मिट्टी में पोषक तत्वों की अधिकता या कमी के प्रभाव      Publish Date : 22/10/2025

        मिट्टी में पोषक तत्वों की अधिकता या कमी के प्रभाव

                                                                                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

सभी पौधों को बढ़वार और विकास के लिए कम से कम 16 तत्वों की आवश्यकता होती है इनमें से कार्बन (C), हाइड्रोजन (H) और आक्सीजन (O) पानी तथा हवा से प्राप्त होते हैं बाकी के 13 तत्व भूमि, उर्वरक तथा खादों से मिलते हैं।

                                                                  

नाइट्रोजन:

यदि मिट्टी में नाइट्रोजन मौजूद है, तो बोरॉन, कॉपर, पोटाश अवशोषित नहीं होते और यदि मिट्टी में नाइट्रोजन मौजूद है, तो मैग्नीशियम अवशोषित होता है।

फॉस्फोरस:

यदि मिट्टी में फास्फोरस मौजूद है, तो कॉपर, कैल्शियम, पोटाश, फेरस, जिंक अवशोषित नहीं होते और यदि मिट्टी में फास्फोरस मौजूद है, तो मैग्नीशियम अवशोषित होता है।

पोटेशियम:

यदि मिट्टी में पोटेशियम मौजूद है, तो बोरॉन, मैग्नीशियम अवशोषित नहीं होते और यदि मिट्टी में पोटेशियम मौजूद है, तो मैंगनीज, फेरस अवशोषित होते हैं।

कैल्शियम:

यदि मिट्टी में कैल्शियम अधिक मात्रा में मौजूद है, तो फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, मैंगनीज, जिंक, फेरस, बोरॉन और नाइट्रोजन अवशोषित नहीं होते। यह चूने वाली मिट्टी या मुक्त चूने की उच्च मात्रा वाली मिट्टी में हो सकता है।

मोलिब्डेनम:

यदि मोलिब्डेनम बढ़ता है, तो कोई भी तत्व कम नहीं होता, लेकिन यदि मोलिब्डेनम बढ़ता है, तो बेल द्वारा तांबा और नाइट्रोजन अधिक मात्रा में ग्रहण किए जाते हैं।

तांबा:

यदि तांबा बढ़ता है, तो बेल मिट्टी में मौजूद लौह और मैंगनीज को ग्रहण नहीं कर पाती और यदि तांबा बढ़ता है, तो कोई भी तत्व नहीं बढ़ता या बेल को ऊपर उठाने में मदद नहीं करता।

मैंगनीज:

यदि मैंगनीज बढ़ता है, तो बेल मिट्टी में मौजूद लौह को ग्रहण नहीं कर पाती और यदि मैंगनीज बढ़ता है, तो कोई भी तत्व नहीं बढ़ता या बेल को ऊपर उठाने में मदद नहीं करता।

लौह:

यदि लौह बढ़ता है, तो बेल मिट्टी में मौजूद फास्फोरस और जस्ता को ग्रहण नहीं कर पाती और यदि लौह बढ़ता है, तो कोई भी तत्व नहीं बढ़ता या ऊपर उठाने में मदद नहीं करता।

जस्ता:

यदि जस्ता बढ़ता है, तो मिट्टी में मौजूद लौह को ग्रहण नहीं कर पाती और यदि जस्ता बढ़ता है, तो कोई भी तत्व नहीं बढ़ता या उठाने में मदद नहीं करता

बोरॉन:

अगर बोरॉन बढ़ता है, तो कोई भी तत्व प्रभावित नहीं होता या कोई भी तत्व ज़रूरत से ज़्यादा नहीं लिया जाता और अगर बोरॉन बढ़ता है, तो कैल्शियम मिट्टी से लिया जाता है

मैग्नीशियम:

अगर मैग्नीशियम बढ़ता है, तो बेल मिट्टी में पोटाश होने पर भी उसे नहीं ले पाती और अगर मैग्नीशियम बढ़ता है, तो फॉस्फोरस मिट्टी से लिया जाता है।

जैसा कि आपने ऊपर देखा, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम कम या ज़्यादा न हो जाएँ।

नाइट्रोजन (Nitrogen):

                                                          

पौधों में नाइट्रोजन के कार्यों व पोषण इसके सर्वाधिक महत्व के कारण इसे "पोषक तत्वों का राजा" कहा जाता है।

प्रायः सभी प्रकार की मृदाओं में नाइट्रोजन का अभाव रहता है पौधे की जड़ों द्वारा नाइट्रोजन मुख्यतः नाइट्रेट व अमोनियम दो रूपों में अवशोषित किया जाता है पत्तियों द्वारा इसे पौधा यूरिया के रूप में ग्रहण करता है।

पौधों में नाइट्रोजन के कार्य– नाइट्रोजन प्रत्येक जीवित कोशिका के लिए एक संरचनात्मक तत्व है इस प्रकार नाइट्रोजन के बिना पौधे एवम मानव जीवन का अस्तित्व नहीं है।

नाइट्रोजन पौधों में अनेक महत्वपूर्ण योगिक जैसे– क्लोरोफिल, फ्लेविंस, प्यूरींस, एंजाइम्स, हार्मोंस, एल्केलॉयड, जीवद्रव्य आदि के संस्लेषण में आवश्यक रूप में भाग लेता है ये सभी योगिक पौधों में अनेक उपपचायी क्रियाओं को नियंत्रित व संचालित करते हैं।

  • नाइट्रोजन पौधों में अन्य तत्वों के अवशोषण व उपयोग में सहायक है।
  • यह पौधों में वानस्पतिक वृद्धि व त्वरित विकास करता है।
  • यह पौधों में पत्तियों में अधिक गहरा रंग करता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण किया तेज होती है और अधिक कार्बोहाइड्रेट्स का संश्लेषण होता है।
  • शाक सब्जियों व हरे चारे की क्वालिटी में सुधार लाता है।
  • पौधों में कलियों, फूलों व फलों के स्थापन में सहायक है।

अधिक नाइट्रोजन के प्रभाव–

  • पौधों में अधिक सरसता, अधिक कीट व्याधि व रोग तथा फसल का गिर जाना।
  • अधिक उपयोग से वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा होने से दानों में कमी तथा फसल का देर से पकना।
  • अगर आपने अपनी फसल में अधिक से अधिक नाइट्रोजन प्रयोग किया है तब उत्पाद में नाइट्रोजन की मात्रा से पेट के रोगों का बढ़ना स्वाभाविक है।

पौधों में नाइट्रोजन कमी के लक्षण– नाइट्रोजन पौधों में गतिशील रहता है, इसलिए नाइट्रोजन की कमी होने पर सर्वप्रथम पौधे की निचले भागों में पत्तियों पर दिखते हैं।

1– पत्तियों में हरिमाहीनता जिसके फलस्वरूप पत्तियां पीली पड़ जाती है।

2– पत्तियों में पीलापन प्रारंभ में पत्तियों के सिरों पर होता है जो मध्य शिरा से होकर नीचे की ओर बढ़ता है।

3– पौधे की वृद्धि रुक जाती है और पौधे बौने रह जाते हैं।

4– इसके अभाव में कलियां अविकसित रहती है तथा फूल और फल छोटे और घटिया क्वालिटी के होते हैं।

5– कल्लों का न बन पाना व तने का धीरे धीरे सूखना नाइट्रोजन की कमी के लक्षण हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।