रैटुन मैनेजमेंट चलने से होने वाले फायदे:      Publish Date : 24/02/2026

   रैटुन मैनेजमेंट चलने से होने वाले फायदे:

                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

1. उत्पादन में वृद्धि: रैटुन मैनेजमेंट से गन्ने की उत्पादकता में वृद्धि होती है, जिससे किसानों की आय बढ़ती है।

2. मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार: रैटुन मैनेजमेंट से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे भविष्य में फसल की उत्पादकता बढ़ती है।

3. पानी की बचत: रैटुन मैनेजमेंट से पानी की बचत होती है, जिससे किसानों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।

4. रासायनिक उर्वरकों का कम उपयोग: रैटुन मैनेजमेंट से रासायनिक उर्वरकों का कम उपयोग होता है, जिससे मिट्टी और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

5. किसानों की आय में वृद्धि: रैटुन मैनेजमेंट से किसानों की आय में वृद्धि होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

6. गन्ने की गुणवत्ता में सुधार: रैटुन मैनेजमेंट से गन्ने की गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे चीनी मिलों को अधिक चीनी मिलती है।

7. पर्यावरण संरक्षण: रैटुन मैनेजमेंट से पर्यावरण संरक्षण होता है, जिससे भविष्य में हमारी धरती की सेहत अच्छी रहती है।

                                   

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है यहां पर चीनी मिलों की अच्छी उपलब्धता होने के कारण किसान भी गन्ने की खेती के अलावा और अन्य खेती को नहीं अपनाना चाहते लेकिन विगत कुछ वर्षों से गन्ने की प्रजाति कोश 0238 में लाल सड़न रोग लगने के कारण गन्ने का उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है इस गाने की प्रजाति से किसान भी खुश थे और मिल मालिक भी खुद से क्योंकि गाने का वजन अच्छा होता था साथ ही शुगर कंटेंट और रिकवरी भी अच्छी होने के कारण मिल मालिकों को भी फायदा होता था लेकिन विगत दो वर्षों से गन्ने की फसल में रेड रोट की समस्या के कारण यह प्रजाति बुरी तरह से प्रभावित हुई है आप किसानों को चाहिए कि वह नई प्रजातियों को लगाकर अपने उत्पादन को बढ़ाएं साथ ही जिनके खेतों में पुरानी प्रजाति या नई प्रजातियां हैं तो उनका रैटुन का मैनेजमेंट करके अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।