
आयुर्वेदिक टैबलेट चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग कब और कैसे Publish Date : 05/09/2026
आयुर्वेदिक टैबलेट चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग कब और कैसे
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
चन्द्रप्रभा वटी क्या है
आयुर्वेद में चंद्रप्रभा वटी एक बहुत ही प्रसिद्ध और उपयोगी वटी है। इसके नाम से ही इसके गुण का भी पता चल जाता है। चन्द्र यानि चन्द्रमा, प्रभा यानि चमकीला, यानि चन्द्रप्रभा वटी के सेवन से आपके शरीर शरीर में चन्द्रमा जैसी कान्ति या चमक और बल पैदा होता है। इसलिए शारीरिक कमजोरी पैदा होने वाली लगभग तत्काल में अन्य औषधियों के साथ चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग भी किया जाता है।
चंद्रप्रभा वटी के उपयोग और लाभ
चंद्रप्रभा वटी है मधुमेह में लाभदायक
मधुमेह (मधुमेह) के नियंत्रण के लिए चन्द्र वाटी का उपयोग प्रमुखता से किया जाता है। मधुमेह के रोगियों के लिए यह औषधि बहुत ही चमत्कारी सिद्व होती है।
चंद्रप्रभा वटी ठीक करती है किडनी संबंधी रोग
किडनी का खराब होना, जब मूत्र की उत्पत्ति बहुत कम होती है जिसके शरीर में कई रोग उत्पन्न होते हैं और मूत्राशय में विकृति होना मूत्र आना पर जलन, पेडू में जलन, मूत्र का रंग लाल या अधिक होना दुर्गंध सभी समस्याओं में चंद्रप्रभा वटी अति उपयोगी है। इसका सेवन करने गुर्दों की सफाई होती है जो शरीर को साफ करते हैं। बढ़ा हुआ यूरिक एसिड और पोटेशियम आदि पोषक तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेकर चंद्रप्रभा वटी का उपयोग कर सकते हैं।
मूत्र पथ की सूजन में चंद्रप्रभा वटी का उपयोग
यह वटी की एस्ट्रोलॉजी और वीर्य विकार के लिए भी काफी प्रसिद्ध औषधि है। मूत्र त्याग करने पर जलन, रुक-रुक कर मूत्र का आना, मूत्र में चीनी आना, मूत्र में एल्ब्यूमिन जाना (एल्ब्यूमिनुरिया), मूत्राशय की सूजन और लिंगेन्द्रिय की कमजोरी भी इस वटी के सेवन करने से जल्दी ठीक हो जाती है।
शारीरिक और मानसिक शक्ति के लिए टॉनिक की तरह काम करती है
प्राकृतिक चंद्रप्रभा वटी के नियमित सेवन से शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। यह सरल से श्रम से होने वाली थकान और तनाव आदि को कम करती है, शरीर में स्फूर्ति लाती है और स्मरण शक्ति (याददाश्त) को बढ़ाती है। चंद्रप्रभा वटी के लाभों को देखते हुए इसे संपूर्ण स्वास्थ्य टॉनिक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके साथ लोहासव या पुनर्नवास का भी प्रयोग करना चाहिए। टॉनिक होने के अलावा चंद्रप्रभा वटी शरीर को विभिन्न प्रकार के टॉक्सिन (विषाक्त पदार्थ) से मुक्त करने का भी काम करती है, चंद्रप्रभा वटी सम्पूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
चंद्रप्रभ वटी से पाप्त होने वाले प्राप्त अन्य लाभ
पुरुषों में शुक्र का अधिक होना या फिर शरीर में अधिक राजस्राव से शारीरिक कांति नष्ट होना हो जाती है, शरीर का रंग पीला पड़ना, जल्दी ही व्यायाम से जल्दी थक जाना, आंखों के नीचे कालापन, भूख न लगना आदि विकार पैदा हो जाना। ऐसे में इस वटी का प्रयोग करने से लाभ मिलता है। यह रक्तादि धातुओं की पुष्टि करती है। यह शुक्राणु कोशिका (शुक्राणु गिनती) को बढ़ाती है, रक्त कोशिका रक्त परीक्षण का अनुसंधान और निर्माण करती है। स्वप्नदोष (नाईटफॉल) या शुक्रवाहिनी नादरियों के ड्राई पैड जाने पर इसे गुडुची के क्वाथ से लेना चाहिए।
महिलाओ के लिए चंद्रप्रभा वटी के लाभ
स्त्री रोगों के लिए भी यह एक अच्छी औषधि है। यह गर्भ की कमजोरी दूर कर उसे स्वस्थ्य बनाता है। गर्भगृह के बड़े आकार, उसकी रसौली, बारंबारबोरबांट आदि में चंद्रप्रभा वाटी का सेवन रामबाण की तरह से काम करता है। यह गर्भाशय-संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए गर्भाशय को बल प्रदान करता है। अधिक मासिक धर्म या अधिक संतति होना या विभिन्न भ्रूणों से गर्भपात होना, कष्ट के साथ मासिक धर्म आना (पीरियड पेन), लगातार 10-12 दिन तक राजस्राव इन सब रोगें में चन्द्रप्रभा वटी को अशोक घृत या फलघृत के साथ लेना चाहिए।
चंद्रप्रभा वटी एक अच्छा दर्दनिवारक भी है
दर्द से राहत फ्लोरिडा में भी चंद्रप्रभा वटी कमाल की औषधि है। यूरिक एसिड कम करने के गुण जोड़ों के दर्द, गठिया वात के दर्द, जोड़ों के सूजन आदि को कम और खत्म कर देता है। इसके सेवन से मासिक धर्म के उपद्रव भी ठीक होते हैं और उनके कारण होने वाले पेड़ू के दर्द, कमर दर्द आदि में आराम मिलता है।
चंद्रप्रभा वटी के कुछ अन्य लाभ
अग्नि, अजीर्ण, भूख न लगना, इन सभी में कमजोरी महसूस करना, इन सभी रोगों में चंद्रप्रभा वटी का लाभ मिलता है। मल-मूत्र के साथ वीर्य का गिरना, बार-बार मूत्र आना, ल्यूकोरिया (ल्यूकोरिया), वीर्य दोष, पथरी (किडनी स्टोन), अंडकोशों की वृद्धि, कब्ज (पीलिया), बवासीर (बवासीर), कमर में दर्द (पीठ दर्द), नेत्र रोग तथा स्त्री रोग से संबंधित स्त्री रोग पुरुषों में यह ठीक होता है।
चंद्रप्रभा वटी का उपयोग कैसे करें
सामान्यतः इसकी गोलियां बनती हैं और दो-दो गोलियां सुबह-शाम सामान्य पानी या दूध के साथ लेनी चाहिए। कमजोरी आदि की स्थिति में इसे दूध के साथ लेना चाहिए या वैद्य की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।
चंद्रप्रभा वटी का आयुर्वेद में उल्लेख-
चन्द्रप्रभा वटी का वर्णन आयुर्वेद के ढ़ग्रंथ में पृष्ठ क्रम ढ़ पर इस प्रकार से किया गया है-
चद्रप्रभा वाचा मुस्तं भूनिम्बामृतदारुकम्।
हरिद्रा.तिविषादर्वी पिप्पलिमूलचित्रकौ।।
धान्यकं त्रिफला चव्यं विडंगं गजपिप्पलि।
व्योषां माक्षिकधातुश्च द्वौ खरौ लवणत्रयम्।।
एतानि शान्मात्राणि प्रत्येकं कार्येद् बुध।
त्रिदवृन्ति पत्रकं च त्वगेला वंशरोचना।।
प्रत्येकं करिश्मात्राणि कुर्यादेतानि बुद्धिः।
द्विकरं हतलोहं स्याच्चतुष्कर सीता भवेत्।।
शिलाजत्वष्टकरं स्यादष्टौ करश्च गुग्गुलो।
अभिरेक्त्र संक्षुन्नै कर्त्तव्या गुटिका शुभा।।
चद्रप्रभाति अमृता सर्वरोगप्रणाशिनि।
प्रमेहंविंशतिं कृच्छं मूत्रघातं तथास्मरिम्।।
विबन्धनाहशूलानि मेहनं गायत्रीमर्बुदम्।
आनंदभैरं तथा पांडुं कामलां च हलीमकम।।
अत्र भगवं कटिशूलं श्वासं कासं विचर्चिकाम्।
कुष्ठान्यारसांसि कण्डुं च प्लीहोदरभगन्दरम्।।
दंतरोगं उत्सवरोगं तृणमर्तवजां रुजम्।
पूत्सां शुक्रगतानदोषान्मांदाग्निमरुचिं तथा।।
वायुतं पित्तं कपैन हन्यद् बल्या वृष्या रसायनि।
चद्रप्रभायं करस्तु चतुषाणो विधीयते।।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
