कुबोटा ने पेश किया AI पावर्ड ड्राइवरलेस हाइड्रोजन ट्रैक्टर      Publish Date : 20/10/2025

         कुबोटा ने पेश किया AI पावर्ड ड्राइवरलेस हाइड्रोजन ट्रैक्टर

                                                                                                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा

“बिना ड्राइवर के करेगा खेत की जुताई”

कुबोटा ने पेश किया AI पावर्ड ड्राइवरलेस हाइड्रोजन ट्रैक्टर, जो बिना ड्राइवर के करेगा खेत की जुताईः जापान की मशहूर ट्रैक्टर निर्माता कंपनी कुबोटा ने हाल ही में एक नई तकनीक से लैस हाइड्रोजन ट्रैक्टर पेश किया है, जो न केवल प्रदूषण मुक्त होगा, बल्कि यह पूरी तरह से AI द्वारा संचालित ड्राइवरलेस होगा। इस ट्रैक्टर को ओसाका में आयोजित वर्ल्ड एक्सपो 2025 में प्रदर्शित किया गया और यह खेती की दुनिया में एक नया अध्याय खोलने की संभावना रखता है। कुबोटा का यह ट्रैक्टर हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी से चलता है, जो इसकी ऊर्जा की खपत को न सिर्फ सस्ता बनाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी यह बेहद सुरक्षित है।

यह ट्रैक्टर 100 HP की शक्ति उत्पन्न करता है और एक बार हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग पर आधे दिन तक लगातार काम कर सकता है। कुबोटा का दावा है कि इस ट्रैक्टर में ड्राइवर की कोई सीट नहीं होगी, और इसे बिना ड्राइवर के नेटवर्क रेंज के भीतर कहीं से भी कंट्रोल किया जा सकता है। AI-संचालित कैमरे इसे अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चीज़ को पहचानने और जरूरत पड़ने पर खुद को रोकने की क्षमता देते हैं, जिससे यह अधिक सुरक्षित और स्मार्ट बनता है। इसके रिमोट ऑपरेशन से किसान अपने खेतों का काम अधिक कुशलता से और बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं।

सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैक्टर की खासियत:

                                                               

कुबोटा का यह हाइड्रोजन ट्रैक्टर केवल एक मशीन नहीं, बल्कि स्मार्ट एग्रीकल्चर की दिशा में एक कदम आगे बढ़ता हुआ है। AI तकनीक से लैस यह ट्रैक्टर अपने आसपास के माहौल को समझकर अपने आप कार्य करता है। किसानों को अब ट्रैक्टर चलाने के लिए किसी ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी, जिससे खेती की प्रक्रिया और भी तेज और बिना किसी खामी के हो सकेगी। इसके अलावा, ट्रैक्टर में हाइड्रोजन फ्यूल का उपयोग किया जाता है, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित है और किसानों को ऊर्जा के उच्च लागत से बचाता है।

टोयोटा से ली गई तकनीक

कुबोटा ने इस ट्रैक्टर के निर्माण में टोयोटा की मिराई हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। टोयोटा मिराई वही हाइड्रोजन कार है, जिसे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा चलाया गया था। कुबोटा ने इस तकनीक का उपयोग खेतों में किए गए सफल परीक्षणों में किया है, जिससे यह साबित होता है कि हाइड्रोजन से चलने वाली तकनीक खेती के लिए भी उपयुक्त हो सकती है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बिजली उत्पन्न होती है, और इस प्रक्रिया में केवल पानी और हीट उत्सर्जित होते हैं, जो कि पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है।

जल्द शुरू होंगे ट्रैक्टर के फील्ड ट्रायल

कुबोटा ने बताया है कि वह जल्द ही इस हाइड्रोजन ट्रैक्टर के फील्ड ट्रायल शुरू करने जा रहे हैं। कंपनी के प्रमुख डेवलपर्स में से एक, इसामु काज़ामा ने कहा कि वे एक डेमो प्रयोग करने जा रहे हैं और व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह ट्रैक्टर बैटरी-इलेक्ट्रिक मॉडल से कहीं अधिक शक्तिशाली है और तेजी से ईंधन भरने की क्षमता रखता है। इसके लंबे समय तक काम करने की क्षमता इसे खेती के लिए उपयुक्त बनाती है।

मुख्य विशेषताएं:

                                                            

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक: प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल।

AI द्वारा संचालित: ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के अपनी दिशा तय करता है और खुद से चलता है।

स्मार्ट सुरक्षा सिस्टम: AI-संचालित कैमरे और सेंसर के साथ, ट्रैक्टर खुद को रोकने की क्षमता रखता है।

100 HP पावर: मजबूत और टिकाऊ, खेतों में लंबे समय तक काम करने के लिए उपयुक्त।

टोयोटा की मिराई तकनीकः कुबोटा ने टोयोटा की हाइड्रोजन तकनीक को कृषि कार्यों में सफलतापूर्वक लागू किया।

इस AI-पावर्ड, ड्राइवरलेस हाइड्रोजन ट्रैक्टर के आने से खेती की दुनिया में एक नई क्रांति की संभावना है। कुबोटा का यह कदम स्मार्ट कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति साबित हो सकता है, जो न केवल कृषि कार्यों को और भी कुशल बनाएगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी रहेगा।

इस AI-पावर्ड, ड्राइवरलेस हाइड्रोजन ट्रैक्टर के आने से खेती की दुनिया में एक नई क्रांति की संभावना है। कुबोटा का यह कदम स्मार्ट कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति साबित हो सकता है, जो न केवल कृषि कार्यों को और भी कुशल बनाएगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी रहेगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।