
फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने वाली ये आयुर्वेदिक औषधियाँ Publish Date : 31/07/2026
फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने वाली ये आयुर्वेदिक औषधियाँ
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
आजकल की भागदौड़ से भरी अपनी व्यस्त जीवनशैली में हम फेफड़ों की सेहत का ख्याल रखना ही भूल जाते हैं जबकि फेफड़ों में होने वाला किसी भी तरह का संक्रमण आपको लंबे समय तक बीमार बना सकता है। सर्दियों का मौसम आते ही वातावरण में प्रदूषण बढ़ने से फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं जैसे कि अस्थमा, खांसी आदि होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि आप फेफड़ों की सेहत का खयाल रखें और फेफड़ों को मजबूत बनाए रखें।
आयुर्वेद में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिनके नियमित उपयोग से आप फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत बनाए रख सकते हैं। आज के अपने इस लेख में हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा आपको ऐसे ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।
फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए कारगर आयुर्वेदिक दवाएं

कई ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जो फेफड़ों को स्वस्थ रखने में सहायक हैं लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि इन आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ आपको अपनी जीवनशैली में भी कई जरूरी बदलाव लाने होंगे। उदाहरण के तौर पर सिगरेट का सेवन बिल्कुल ना करें और अधिक प्रदूषण वाली जगहों पर जाने से भी बचें।
1- च्यवनप्राश
च्यवनप्राश का उपयोग सदियों से हमारे यहाँ होता रहा है और यह रसायन लोगों को निरोग रखने में यह बहुत करगर है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के अनुसार, च्यवनप्राश में मौजूद अमृत बॉल, गुड़ूची, और अन्य जड़ी-बूटियां इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं, जिससे हमारे फेफड़े भी अच्छी तरह से काम करते है और खाँसी और अस्थमा जैसे रोगों से बचाव होता है।
कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि च्यवनप्राश को कैसे और कब खाना चाहिए. आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के अनुसार, च्यवनप्राश का सेवन सुबह और रात में सोने से पहले करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है और इसे खाने के तुरंत बाद गर्म दूध पिएं। च्यवनप्राश खाने के बाद अगले आधे घंटे तक पानी ना पिएं।
2- त्रिकटु चूर्ण
हममें से कई लोग फेफड़ों में कफ जमा होने की समस्या से परेशान रहते हैं। कम जमा होने से सांस लेने में कठिनाई और सीने में भारीपन जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। त्रिकटु चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसे पिप्पली, काली मिर्च और सोंठ को समान मात्रा में मिलाकर बनाया जाता है। इसका सेवन करने से फेफड़ों में जमा कफ दूर होता है और सर्दी-जुकाम के लक्षण कम होते हैं।
त्रिकटु के सेवन का तरीका
त्रिकटु चूर्ण को शहद या गर्म पानी के साथ मिलाकर ले सकते हैं। आमतौर पर, 1-3 ग्राम त्रिकटु चूर्ण दिन में एक से दो बार ले सकते हैं। आजकल बाजार में त्रिकटु की टैबलेट या सिरप भी आसानी से उपलब्ध है जिसका उपयोग चिकित्सक से सलाह लेकर कर सकते हैं।
3- शहद
शहद का उपयोग खांसी और अस्थमा से जुड़ी कई आयुर्वेदिक औषधियों में प्रमुखता से किया जाता है। शहद भी फेफड़ों में कफ को जमने से रोकने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं, गले की सूजन कम होती है और सांस फूलने जैसे लक्षण कम होते हैं।
शहद का सेवन कैसे करें
- फेफड़ों को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए आप निम्न तरीकों से शहद का उपयोग कर सकते हैं।
- एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाएं और इसे धीरे-धीरे पिएं।
- अगर छोटे बच्चे सीधे शहद नहीं खा रहें हैं तो उन्हें एक चम्मच शहद ब्रेड या रोटी में लगाकर खिलाएं।
- खांसी से जल्दी राहत के लिए थोड़े से गुड़ में आधा चम्मच शहद मिलाकर खाएं।
4- सितोपलादि चूर्ण
सितोपलादि चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग सांस और खांसी से जुड़ी समस्याओं के इलाज में किया जाता है। इस चूर्ण के सभी घटक आयुर्वेदिक और प्राकृतिक है। यह चूर्ण फेफड़ों को मजबूत बनाकर अस्थमा के लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
सितोपलादि चूर्ण के सेवन की विधि
सितोपलादि चूर्ण को कभी भी सीधे तौर पर ना लें अन्यथा यह आपके गले में अटक सकता है। इसे हमेशा पहले एक चम्मच शहद में अच्छे से मिला लें और उसके बाद सेवन करें। आमतौर पर, 1 से 3 ग्राम सितोपलादि चूर्ण दिन में एक से दो बार ले सकते हैं। अगर आप गंभीर रूप से खांसी से पीड़ित हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार इसका सेवन करें।
5- तुलसी का काढ़ा
तुलसी का पौधा अधिकांश लोग अपने घरों में लगाकर इसकी पूजा करते हैं। तुलसी की पत्तियां फेफड़ों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके सेवन से अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों के लक्षण कम होते हैं और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए तुलसी का काढ़ा बनाकर पिएं।
तुलसी का काढ़ा बनाने की विधि
- तुलसी का काढ़ा आप आसानी से घर पर बना सकते हैं।
तुलसी का काढ़ा बनाने के लिए सामग्रीः
- तुलसी के पत्ते - 10-12
- अदरक (बारीक कटा हुआ) - 1 छोटा चम्मच
- मुलेठी पाउडर - 1/2 छोटा चम्मच
- शहद - 1 बड़ा चम्मच
- पानी - 2 कप
काढ़ा बनाने की विधिः
सबसे पहले पानी को उबालें और इसमें तुलसी के पत्ते, अदरक और मुलेठी पाउडर डालें। इसे 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर उबलने दें। जब यह हल्का ठंडा हो जाए तो इसमें शहद मिलाएं। दिन में एक से दो बार इसे पिएं।
इसके अलावा कुछ ऐसे योग और प्राणायाम भी हैं जिन्हें करने से फेफड़े मजबूत होते हैं और संक्रमण से दूर रहते हैं।
ऊपर बताए गई सभी आयुर्वेदिक औषधियां और योग-प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने में कारगर हैं और इनका उपयोग कर राहत प्राप्त कर सकते हैं।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
