी। इससे पहले पहली परीक्षा के रिजल्ट को डिजी लॉकर पर अपलोड किया जाएगा, ताकि अगर छात्रों को अगली क्लास में अस्थायी एडमिशन लेना है तो वह ले पाएंगे।
आवश्यक सुधार वालों को 11वीं में मिलेगा एडमिशन?
हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड सचिव ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक सुधार (Compulsory Improvement) श्रेणी वाले विद्यार्थियों को 11वीं कक्षा में प्रोविजनल (अस्थायी) एडमिशन मिल जाएगा, बशर्ते वे नियमानुसार 10वीं की परीक्षा पास करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
