एसिडिटी के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार      Publish Date : 22/08/2026

एसिडिटी के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार

                                                                                                        डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

एसिडिटी की समस्या लगभग सभी को कभी न कभी हो जाती है। यह पाचन तंत्र से संबंधित आम समस्या है, अत्यधिक तैलीय और मसालेदार भोजन करने से पेट में पित्त के बढ़ने से एसिडिटी की शिकायत हो जाती है और पेट में जलन एवं खट्टी डकारों का सामना व्यक्ति को करना पड़ता है। हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड पेपसीन मौजूद होता है जो भोजन के पाचन में अहम भूमिका निभाता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन को टुकड़ों में तोड़ता है और बाहरी बैक्टेरिया से रोगों को बचाता है। हमारे पेट की परत इस एसिड के लिए अनुकूलित होती है इसलिए यह पेट को नुकसान नहीं पहुँचाती। एसिडिटी यदि बार-बार होती है तो यह गैस्ट्रो इसोफेगल डिजीज (Gastro Oesophaegal Disease (GRED) में भी बदल सकती है।

कभी-कभी अनुचित भोजन के कारण यह समस्या सभी को हो सकती है परंतु कुछ लोगों में यह समस्या अधिक होने लगती है जिसे नजरअन्दाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह अधिक होने पर अधिक समस्या गंभीर रूप भी ले सकती है। इसलिए सबसे पहले घरेलू नुस्खों को आजमाना चाहिए।

एसिडिटी क्या है?

आयुर्वेद में हाइपरएसिडिटी को अम्लपित्त कहा जाता है तथा सामान्य भाषा में इसे पित्त बनना भी कहते है। अधिक मसालेदार, गर्म एवं तीखे भोजन के सेवन के कारण व्यक्ति को एसिडिटी हो जाती है। आयुर्वेद में दोषों के असंतुलन के कारण रोग उत्पन्न होता है। किसी दोष के अधिक बढ़ने या घटने के कारण दोष असंतुलित अवस्था में आकर रोगोत्पत्ति करते है। अम्लपित्त में मुख्यत पित्त दोष बढ़कर अम्लता उत्पन्न करता है जिस कारण व्यक्ति को सीने में जलन और खट्टी डकारें आती है।

आयुर्वेदिक उपचार सही खान-पान और जीवनशैली का भी निर्देश देता है। अतः इस समस्या में पित्त को कम करने वाला उपचार के साथ-साथ पित्त को कम करने वाले आहार सेवन करने का भी निर्देश दिया जाता है, यदि उपचार करते समय निर्दिष्ट आहार का पालन न किया जाए तो रोग ठीक नहीं होता। अतः आयुर्वेदिक उपचार में खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।

एसिडिटी होने के कारण

  • अत्यधिक मिर्च-मसालेदार और तैलीय भोजन करना।
  • पहले खाए हुए भोजन के बिना पचे ही पुनः भोजन करना।
  • अधिक अम्ल पदार्थों के सेवन करने पर।
  • पर्याप्त नींद न लेने से भी हाइपर एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
  • बहुत देर तक भूखे रहने से भी एसिडिटी की समस्या होती है।
  • लम्बे समय से पेनकिलर जैसी दवाइओं का सेवन करने से भी यह समस्या बढ़ सकती है।
  • गर्भवती महिलाओं में भी एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो जाती है।
  • नमक का अत्यधिक सेवन करने से भी ऐसीडिटी की समस्या बढ़ती है।
  • शराब और कैफीन युक्त पदार्थ का अधिक सेवन ऐसीडिटी होती है।
  • अधिक भोजन करना और भोजन करते ही सो जाने भी खतरा बढ़ता है।
  • अधिक धूम्रपान के कारण ऐसीडिटी की समस्या बढ़ती है।
  • कभी-कभी अत्यधिक तनाव लेने के कारण भी भोजन ठीक प्रकार से हजम नहीं होता और एसिडिटी की समस्या हो जाती है।
  • आजकल किसान फसल उगाने में कई प्रकार के कीटनाशक और उर्वरक का इस्तेमाल करते है, जिससे यह जहरीले रासायनिक खाद्य पदार्थ खाद्य सामग्रियों के माध्यम से शरीर में पहुँच कर पेट से संबंधित रोग उत्पन्न करते है।

एसिडिटी के लक्षण

वैसे तो एसिडिटी का मूल लक्षण पेट में गैस पैदा होना होता है, लेकिन इसके अलावा और भी लक्षण होते हैं जो इस प्रकार से है-

  • सीने में जलन जो भोजन करने के बाद कुछ घंटो तक लगातार रहती है।
  • खट्टी डकारों का आना कई बार डकार के साथ खाने का भी गले तक आता है।
  • अत्यधिक डकार आना और मुँह का स्वाद कड़वा होना।
  • पेट फूलना।
  • मिचलाहट होना एवं उल्टी आना।
  • गले में घरघराहट होना।
  • साँस लेते समय दुर्गन्ध आना।
  • सिर और पेट में दर्द होना।
  • बैचेनी होना और हिचकी आना।

एसिडिटी से बचने के उपाय

आम तौर पर असंतुलित भोजन और जीवनशैली के कारण एसिडिटी की समस्या होती है। इसके लिए अपने जीवनशैली और आहार में कुछ बदलाव लाने पर एसिडिटी की समस्या को कुछ हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है।

  • टमाटर भले ही खट्टा होता है लेकिन इससे शरीर में क्षारीयता की मात्रा बढ़ती है और इसके नियमित सेवन से एसिडिटी की शिकायत नहीं होती।
  • खाने के बाद नियमित रूप से एक कप अनानास के रस का सेवन करें।
  • तैलीय एवं मिर्च-मसालेदार भोजन से दूर रहें, जितना हो सके सादा एवं कम मसाले वाला भोजन करें।
  • पेट भर भोजन के बाद तुरन्त न सोए। सोने से लगभग दो घंटे पहले ही भोजन कर लें।
  • भोजन करने के बाद टहलने की आदत डालें।
  • सुबह उठकर नियमित रूप से 2-3 गिलास ठंडा पानी पिए तथा उसके बाद लगभग एक घंटे तक कुछ न खाए।
  • जंकफूड, प्रिजरवेटिव युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन बिल्कुल न करें।
  • चाय और कॉफी का सेवन कम से कम करें।
  • एक ही बार में बहुत सारा खाना खाने की बजाय कम मात्रा में 2-3 बार खाए।
  • अनार और आँवला को छोड़कर अन्य खट्टे फलों से परहेज करना चाहिए।
  • नाश्ते में पपीते के फल का सेवन करें।
  • योग एवं प्राणायाम करें।

एसिडिटी से राहत पाने के लिए उपयोगी घरेलू उपाय

आम तौर पर एसिडिटी से राहत पाने के लिए लोग पहले घरेलू नुस्खों पर ही विश्वास करते हैं। एसिडिटी दूर करने में सहायता करने वाले घरेलू उपाय-

ठंडा दूध, एसिडिटी कम करने में सहायकः एसिडिटी होने पर ठंडे दूध में एक मिश्री मिलाकर पीने से तुरंत राहत मिलती है।

जीरा और अजवाइन का मिश्रण एसिडिटी में कारगरः एक चम्मच जीरे और अजवायन को भूनकर पानी में उबाल लें और इसे ठण्डा कर के चीनी मिलाकर पिएं, एसीडिटी से आरम मिलता है।

सौंफ एसिडिटी में लाभकारीः खाना खाने के बाद सौंफ चबाने से एसिडिटी से राहत मिलती है।

एसिडिटी से लड़ने में सहायक है दालचीनीः दालचीनी एक नैचुरल एंटी एसिड के रूप में काम करता है और हाजमे शक्ति को बढ़ाकर अतिरिक्त एसिड बनने से रोकता है।

गुड़ का सेवन पेट की एसिडिटी को करता है कमः भोजन के बाद या दिन में कभी भी गुड़ का सेवन करें। गुड़ पाचन क्रिया को सुधार कर पाचन तंत्र को अधिक क्षारीय बनाता है और पेट की अम्लता को कम करता है।

केला एसिडिटी के लक्षणों से प्रदान करें राहतः एसिडिटी की समस्या होने पर रोज एक केला खाने पर आराम मिलता है।

नारियल पानी एसिडिटी से लड़ने में करे मददः एसिडिटी होने पर नारियल पानी का सेवन करें ऐसीडिटी से लाभ मिलता है।

एसिडिटी का करे उपचार तुलसीः पानी में 5-7 तुलसी की पत्तियों को उबाल लें। अब इसे ठंडा कर के इसमें थोड़ी चीनी मिलाकर सेवन करें।

गुलकंद एसिडिटी से आराम दिलाने में सहायकः गुलकन्द का सेवन करें, यह हाइपर एसिडिटी में बहुत लाभदायक होता है।

मिश्रण जो एसिडिटी से प्रदान करे राहतः सौंफ, आँवला और गुलाब के फूलों का चूर्ण बनाकर सुबह-शाम आधा-आधा चम्मच लेने से एसिडिटी में आराम मिलता है।

एसिडिटी के लिए फायदेमंद जायफल और सोंठ का मिश्रणः जायफल तथा सोंठ को मिलाकर चूर्ण बना लें और इसे एक-एक चुटकी लेने से एसिडिटी समाप्त हो जाती है।

गिलोय एसिडिटी कम करने में लाभदायकः एसिडिटी कम करने में गिलोय बेहद फायदेमंद औषधि है। पाँच से सात गिलोय की जड़ के टुकड़े लेकर पानी में उबाल लें तथा इसे गुनगुना कर के पिएं।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।