हर्पीस की रोकथाम के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार और परहेज      Publish Date : 06/08/2026

हर्पीस की रोकथाम के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार और परहेज

                                                                                                     डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

हर्पीस लंबे समय तक रहने वाली बीमारी है। यह हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है। यह वायरस बाहरी जननांग, गुदा के क्षेत्र और शरीर के अन्य भागों की त्वचा को प्रभावित करता है। हर्पीस में जननांगो और शरीर के अन्य भागों में खुजली वाले दर्दनाक फफोले, दाद या घाव हो जाते हैं, जो कभी आते हैं तो कभी चले जाते हैं। अच्छी बात यह है कि आप आयुर्वेदिक तरीके से आप हर्पीस का घरेलू उपचार को भी अपना सकते हैं। आयुर्वेदिक में प्रकार के कई उपाय बताए गए हैं जिनके द्वारा आप हर्पीस का उपचार कर सकते हैं। इसी के सन्दर्भ में आपकी जानकारी के लिए हमारे प्रस्तुत लेख में हर्पीस के लिए कुछ प्रभावी उपाय आपको बताए जा रहे हैं।

हर्पीस क्या है?

इस बीमारी में मुंह या जननांगों पर फफोला (घाव) बन जाता है। इस दासैरान आपको मूत्र त्याग करते समय दर्द होता है, खुजली होती है, बुखार भी होता है। सिर दर्द एवं थकान की शिकायत बनी रहती है साथ ही इस दौरान आपको भूख और प्यास कम लगती है। हर्पीस बीमारी में निकलने वाले छाले महिलाओं की बच्चेदानी एवं पुरुषों के मूत्र-मार्ग को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं।

हर्पीस दो प्रकार का होता है।  

एचएसवी -1 (HSV–1)

हर्पीस के इस प्रकार में मुंह और होंठ के आसपास घाव बन जाता है। हर्पीस टाइप-1 त्वचा पर मौखिक स्राव या घाव के माध्यम से फैलता है। यह टूथब्रश, खाने के बर्तन आदि वस्तुओं के माध्यम से फैल सकता है।

एचएसवी-2 (HSV–2)

ठस प्रकार के हर्पीस में संक्रमित व्यक्ति के जननांगों या मलाशय के आसपास घाव या दाद आदि की समस्या हो जाती है। वैसे तो यह अन्य स्थानों पर भी होता है, लेकिन अधिकांशतः कमर के नीचे ही पाया जाता है। हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस से ग्रसित गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से मिलकर परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि यह रोग बीमारी मां से बच्चों को भी हो सकती है।

हर्पीस के लक्षण

हर्पीस होने पर ये अपको अपने अंदर कुछ इस प्रकार के लक्षण दिखाई पड़ते हैं:-

  • इसकी वजह से रोगी को त्वचा में जलन और खुजली होती है।
  • इस इंफेक्शन के कारण लसिका ग्रन्थि में सूजन आ जाती है।
  • कई बार इस इन्फेक्शन के कारण बुखार भी हो जाता है।
  • चेहरे पर पानी से भरे लाल दाने होते हैं।
  • जोड़ों में दर्द होना शुरू हो जाता है।
  • बालों का झड़ना सकते हैं।
  • षड्रस में से किसी एक भी रस का स्वाद ना आना।
  • कम सुनाई देना।
  • आंखों की रोशनी कम होना।

हर्पीस के कारण 

हर्पीस सिम्प्लेक्स

यदि यह हर्पीस वायरस संक्रमित व्यक्ति की त्वचा पर मौजूद है, तो इससे दूसरे व्यक्ति की त्वचा आसानी से रोग ग्रस्त हो जाती है। यह वायरस त्वचा के अन्य क्षेत्रों जैसे आंखों के माध्यम से भी अन्य व्यक्तियों में फैल सकता है। ध्यान रखें कि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के छूने से नहीं होता है। संक्रमण निम्नलिखित कारणों से होता हैः-

  • संक्रमित व्यक्ति के साथ जननांगों के संपर्क में आने से।
  • मुंह के छालों से ग्रस्त व्यक्ति के साथ मौखिक सेक्स करने से।
  • बिना कंडोम के सेक्स करना।
  • एक से ज्यादा लोगों के साथ यौन सम्बन्ध बनाना।
  • छोटी उम्र में सेक्स करना।
  • अन्य यौन संचारित संक्रमण हेने से।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से।
  • महिलाओं को हर्पीस होने की सम्भावना अधिक होती है।

हर्पीस जॉस्टर वायरस

  • हर्पीस जॉस्टर वायरस के कारण चिकनपॉक्स भी होते हैं।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना।
  • स्वच्छता का ध्यान न रखना।
  • वायरल इन्फेक्शन।

हर्पीस का उपचार के लिए कुछ उपायः

हर्पीस के उपचार के लिए एंटी-वायरल दवाईयों का उपयोग करना उचित रहता है, क्योंकि इससे यह वायरस नष्ट हो जाता है। हर्पीज के दानों पर लगाने के लिए मलहम आदि का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक घरेलू उपायों से भी हर्पीस को ठीक किया जा सकता है। हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा आपको बता रहा हैं ऐसे ही कुछ घरेलू उपचारों के बारे में-

शहद से हर्पीस का करें उपचारः

यदि आप नियमित रूप से शहद को हर्पीज़ से प्रभावित जगह पर लगाते हैं तो इस बीमारी से आराम मिलता है और इसके चलते होने वाली जलन से भी शांति मिलती है।

बेकिंग सोडा से हर्पीस का उपचारः

हर्पीस में बैकिंग का प्रयोग करने के लिए आप सबसे पहले बेकिंग सोडा को पानी में मिला लें। इसमें रुई डुबोकर हर्पीस वाली जगह पर लगाएं इस प्रकार से यह उपाय आपको हर्पीस में काफी लाभ देता है।

हर्पीस का उपचार चंदन से

चंदन को गुलाब जल में घिसकर हर्पीस वाले घाव पर लगाने से लाभ मिलता है। बेहतर परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परमार्श लें।

एलोवेरा जेल से हर्पीस का घरेलू इलाजः

एलोवेरा कई तरह के रोगों को ठीक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। एलोवेरा जेल को हर्पीस से प्रभावित जगह पर लगाएं। इससे लाभ मिलता है और जलन शांत होती है।

हर्पीस के घरेलू उपचार के लिए मुलेठी का प्रयोगः

मुलेठी की जड़ से बना चूर्ण हर्पीस के उपचार में काफी लाभकारी होता है। इसे बनाने के तरीकों के बारे में किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से जानकारी लेनी चाहिए।

पेट्रोलियम जेली से हर्पीस का उपचारः

हर्पीस से प्रभावित क्षेत्र में पेट्रोलियम जेली का उपयोग करें। यह हर्पीज़ का उपचार करने का एक असरदार तरीका है।

हर्पीस का घरेलू उपचार जैतून के तेल सेः

जैतून के तेल में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं। इस तेल का उपयोग हर्पीस से ग्रसित हिस्सों पर करें। ऐसा करने से यह रोग धीरे-धीरे ठीक हो जाता है।

हर्पीस का आयुर्वेदिक इलाज टी ट्री आयलः

टी ट्री आयल का उपयोग हर्पीस से होने वाले इन्फेकशन को खत्म कर देता है। आप इस उपाय से हर्पीस में लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

हर्पीस के लिए बरती जाने वाली सावधानियाँ

  • घाव को बार-बार धोने से बचें और इसे सूखा रखने की कोशिश करें।
  • घाव पर लोशन या कोई क्रीम लगाते रहें।
  • बर्फ को किसी कपड़े में डालकर हर्पीस से प्रभावित जगह पर लगाएं। इससे हर्पीस तेजी से ठीक होता है। ध्यान रखें कि बर्फ का सीधे त्वचा पर प्रयोग ना करें।
  • हल्के नमकीन पानी में स्नान करने से लक्षणों को दूर करने में मदद मिलती है।
  • नहाने के पानी में फिटकरी डाल लें। इस पानी को बाथ टब में डाल लें, और रोज इसमें 15 मिनट तक लेटे रहें, इससे शीघ्र लाभ मिलता है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।