काली खाँसी के लिए आयुर्वेदिक उपचार      Publish Date : 10/10/2026

      काली खाँसी के लिए आयुर्वेदिक उपचार

                                                                                                      डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

खांसी एक आम समस्या है जो किसी भी मौसम में आपको हो सकती है। कई बार खांसी आपकी ठीक हो जाती है तो कुछ मामलों में औषधियों का सहारा लेना पड़ता है। कभी-कभी खांसी की समस्या इतनी बढ़ जाती है कि इसकी वजह से बेचैनी और यहां तक कि दर्द भी होने लगता है। इस लेख में हम आपको खांसी के घरेलू इलाज, खांसी के लिए आयुर्वेदिक कफ सिरप (आयुर्वेदिक कफ सिरप) और स्वाद से जुड़ी युक्तियों के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

खांसी के प्रकार

अगर खांसी आने पर साथ में बलगम भी निकल रहा है तो इसे बलगम वाली खांसी या डायबिटीज खांसी कहा जाता है। वहीं दूसरी ओर अगर बलगम नहीं निकल रहा है तो इसे सूखी खांसी कहते है।

सूखी खांसी की समस्या अक्सर रात के समय बहुत बढ़ जाती है और इससे लोगों को अनिद्रा की समस्या हो जाती है। यही कारण है कि खांसी की कई अंग्रेजी दवाएं (खांसी की दवा) में ऐसे घटक मिलते हैं जिससे नींद जल्दी आ जाए और खांसी से आराम मिल जाए।

वैसे तो बाजार में खांसी के लिए कई कफ सिरप मौजूद होते हैं लेकिन ज्यादातर लोग आयुर्वेदिक कफ सिरप लेना पसंद करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आयुर्वेदिक कफ सिरप (आयुर्वेदिक कफ सिरप) पीने से भी नींद नहीं आती है और इससे पुरानी खांसी भी जल्दी ठीक हो जाती है।

खांसी होने के कारण

कभी-कभी कुछ और आयुर्वेदिक दवाएं जैसे कि कोल्ड ड्रिंक पी लेना या कोल्ड ड्रिंक पी लेना के बाद खांसी होना आम बात है। इसके अलावा सर्दी होने पर या गले में संक्रमण होने से भी खांसी की समस्या हो सकती है।

खांसी से राहत पाने का आसान घरेलू उपाय

खांसी होने पर ज्यादातर लोग घरेलू उपाय के बारे में सबसें पहले सोचते हैं। खांसी का उपचार आयुर्वेदिक तरीके से भी किया जाता है। अगर सही तरीके से घरेलू इलाज किया जाए तो खांसी जल्दी ठीक हो जाती है। आइए जानते हैं खांसी पर किन दवाओं का सेवन करना फलदायी होता है-

शहद (कफ के लिए शहद): सूखी और कफ वाली दोनों तरह की खांसी का इलाज बहुत ही खतरनाक है। रात में सोने से पहले अगर आप एक शहद का सेवन करते हैं तो रात में खांसी कम आती है। आयुर्वेद के अनुसार शहद में कफ, शामक गुण होने से खांसी की समस्या को कम करने में मदद मिलती है।

तुलसी का प्रयोगः आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही खांसी के इलाज के लिए तुलसी का प्रयोग किया जाता रहा है। तुलसी में एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इनफ्लेमेट्री, एंटीसिव और एंटी-एलर्जिक क्षमताएं होती हैं जो खांसी से जल्दी राहत दिलाती हैं। यही कारण है कि खांसी की सबसे अधिक आयुर्वेदिक औषधि तुलसी का प्रयोग किया जाता है।

खांसी के लिए मुलेठी का उपयोगः मुलेठी को आयुर्वेद में यष्टिमधु के रूप में भी वर्णित किया गया है जिसका निर्देश कफ एसोसिएटेड कोल्ड ड्रिंक दिया गया है। गले के स्वास्थ्य के लिए मुलेठी बेहद चमत्कारी है। खांसी हो या गले में खराश हो मुलेठी का सेवन करने से जल्दी आराम मिलता है। मुलेठी गले में ज्यादा बलगम बनने से रुकती है और इस तरह खांसी से राहत मिलती है।

खांसी का उपचार काली मिर्च सेः काली मिर्च गले की जलन से राहत दिलाती है साथ ही अगर इसका सेवन शहद के साथ किया जाए तो खांसी से जल्दी आराम मिलता है।

सूखी खांसी के उपचार के लिए पिप्पली का उपयोगः पिप्पली की तासीर गर्म होती है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार, ग्लास सीट की समस्या से राहत की समस्या बहुत ही कम है। इसके अलावा यह गले में मौजूद कफ को निकालने में भी मदद करता है।

सोंठ या सूखी अदरक का उपयोगः खांसी और गले के संक्रमण के इलाज में जाने वाली औषधियों में से सोंठ का उपयोग प्रमुखता से किया जाता है। सोंठ या खांसी के इलाज में खांसी को दूर करने के लिए सोंठ बहुत उपयोगी है ।

खांसी के लिए आयुर्वेदिक औषधियां

कफ सिरप के अलावा ऐसे कई लक्षण भी हैं जो खांसी से बहुत जल्दी राहत दिलाते हैं। इन मसालों के सेवन से पुरानी खांसी या क्रोनिक कफ भी ठीक लगता है। आइये अब इनके बारे में आपको बताते हैं:

सितोपलादि चूर्ण

                                  

सितोपलादि खांसी की एक प्रसिद्ध औषधि है। अधिकांश औषधीय चिकित्सक पुरानी खांसी या सूखी खांसी से पीड़ित लोगों को सितोपलादि केश औषधि की सलाह देते हैं। इसमें मौजूद जड़ी-बूटी में कफ को शमन करने का गुण होता है। सितोपलादि आकृतियों को शहद के साथ लें और इसे लेने के बाद कम से कम एक घंटे पर कुछ भी स्थिर न रहें। सूखी खांसी होने पर इसे रात में सोने से पहले लेना चाहिए।   

त्रिकटु चूर्ण

काली मिर्च, पिप्पली और सोंठ में त्रिकटु के मिश्रण को कहा जाता है। इसका उपयोग कफ और पाचन तंत्र में किया जाता है। यह केश कफ को बनने से पहले खांसी से जल्दी राहत मिलती है। त्रिकटु केशिल को भी शहद के साथ मिलाकर बनाया जा सकता है।

खांसी के दौरान क्या खाएं और क्या नहीं

  • लस्सी, कोल्ड ड्रिंक या छाछ पीने से मनाही करें।

  • अधिक तेल मूल वाली वस्तुओ का सेवन न करें।

क्या खाएं

  • गुनगुना पानी पिएं।

  • नमक के पानी से गरम करें।

  • गरम तासीर वाली वस्तुएँ खाएं।

लेख में बताए गए खांसी के घरेलू इलाज आयुर्वेदिक कफ सिरप (आयुर्वेदिक कफ सिरप) को 3-4 दिन बाद लें। अगर खांसी से भी आराम नहीं मिल रहा है तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक चिकित्सक के पास अपनी जांच कराएं।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।