हॉर्मोनल असंतुलन के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार      Publish Date : 12/07/2026

हॉर्मोनल असंतुलन के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार

                                                                                                डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

हॉर्मोन हमारे शरीर में बनने वाले एक तरह के केमिकल है जो रक्त के माध्यम से शरीर के अंगो और ऊतकों तक पहुँचते है। यह शरीर में एंडोक्राइन ग्रंथियों से स्रावित होते हैं तथा शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं को प्रभावित करते हैं, जैसे शरीर का विकास, मेटाबॉलिज्म (Metabolism) यौन गतिविधियाँ, प्रजनन और मूड स्विंग्स आदि क्रियाओं में हॉर्मोन की मुख्य भूमिका होती है। हॉर्मोन की सूक्ष्म मात्रा भी अधिक प्रभावशाली होती है, इन्हें शरीर में अधिक समय तक संचित नहीं रखा जा सकता है।

हॉर्मोनल असंतुलन क्या होता है?

                             

हॉर्मोन्स का संतुलित रहना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होता है क्योंकि यह बहुत थोड़ी मात्रा में शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करते हैं। जब यह अपनी निर्धारित मात्रा में रक्त में पहुंचते हैं तो यह शरीर की वृद्धि एवं विकास को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। जब यह अंतस्रावी ग्रंथियों द्वारा अपनी निर्धारित मात्रा में रक्त में पहुँचते हैं तो यह संतुलित कहलाते है और यह शरीर के वृद्धि एवं विकास में मदद करते हैं। यह शरीर की चयापचय क्रिया (Metabolism) को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। हॉर्मोन्स के संतुलित होने से प्रजनन क्रिया भली-भाँति चलती है तथा व्यक्ति का मूड, व्यवहार, आदि सकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं। यह शरीर में होने वाली गतिविधियों एवं विकास को नियंत्रित करते हैं, जैसे शारीरिक अंगों की वृद्धि एवं विकास, प्रजनन आदि को नियमित तरीके से होने और नियंत्रण करने जैसे सारे काम हॉर्मोन की वजह से होते हैं। हॉर्मोन असंतुलित होने पर शरीर पर कई तरह से असर डालते हैं, इसके बारे में विस्तृत जानकारी होना भी ज़रूरी होता है।

ग्रोथ हॉर्मोन

इस हॉर्मोन का निर्माण पीयुष ग्रंथि (Pitutary Gland) द्वारा होता है जो हमारे मस्तिष्क पर स्थित होती है। यह मांसपेशियों को बढ़ाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, शरीर में कोशिकाओं के पुननिर्माण और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है साथ ही सामान्य शारीरिक संरचना और चयापचय को बनाए रखने में इस हॉर्मोन का सबसे ज्यादा योगदान होता है।

थाइरॉक्सिन

थाइरॉक्सिन (Thyroxine) हॉर्मोन का स्राव थॉयरायड (Thyroid) ग्रंथियों द्वारा किया जाता है। यह एक अंतस्रावी ग्रंथि है जो गर्दन में श्वास नली के ऊपर होती है। यह हॉर्मोन हड्डियों और मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन्सुलिन

इस हॉर्मोन का स्राव अग्न्याशय (Pancreas) द्वारा किया जाता है जो हमारे पेट में स्थित होता है। यह ग्रंथि कार्बोहाइड्रेट्स को ब्लड शुगर में परिवर्तित करती है और इंसुलिन (Insulin) इस रक्त शर्करा (Blood Sugar) को ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है। इससे शरीर में शुगर का स्तर नियंत्रण में रहता है।

कॉर्टिसोल

यह एक स्ट्रेस हॉर्मोन (Stress Hormone) है जिसका निर्माण एचिनल (Achenal) हमें स्वस्थ और ऊर्जावान रखने में मदद करता है, इसकी मुख्य भूमिका स्ट्रेस को कंट्रोल करना है। तनावपूर्ण स्थिति से सामना करने के लिए हमारा शरीर कॉर्टिसोल (Cortisol) हमें स्वस्थ और ऊर्जावान रखने में मदद करता है, इसकी मुख्य भूमिका स्ट्रेस को कंट्रोल करना है। तनावपूर्ण स्थिति से सामना करने के लिए हमारा शरीर कॉर्टिसोल (Cortisol) का स्राव करता है।

एस्ट्रोजेन

महिलाओं में प्रजनन, मासिक धर्म, यौन विकास एवं मेनोपोज के लिए महत्वपूर्ण हॉर्मोन है।

टेस्टास्टरोन

यह एक पुरूष सेक्स हॉर्मोन है। यह शरीर की मांसपेशियों के निर्माण में मदद करता है और पुरुष प्रजनन टिशु के विकास और यौन शक्ति को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि पुरूषों में इस हॉर्मोन का उत्पादन अपर्याप्त मात्रा में होता है तो इसके कारण कमजोरी, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन आदि देखने को मिलते है।

हॉर्मोन असंतुलन क्यों होता है?

हॉर्मोन अंसतुलन होने के बहुत सारे कारण होते हैं। इन सब में बड़ा कारण असंतुलित जीवनशैली होती है। जैसे-

  • एक अनियमित जीवनशैली इसका सबसे बड़ा कारण है।
  • प्राकृतिक आहार न लेकर उसकी जगह जंक फूड, डिब्बाबंद या प्रिजरवेटिव युक्त आहार का सेवन अधिक करना।
  • अपर्याप्त नींद।
  • अत्यधिक तनाव में रहना।
  • समय से भोजन न करना।
  • व्यायाम एवं खेल-कूल जैसी शारीरिक गतिविधियों से दूर रहना।

हॉर्मोनल असंतुलन से बचाव

                             

जैसा कि हमने पहले की चर्चा की है कि हॉर्मोनल असंतुलन का मूल कारण असंतुलित जीवनशैली होता है इसलिए सबसे इसको नियंत्रित करना ज़रूरी होता है।

  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें एवं समय पर भोजन करने की आदत डालें।
  • पर्याप्त भोजन के अतिरिक्त ताजा फलों का भी सेवन जरुर करें।
  • पर्याप्त नींद लें, एक व्यस्क व्यक्ति को लगभग 6-7 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए।
  • अपनी दिनचर्या में व्यायाम एवं प्राणायाम को भी जगह दें। रोज सुबह उठकर व्यायाम करें और तनाव से बचने के लिए ध्यान और प्राणायाम करें।
  • अधिक से अधिक खुश रहने की कोशिश करें क्योंकि तनाव के कारण हॉर्मोन्स में असंतुलन आता है।

हॉर्मोनल अंसतुलन के लिए घरेलू उपचार

वैसे तो हॉर्मोन को संतुलित करने के लिए सबसे पहले घरेलू नुस्ख़ों को ही अपनाया जाता है। यहां हम डॉ0 सुशील शर्मा के द्वारा बताए गए कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में बात करेंगे जिनके सेवन से हॉर्मोन को संतुलित किया जा सकता है:-

नारियल तेल हॉर्मोन को संतुलित करने में मदद करता है

अपने आहार में नारियल का तेल शामिल करें। यह हॉर्मोन्स को संतुलित रखने में मदद करता है और साथ ही यह वजन को भी नियंत्रित करता है।

ग्रीन टी हॉर्मोन को संतुलित करने में करे सहायता

ग्रीन टी का सेवन आवश्यक रूप से करें। यह हमारे चयापचय के प्रक्रिया को बेहतर बनाती है और हॉर्मोन्स के संतुलन में मदद करती है।

हॉर्मोन को संतुलित करने में ओट्स का योगदान

ओट्स न केवल पोषक तत्वों से भरपूर है बल्कि यह ब्लड शुगर को भी नियंत्रित रखता है और हॉर्मोन्स को संतुलित बनाए रखता है इसलिए ओट्स को आहार के रूप में इसका सेवन करें।

दालचीनी हॉर्मोन को संतुलित करने में लाभकारी

दालचीनी पाउडर को अपनी चाय या आहार में शामिल करें। यह हॉर्मोन्स को संतुलित रखने में सहायक है और इंसुलिन को भी काफी हद तक संतुलित रखता है।

जैतून के तेल का सेवन हॉर्मोन को संतुलित करने में सहायक

रिफाइण्ड तेल की जगह अपने भोजन में जैतून के तेल का इस्तेमाल करने से असंतुलित हॉर्मोन को नियंत्रित करने में काफी मदद मिलती है।

दही का सेवन से होते हैं हॉर्मोन को संतुलित 

प्रतिदिन एक कप दही का सेवन करें। यह शरीर में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखते हैं।

हॉर्मोन को संतुलित करने में गाजर के लाभ

गाजर का सेवन करना अच्छा होता है। गाजर में एक अलग तरह का फाइबर होता है जो अतिरिक्त एस्ट्रोजेन को शरीर से बाहर निकाल कर डिकॉक्सटिफिकेशन में मदद करता है। माहवारी से पहले होने वाली समस्याओं से परेशान महिलाओं को गाजर का सेवन करना चाहिए।

डार्क चॉकलेट हॉर्मोन को संतुलित करने में हितकारी

डार्क चॉकलेट मूड ठीक करके अवसाद को खत्म करने में सहायक होती है। यह एंड्रोफीन हॉर्मोन के स्तर को बढ़ाती है और इसमें मौजूद कईं अन्य तत्व व्यक्ति को खुश रहने का एहसास दिलाते हैं।

हॉर्मोन को संतुलित करने में अलसी के बीज

अलसी के बीज (Flax Seeds), कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds) और सूरजमुखी के बीज (Sunflower Seeds) में अच्छी मात्रा में ओमेगा-3 Fatty Acids होते हैं। ओमेगा-3 Fatty Acids वह हॉर्मोन बनाते हैं जो कि महिलाओं के लिए उपयोगी है और मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति के लक्षणों (Menstrul Cramps and Menopausal Symptoms) से राहत दिलाने में मदद करता है। इसलिए प्रतिदिन इनका सेवन करें।

अश्वगंधा हॉर्मोन को संतुलित करने में करे मदद

प्रतिदिन 2-3 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण का सेवन करें। यह हॉर्मोनल असंतुलन से होने वाले सभी लक्षणों को ठीक करता है। जैसे- नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, अवसाद, अधिक पसीना आना, हॉट फ्लैशेज़, प्रजनन क्षमता में कमी आदि।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।