
फूलों की खेती से पलायन पर महोग गांव हुआ खुशहाल Publish Date : 22/02/2026
फूलों की खेती से पलायन पर महोग गांव हुआ खुशहाल
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं गरिमा शर्मा
सोलन जिले का महोग गांव फूलों की खेती के लिए मशहूर है। स्थानीय किसान आत्मस्वरूप ने यहां सबसे पहले फूलों की खेती शुरू की, जिससे महोग और आसपास के गांवों की तस्वीर बदल गई। सोलन जिले के किसान आत्मस्वरूप वर्ष 1990 से फूलों की खेती कर रहे हैं। उन्होंने शुरुआत ग्लैडियोलस फूल की खेती से की, धीरे-धीरे – ग्रीन हाउस और पॉलीहाउस तकनीक अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया। अब वह कार्नेशन, लिलियम और गुलदाउदी जैसे फूलों की कई अन्य किस्में भी उगाते हैं।
तकनीक से बढ़ी फूलों की गुणवत्ता

आत्मस्वरूप की सफलता को देखकर गांव में- अन्य किसानों ने भी पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती की ओर रुख किया। शुरुआत में आत्मस्वरूप और अन्य किसान खुले में खेती करते थे, जिससे मौसम की मार से पौधों को नुकसान होता था। बाद में, सब्सिडी की मदद से ग्रीनहाउस तकनीक अपनाई गई। आधुनिक उपकरणों और ड्रिप सिंचाई से उत्पादन बढ़ा और गुणवत्ता में सुधार हुआ। इससे कमाई भी बढ़ी है। किसानों का कहना है कि इस बदलाव से न केवल युवाओं का पलायन रुका, बल्कि गांव अब रूरल टूरिज्म का हब बन गया है।
किसान कर रहे लाखों की कमाई

कार्नेशन और लिलियम की खेती, ड्रिप सिंचाई और अन्य आधुनिक तकनीकों के उपयोग से महोग गांव एशिया के प्रमुख फ्लावर हब में बदल चुका है। छोटे किसान भी अब इस मॉडल से लाभ उठा रहे हैं, वे सालाना 20-25 लाख तक कमा रहे हैं। महोग मॉडल ने आसपास के कई गांवों में भी फ्लोरीकल्चर को प्रेरित किया है। चायल, कुरगल और कोठी क्षेत्र के गांवों में अब इसी मॉडल को अपनाया जा रहा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
