
बदलते मौसम में एलर्जी से बचाकर रहें Publish Date : 18/07/2026
बदलते मौसम में एलर्जी से बचाकर रहें
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
बरसात के इस मौसम में जहां एक और बूंदाबांदी हो रही है तो वहीं सुहानी सुबह और तेज धूप वाली दोपहर और गर्मी का समय भी लोगों को परेशान भी कर रहा है। इस मौसम की सबसे बड़ी परेशानी है कि इस समय में आमतौर पर काफी लोगों को एलर्जी की समस्या हो जाती है। यह मौसम फूलों की खुशबू और रंगीन नजारों से भरा होता है, मगर परागण व फफूंद हवा में फैले हैं और लाखों लोगों को एलर्जी की चपेट में ले रहे हैं। शीख, नाक, बहना, आँखों में खुजली और सांस की समस्या आम हो रही है। इस स्थिति में, दवाएं राहत तो देती हैं, पर सही आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस मौसम में अपने खानपान पर भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।
एलर्जी के क्या हैं लक्षण

खुजली होना, पसीन आने पर खुजली का बढ़ जाना, शरीर पर लाल चकत्ते हो जाना और असहनीय खुजली होना आदि एलर्जी के लक्षण होते हैं।इस समस्या से पार पाने का सबसे आसान और प्रभावी उपाय है कि पर्याप्त पानी पीते रहें। दिन में 8 से 10 ग्लास पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है, जिससे नाक और गले की झिल्लियां नम रहती हैं और पराकण आसानी से बाहर निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर, हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है, जो एलर्जी के मुख्य रसायन है। गुनगुना पानी, अदरक, तुलसी या हल्दी वाली चाय और भी बेहतर काम करती है। अदरक का जिंजराइल तत्व सूजन कम करता है, जबकि हल्दी और तुलसी एंटी इम्प्लीमेंट्री गुणों से भरपूर होती है। इनका सेवन किया जा सकता है।
पानी और शरीर को हाइड्रेट बनाए रखें
सबसे आसान और प्रभावी उपाय है कि पर्याप्त पानी पीते रहें। दिन में 8 से 10 ग्लास पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है, जिससे नाक और गले की झिल्लियां नम रहती हैं और पराकण आसानी से बाहर निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर, हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है, जो एलर्जी के मुख्य रसायन है। गुनगुना पानी, अदरक, तुलसी या हल्दी वाली चाय और भी बेहतर काम करती है। अदरक का जिंजराइल तत्व सूजन कम करता है, जबकि हल्दी और तुलसी एंटी इम्प्लीमेंट्री गुणों से भरपूर होती है। इनका सेवन किया जा सकता है।
प्राकृतिक एंटी हिस्टामिन
विटामिन सी हिस्टामिन को तोड़ने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत कर एलर्जी के लक्षणों को कम करने में मददगार है। आंवला विटामिन सी का सबसे शक्तिशाली स्रोत है। एक आंवले में संतरे से तीस गुना ज्यादा विटामिन सी होता है। इसके लिए इसके अतिरिक्त नींबू कीवी, शिमला मिर्च, टमाटर और ब्रोकली को आहार में शामिल किया जा सकता है।
ओमेगा-3 और प्रोबायोटिक्स
शोध बताते हैं कि बचपन से ओमेगा-थ्री लेने वाले बच्चों में एलर्जी और अस्थमा का जोखिम कम होता है। सरकारी स्रोतों में अखरोट, अर्शी के बीज और सरसों का तेल प्रमुख है। वहीं रोबार्टिक्स आंत को स्वस्थ रखते हैं जहां इम्यून सिस्टम का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है, दही छाज जैसे फॉर्मेटेड फ्रूट्स भी इसमें शामिल होते हैं।
शहद का सेवन होता है मददगार
स्थानीय शहद में आस-पास के पौधों के सूक्ष्म परागकण होते हैं। ऐसे में रोज थोड़ी मात्रा में शहद लेने से शरीर धीरे-धीरे इन पराक्रमों के प्रति अभ्यस्त हो जाता है। इमदलाजी में इसे डी सेस्टाइजेशन कहा जाता है, जो एलर्जी इमोथैरिटी के समान सिद्धांत पर आधारित है, मगर एक वर्ष कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।
कैसे हो बचाव एलर्जी से
एलर्जी के दौरान कुछ खाद्य पदार्थ लक्षणों को बढ़ाते हैं, जैसे शराब और रेड पाइन, वहीं बहुत मसालेदार और पैकेज्ड प्रोसेस्ड भोजन शरीर में सूजन बढ़ाते हैं। ज्यादा चाय काफी लेने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। ठंडे पेयसक्रीम तथा उच्च कच्चे फल सब्जियाँ भी एलर्जी के लक्षणों को उभार सकती हैं। इसलिए लक्षणों के गंभीर होने से पहले ही हमारे आयुर्वेदाचार्य डॉ0 सुशील शर्मा ने बताया कि समय पर डॉक्टर से सलाह लें और इस मौसम में होने वाली एलर्जी से अपने को सुरक्षित बनाए रखें।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
