
क्यों होती है मीठा खाने की तलब Publish Date : 16/10/2026
क्यों होती है मीठा खाने की तलब
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
काम का तनाव बढ़ते ही हाथ अपने आप ही चॉकलेट की ओर बढ़ जाता है। मूड खराब हुआ नहीं कि आइसक्रीम का डिब्बा खुल गया। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसकी वजह हमेशा भूख नहीं होती। कई बार तनाव और चिंता की वजह से भी मीठा खाने की तलब बढ़ जाती है।
लंबे समय तक तनाव में रहने पर शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इससे भूख बढ़ सकती है और अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की चाह भी तेज हो सकती है।
इस परिप्रेक्ष्य में हमोर आयुवेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा कहते हैं, ‘तनाव के दौरान मीठा खाने से कुछ देर के लिए अच्छा इसलिए महसूस होता है, क्योंकि मीठे खाद्य पदार्थ मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम को सक्रिय करते हैं। इससे तनाव से अस्थायी राहत मिलती है।’
कब सावधान होने की जरूरत

यदि भूख न होने पर भी बार-बार मीठा खाने का मन करे, तनाव के तुरंत बाद इसकी तलब बढ़ जाए या मीठा खाने के बाद अपराध बोध महसूस हो, तो यह इमोशनल ईटिंग का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक अधिक चीनी का सेवन वजन बढ़ने, इंसुलिन प्रतिरोध और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए मीठे की तलब के पीछे की वजह को पहचानना जरूरी है।
मीठे की चाह को कैसे संभालें?
हर क्रेविंग का जवाब मिठाई खाना नहीं है। नियमित और संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी और 7-8 घंटे की नींद से शुरुआत करें। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। मीठा खाने का मन होने पर फल, मेवे, सीड्स या बिना चीनी का दही बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

तनाव कम करने के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधि, योग, ध्यान और गहरी सांस लेने जैसी आदतें भी मददगार साबित हो सकती हैं। तो अगली बार तनाव में चॉकलेट का पैकेट खोलने से पहले खुद से एक सवाल जरूर पूछें, ‘क्या मुझे सच में भूख लगी है, या मैं सिर्फ तनाव महसूस कर रहा हूं?’
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।