गुडहल के फूल के औषधीय उपयोग एवं सम्भावित हानियाँ      Publish Date : 12/10/2026

गुडहल के फूल के औषधीय उपयोग एवं सम्भावित हानियाँ

                                                                                                        डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

गुड़हल के फूल आपने जरूर देखे होंगे। गुड़हल के फूल को अड़हुल का फूल भी कहते हैं। ज्यादातर गुड़हल के फूल का उपयोग पूजा-पाठ आदि व्यंजनों के लिए किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुड़हल के फूल का सेवन भी किया जाता है, और विभिन्न रोगों के इलाज में भी गुड़हल के फूल के फायदे मिलते हैं।

आयुर्वेद में गुड़हल के फूल को एक बहुत ही बेहतरीन औषधि बताया गया है। त्वचा के अनुसार, गन्जेपन की समस्या, बालों को बढ़ाने में अंडहुल से फायदे मिलते हैं। इतना ही नहीं कई गंभीर चिकित्सीय उपचारों के लिए अड़हुल का उपयोग किया जाता है।

गुड़हल क्या है?

                                        

गुड़हल के फूल बाग-बगीचे, घर और बागीचे आदि में लगाए जाते हैं। गुड़हल का फूल इकहरा, दोहरा, तिहरा, लाल, सफेद या सफ़ेद लाल, बेरंग, पीला, नारंगी जैसे कई रंग का होता है। इसका केसर बाहरी रूप जैसा दिखता है। सफेद, सफेद और लाल रंग वाला गुड़हल फूल विशेष गुणकारी होता है।

गुड़हल की मुख्यतया दो होती हैं।

जपा बड़ी (हिबिस्कस रोजा-सिनेंसिस लिनन)।

जपा छोटा (मालवाविस्कस आर्बारियस कैव.)।

गुड़हल के अन्य नाम

गुड़हल का वनस्पतिक नाम हिबिस्कस रोजा-सायनेन्सिस है, और यह मालवेसी (मालवेसी) कुल से है। अड़हुल का दूसरा नाम ये भी हैः-

हिंदी - जावा, ओड्रुल, अढोल, गुड़हल, जवाकुसुम, अड़हुल।

अंग्रेजी - शू फ्लावर (जूता फूल), रोज मैलो (गुलाब मैलो), रोज ऑफ चाइना (चीन का गुलाब), गार्डन हिबिस्कस (गार्डन हिबिस्कस), चाइना रोज (चीन गुलाब)।

संस्कृत - औद्रफूल, जपा, अरुण, प्रतिका, अर्कप्रिया, हरिवल्लभ, त्रिसंध्या।

उड़िया - मोनदारो (मोंडारो), ओडोफूलो (ओडोफुलो)।

कन्नड़ - दासनिगे (Dasnige), दसवला (Daswala)।

गुजराती - जासुद (जसुद), जासुवा (जसुवा)।

तेलुगु - दासानी (दासानी), दासनमु (दासनमु)।

तमिल - सेम्बरुट्टी (सेम्बरट्टई), सेवारट्टी (सेवरट्टई)।

बंगाली - ओरु (ओरु), जुबा (जोबा)।

नेपाली - जपा कुसुम (जपा कुसुम), गुड़हल (गुडहल)।

मराठी - जसवंद (जसवंदा), जसवंद (जसवंडी)।

मलयालम - शेम्परट्टी (चेम्परत्ती), शेम्परट्टी (शेमपरत्ती)।

अरबी - अंघारे हिन्दी (अंघारेहिन्दी)।

फ़ारसी - अंगारेहिन्दी (अंगारेहिन्दी)।

गुड़हल के लाभः

गुड़हल के फूल के हमें बहुत सारे स्वास्थ्यगत लाभ प्राप्त होते हैं। गुड़हल के औषधीय विधि प्रयोग, प्रयुक्त की मात्रा एवं मात्रा कुछ इस प्रकार से हैं:-

बालों को बढ़ाने में गुड़हल के लाभ-

गुड़हल के दुकानदारों को पीसकर लुगदी बना लें। इसे बालों में लगाएं। दो घंटे बाद बालों को धोकर साफ कर लें। इस प्रयोग को नियमित रूप से करने से बालों को पोषण मिलता है, और सिर भी ठंडा रहता है।

गुड़हल के फूल के रस में बराबर मात्रा में जैतून का तेल, आग में पका लें। जब केवल तेल ही रह जाए तो शीशी में भर कर रख लें। प्रतिदिन बालों में मल कर इस तेल को लगाएं।

अड़हुल के फूल और भृंगराज के फूल को भेड़ के दूध में पीसकर लोहे के बर्तन में रखा जाता है। सात दिन बाद के पौराणिक भृंगराज के पंचांग के रस में बताया गया है। इससे बाल धोने से बाल काले हो जाते हैं।

लोह भस्म, जड़ी बूटी के मिश्रण और जपा के फूल (जाबा फूल) से बने पेस्ट से सिर में लेप करने से बाल लंबे समय तक काले रहते हैं।

बालों के झड़ने की समस्या में गुड़हल की पत्तियों का उपयोग का उपयोग करें।

रूसी (डैंड्रफ) की समस्या में गुड़हल के फायदे

आप रूसी समस्या से निपटने के लिए गुड़हल के लाभ ले सकते हैं। गुड़हल के फूल के रस में बराबर मात्रा में तिल का तेल मिला लें। इसे आग पर पकाएं। तेल बाकी बचने पर शीशी में भरकर रख लें। इसे शीशे में भर लें। इस तेल के इस्तेमाल से रूसी (डैंड्रफ) खत्म हो जाती है।

गन्जेपन की समस्या में गुड़हल के लाभ

गाय के मूत्र में गुड़हल के फूलों को पीसकर सिर में लगाने से नए बाल उगते हैं। इससे गंजापन दूर होता है।

नींद न आने की परेशानी में गुड़हल से लाभ

गुड़हल के 100 फूल लें। अकेले हरे को फ़्लोरिडा कोलेम्बेनियम के रस में सूखा लें। इसे कांच के बर्तन में रात किसी खुले स्थान पर रख दें। सुबह इसे मसलकर अच्छी तरह से मिला लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी, और 1 बोतल उत्तम गुलाब जल मिला लें। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह से पीने पर शरबत बन जाती है। इसे 15 से 40 मिली की मात्रा में रहने से नींद न आने की परेशानी में लाभ मिलता है।

ल्यूकोरिया में गुड़हल के लाभ

दस से बारह जप फूल की कलियों को दूध में पीसकर स्त्री को पिलाएं। इसके साथ ही भोजन में दूध का प्रयोग करें। इससे ल्यूकोरिया ठीक हो जाता है।

अड़हुल की 4-5 कलियों को घी में तलें। सुबह सात दिन तक मिश्री के साथ, और गाय का दूध पिएं। इससे ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

अड़हुल (गुड़हल) पंचांग को रात भर पानी में सोलाकर रख दें। सुबह-सुबह मसल कर अच्छा लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से ल्यूकोरिया में फायदा होता है।

याददाश्त बढ़ाने के लिए गुड़हल के फायदे

गुड़हल के फूल और सब्जी को समान मात्रा में लेकर सुखाएं। इसे पीसकर पाउडर बना लें और शीशी में भर लें। सुबह-शाम की एक मात्रा में। यह आपको एक कप स्वादिष्ट दूध के साथ मिलता है। यह याददाश्त (स्मरण-शक्ति) बढ़ाने में बहुत कारगर है।

खून की कमी (खून की कमी) रोग में गुड़हल से लाभ

एक कप दूध के साथ सुबह शाम नियमित रूप से सेवन करें। इससे कुछ ही माह में खून की कमी दूर होती है। शरीर में शक्तियाँ होती हैं।

गुड़हल की जड़ और फूलों का काढ़ा बना लें। इसे 20-40 मिली की मात्रा में सुबह पीने से गर्भ में पल रहे बच्चे का शरीर स्वस्थ रहता है।

इंफेक्शन के लिए गुड़हल के गुण

अड़हुल के फूलों के कांजी में टुकड़े लें। इसमें 50 ग्राम तक पुराना गुड़ मिला लें। मासिक धर्म का समय तीन दिन तक स्त्री वर्ग से नहीं मिलता। इसका सेवन डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही करें।

मासिक धर्म विकार में गुड़हल से लाभ

गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियाँ लें। आईटी के रस में ठोसकर कांच के उद्यमों में रात भर के लिए किसी भी खुले स्थान पर रखें। सुबह मसलकर अच्छा लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी और 1 बोतल उत्तम गुलाब जल स्टॉक। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह से पीने पर शरबत बन जाती है। इसके सेवन से मासिक धर्म की अनियमितता में लाभ होता है।

गुड़हल के फूलों को घी में तलें। इसे बूरा के साथ-साथ समग्र से भी मासिक धर्म के दर्द में लाभ होता है।

मासिक धर्म संबंधी विकारों के उपचार में गुड़हल के फूल का उपयोग

यौन सहनशक्ति बढ़ाने में गुड़हल की पत्तियों के लाभ

गुड़हल के फूल को छाया में सुख लें। इसके अवशेषों के अनुपात में समान मात्रा में खांड मिला लें। इसका 40 दिन तक 6 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे पुरुषत्व (सेक्सुअल स्टेमिनाना) बढ़ जाता है।

गुड़हल के औषधीय गुण से मुंह के छाले की बीमारी का इलाज

गुड़हल की जड़ को साफ करके धो लें। इसे एक-एक इंच के दबाव में दबा कर रख लें। दिन में 3-4 बार, एक-एक टुकड़ा चबाकर खाएं। एक दो दिन में ही मुंह के छाले ठीक हो जायेंगे।

गुड़हल के औषधीय गुण से पेट दर्द से आराम

पेट के दर्द को ठीक करने के लिए 5-10 मिली गुड़हल के रस का सेवन करें। इससे पेट के दर्द से आराम मिलता है।

सिर दर्द से राहत पाने के लिए गुड़हल का सेवन

गुड़हल के 100 फूल की पंखुड़ियाँ लें। आईटी के रस में ठोसकर कांच के उद्यमों में रात भर के लिए किसी भी खुले स्थान पर रखें। सुबह मसलकर अच्छा लें। इसमें 650 ग्राम मिश्री या चीनी और 1 बोतल उत्तम गुलाब जल स्टॉक। इसे दो बोतलों में बंद कर धूप में दो दिन तक रखें। इस दौरान बोतल को हिलाते रहें। मिश्री अच्छी तरह से पीने पर शरबत बन जाती है। इसमें 15 से 40 मिली तक की मात्रा में रहने से सिर दर्द से राहत मिलती है।

गुड़हल के पौधे और फूलों को पानी में पीसकर सूजन और दर्द वाले स्थान पर रखा जाता है। इससे सूजन और दर्द से आराम मिलता है।

सफेद दाग में अंडहुल के औषधीय गुण से लाभ

सफेद दाग के इलाज के लिए अड़हुल के चार फूलों का सुबह शाम 2 साल तक सेवन करें। इससे सफेद दाग में फायदा होता है।

जपा फूल की जड़ के आधार में बराबर-बराबर मात्रा में कमल के फूल की जड़ का अनुपात। इसमें व्हाइट सेमल की साँची का साँचा। इसे 2-3 ग्राम की मात्रा में जल के साथ सेवन करें। इससे होता है सफ़ेद दाग का इलाज।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।