अत्याधिक मसालेदार खाने से बचें और रहें हाइड्रेट      Publish Date : 13/07/2026

अत्याधिक मसालेदार खाने से बचें और रहें हाइड्रेट

                                                                                               डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बीच स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण इन दिनों डिहाइड्रेशन, थकान और पाचन संबंधी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। ऐसे में शहर की डाइटिशियन डॉ. गुंजन ने आम जनमानस को स्वस्थ रहने के लिए खान-पान की आदतों में बदलाव करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि इस मौसम में सही आहार ही शरीर को ठंडक और ऊर्जा प्रदान कर सकता है।

डॉ0 शर्मा के अनुसार गर्मियों में शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) सबसे बड़ीचुनौती है। इससे बचने के लिए दिनभर में थोड़ी-थोड़ी देर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा शक्कर वाले सोडा के बजाय नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों के जूस को प्राथमिकता दें। तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी जैसे फल अपनी डाइट में शामिल करें। इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं।

भारी और ऑयली खाने से बचें

                                     

मसालेदार, तला-भुना और अत्यधिक ऑयली खाना शरीर में आंतरिक गर्मी को बढ़ा देता है। इससे एसिडिटी, अपच और सीने में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्मियों में बाहर के खाने से परहेज करना ही सुरक्षित है। बताया कि चाय और कॉफी (कैफीन) का अधिक सेवन शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा देता है। इसी तरह डिब्बाबंद कोल्ड ड्रिंक्स शरीर कोतात्कालिक राहत तो देते हैं, लेकिन लंबे समय में यह सेहत के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं। इनके स्थान पर घर में बने सत्तू का शरबत या बेल का जूस लेना ज्यादा फायदेमंद है।

विशेष टिप्स

  • धूप में निकलने से पहले एक गिलास पानी या शरबत पीकर निकलें।
  • कैफीन और शराब का सेवन पूरी तरह सीमित करें।
  • प्राकृतिक और घर पर बने पेय पदार्थों को ही अपनाएं।

हल्का भोजन और बेहतर पाचन: गर्मी के दिनों में पाचन तंत्र थोड़ा धीमा हो जाता है ऐसे में हल्का आहार दाल, हरी सब्जियां और सलाद को प्राथमिकता दें। भोजन में दही या रायता जरूर शामिल करें, जो पाचन को बेहतर रखने के साथ शरीर को ठंडा भी रखता है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।