
भारत में फूलों की खेती की सम्भावनाएं Publish Date : 22/08/2026
भारत में फूलों की खेती की सम्भावनाएं
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
भारत में फूलों की खेती एक लंबे समय से की जा रही है, लेकिन आर्थिक रूप से एक व्यवसाय के रूप में फूलों का उत्पादन पिछले कुछ वर्षों से ही शुरू किया गया है। समकली पुष्प जैसे गुलाब, कमल ग्लैडियोलस, रजनीगंधा, कार्नेशन आदि के बढ़ते उत्पादों के कारण गुलदास्ते और उपहारों के स्वरूप में इनका उपयोग सुरक्षित है। पुष्प को मनुष्य द्वारा सजावट और औषधियों के उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा डेमोक्रेसी और डेमोनिवर्स को डेकोरेशन में भी इनका उपयोग बहुलता से होता है। मध्यम वर्ग के जीवनस्तर में सुधार और आर्थिक खेती के कारण पुष्प बाजार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया और फूलों की खेती को एक विशाल बाजार का स्वरूप प्रदान किया गया है। भारत ने पुष्प उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है।
एक व्यवसाय के रूप में
फ्लोरिकल्चर हॉर्टिकल्चर की एक शाखा है, जिसमें फूलों का निर्माण, विपणन, व्यवसाय और फर्मों के अलावा दवाएँ आदि शामिल हैं। युवा इस व्यवसाय को शुरू करके अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं। जो युवा इस क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं, उनके लिए अनुभव बेहद जरूरी है। 10+2 में बायोलॉजी, फिजिक्स, कैमिस्ट्री जैसे कोर्स के लिए एग्रीकल्चर डिग्री के लिए मास्टर्स डिग्री के साथ पास होना जरूरी है, लेकिन मास्टर्स डिग्री के लिए एग्रीकल्चर में बैचलर डिग्री जरूरी है। मास्टर्स डिग्री के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च के लिए ऑल इंडिया एंट्रेंस द्वारा टेस्ट परीक्षा ली जाती है। वैज्ञानिक यह है कि किसी भी यूनिवर्सिटी में फ्लोरिकल्चर (ऑनर्स) की पढ़ाई नहीं होती, बल्कि बीएससी (एग्रीकल्चर) में एक विषय के तौर पर फ्लोरिकल्चर की पढ़ाई होती है।
फूलों के निर्माण के लिए सबसे अनुकूल समय सितंबर से मार्च तक है, लेकिन फूलों के निर्माण के लिए इस व्यवसाय का समय फरवरी से मार्च तक है। फूलों की लगभग सभी जानवरों की मूर्तियां सितंबर-अक्टूबर में आती हैं। गुलाब और गेंदा हर प्रकार की मिट्टी में प्लांट जा सकते हैं, लेकिन दोमैट, बलुआर या मटियार भूमि अत्यधिक उपयोगी है। गुलाब की खेती कलम लगा कर की जाती है। उन्नतशील के बीज पूसा या देश के किसी भी बड़े अनुसंधान केंद्र से प्राप्त किया जा सकता है। वैसे तो फूलों का बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग साल भर में चलती है, लेकिन इसमें बढ़ोतरी होती है।
कीट भक्षी पक्षी और छोटे-छोटे कीट-मकोड़े फूलों के दुश्मन होते हैं। इंडिपेंडेंट डिफ्रेंस के पूरे ढांचे का होना चाहिए। समय-समय पर दवाओं का प्रयोग भी जरूरी है। ओरिएंटल में फूलों को बेचने के लिए दोस्तों को हरे रंग की जाली लगानी चाहिए।
भारत में कई कृषि-कृषि क्षेत्र हैं जो कि मिठास और कोमल फूलों की खेती के लिए उपयुक्त हैं। उदारीकरण के बाद के दशक के दूसरे दशक के दौरान पुष्पकृषि ने संयुक्त राज्य अमेरिका के क्षेत्र में विशाल कदम उठाया है। इस युग में उत्पादक उत्पादन के स्थान पर वाणिज्यिक उत्पादन के साथ परिवर्तन देखा गया। वर्ष 2012-13 के दौरान, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा राष्ट्रीय पुष्पकृषि विक्रय 2012 के अनुसार भारत में फूलों की खेती के लिए 232.74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का प्रयोग किया गया, जिसमें फूलों का उत्पादन 1.729 मिलियन टन और खुले फूलों का उत्पादन 76.73 मिलियन टन हुआ।
कई राज्यों में फूलों की खेती का व्यवसायिक रूप से विकास हो रहा है और मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पीछे पश्चिम बंगाल (32%), कर्नाटक (12%), महाराष्ट्र (10%), राज्यों में फूलों की खेती का कारोबार बढ़ रहा है।
भारतीय फूल उद्योग में गुलाब, रजनीगंधा, ग्लेड्स, एंथुरियम, कार्नेशन, गेंदा आदि फूल शामिल हैं। फूलों की खेती, सब्जी और सब्जी दोनों में की जाती है।
भारत में वर्ष 2013-14 में फूलों की कुल कीमत 455.90 करोड़ रुपये रही। प्रमुख आयातक देश संयुक्त राज्य अमेरिका, नीदरलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, जापान और कनाडा थे। भारत में 300 से अधिक इकोनोमुख इकाइयाँ हैं। फूलों की 50% से अधिक इकाइयाँ कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हैं। विदेशी कंपनियों से तकनीकी सहायता के साथ भारतीय पुष्पकृषि उद्योग विश्व व्यापार में अपनी रसायन वृद्धि और उत्पादन है।
भारत में वर्ष 2012-13 के दौरान लगभग 232.74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पुष्पकृषि का कार्य किया गया। वर्ष 2012-13 के दौरान पुष्प उत्पादन 1.729 मिलियन टन खुला और 76.73 मिलियन टन कट फूल का उत्पादन हुआ। विविध विविधता की दृष्टि से फूलों की खेती का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। हालाँकि फूलों को बोने की भारत में नई नहीं है तथापि, बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक स्तर पर यूक्रेनी कला की खेती और पॉली हाउसों में यूक्रेनी संरक्षित खेती भारत में अलग-अलग है। विपुल आनुवंशिकता विविधताएं, विभिन्न प्रकार के कृषि क्लिनिकल पॉलीकैलिक बायोलॉजिक प्रतिभा निष्कर्ष मानव संसाधनों के कारण भारत में इस क्षेत्र में विविधता के नए मार्ग की पुष्टि अभी तक प्रकार के सात्त्विकता रूप से दोहन नहीं हुई है। विश्व व्यापार संगठन के युग में विश्व बाजार के खुलने के कारण पुष्पों और पुष्पोत्पादों का विश्व भर में स्वतंत्र रूप से सुझाव संभव है।
इस सन्दर्भ में प्रत्येक देश को प्रत्येक देश की सीमा में व्यापार करने के साधन उपलब्ध हैं। विश्व स्तर पर 140 से अधिक देश फूलों की खेती की खेती में लगे हुए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न देशों में फूलों का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। जहां प्रति वर्ष 10 बिलियन डॉलर से अधिक के फूलों की कीमत होती है। इसके बाद उपभोक्ता मामले में जापान का वह स्थान है जहां प्रति वर्ष 7 मिलियन डॉलर से अधिक कीमत के फूलों की खपत हैं। पुष्पों की खेती में भारत का भविष्य बेहतर है क्योंकि यहां के लोगों का रुझान बढ़ रहा है और भारत जैसे देश को फायदा हो सकता है क्योंकि हमारे यहां के देशी वनस्पति जगत में उच्च स्तर की विविधता उपलब्ध है।
पुष्प हमारे देश के समाज में गहराई से जुड़े हुए हैं और इनके बिना कोई भी उत्सव पूर्ण नहीं होता है। हमारा घरेलू उद्योग पोर्टफोलियो 7-10 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत में फलों और सब्जियों के मसालों का भी योगदान है और साल 2013-14 के दौरान 410.53 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पाकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका, बांग्लादेश, नीदरलैंड, इटली, और अन्य देश भारत के फल और सब्जियों के मुख्य बाजार हैं।
भारत सरकार ने पुष्पकृषि का एक उभरते हुए उद्योग के रूप में अभिनिर्धारण किया है और इसे 100% कृत्रिम मुख उद्योग का दर्जा दिया है। फूलों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए पुष्पकृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक पुष्पकृषि व्यापार बन गया है। अतः वाणिज्यिक पुष्पकृषि रसायन भंडार में शीत लहर के तहत एक उच्च तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। उत्पादन के दृष्टिकोण से भी वाणिज्यिक पुष्पकृषि महत्वपूर्ण हो रही है। लचीली औद्योगिक एवं व्यापार उद्यमों से ओपन फ्लावर के उत्पाद के विकास के लिए मार्ग प्रशस्त किया गया है नई बीज नीति ने सबसे पहले ही इंटरनेशनल स्टॉकहोम के औषधियों को बढ़ावा दिया ऐसा देखा गया है कि व्यावसायिक पुष्पकृषि में अन्य प्रयोगशालाओं की विशिष्ट प्रति इकाई क्षेत्र में बड़ी निर्माण क्षमता है इसलिए यह एक बेहतर व्यापार है। भारतीय पुष्पकृषि उद्योग के उत्पादों के लिए पुष्पों की विशाल खुले फूलों की ओर से उत्पादन किया गया है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
