
स्वस्थ मेरुदंड के लिए कोणासन Publish Date : 30/06/2026
स्वस्थ मेरुदंड के लिए कोणासन
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
नियमित योगाभ्यास से हमारे अन्दर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। कोणासन मेरुदंड को लचीला बनाने के लिए अत्यंत लाभकारी होता हैं। इससे कंधे मजबूत बनते हैं और पसलियों में लचीलापन आता है। इसके नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और दिल स्वस्थ रहता है। इस योगाभ्यास से कमर के पार्श्व भाग में जमा वसा को कम करने में मदद मिलती है।
कोणासन करने के लिए सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच दो से ढाई फीट की दूरी रखें। दोनों हाथ जांघों को स्पर्श करते रहें। दायां हाथ धीरे-धीरे बगल से ऊपर उठाएं, हथेली को आकाश की और करते हुए हाथ को सिर के ऊपर सीधा तान लें। अब कमर को बाईं ओर झुकाएं और बाएं हाथ की उंगलियों से बाएं पैर के पंजे को छूने का प्रयास करें। दार्या कनपटी से लगा हुआ रहे। इस स्थिति में कम से कम 1 मिनट तक रहें। धीरे-धीरे समस्थिति में लौटें।

अब यही प्रक्रिया दूसरी ओर (दाई ओर) से करें। कोणासन करने के लिए कुछ सावधानियां जरूर बरतें। शरीर का केवल ऊपरी भाग ही झुकाएं। कोहनियों और घुटनों को सीधा रखें। दोनों पैरों के पंजे सीधे रखें। दायें या वायें झुकते समय आगे या पीछे न झुकें, केवल पार्श्व दिशा में झुकें। झुकते श्समय कमर से नहीं, बगल से झुकें। गर्दन को तनाव न दें, उसे सामान्य स्थिति में रखें। दोनों पैरों पर समान भार रखें। कूल्हों को थोड़ा संकुचित रखें। आसन के बाद आंखें बंदकर परिवर्तन को महसूस करें।
कोणासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं:-

कोणासन (एंगल पोज़) एक लाभकारी योगासन है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है, शरीर के पार्श्व (साइड) हिस्सों को स्ट्रेच करता है, और कमर दर्द, साइटिका व कब्ज में राहत देता है। यह पेट के अंगों को टोन करने और रक्त संचार बेहतर करने में भी अत्यंत सहायक है।
लचीलापन बढ़ाता है: यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन में सुधार करता है और शरीर के दोनों तरफ की मांसपेशियों को अच्छी तरह से खींचता है (पार्श्व स्ट्रेचिंग)।
पीठ और कमर दर्द में आराम: यदि आप पीठ दर्द या कटिस्नायुशूल (साइटिका) से पीड़ित हैं, तो यह आसन नसों पर दबाव कम करके काफी राहत दिलाता है।
पाचन तंत्र में सुधार: यह पेट के अंगों की मालिश करता है, कब्ज दूर करता है और पाचन प्रक्रिया को उत्तेजित करता है।
वजन नियंत्रित करता है: इसके नियमित अभ्यास से हाथों, पैरों और पेट के हिस्सों की टोनिंग होती है और कमर का अतिरिक्त फैट कम करने में मदद मिलती है।
रक्त संचार बेहतर करता है: यह मुद्रा पूरे शरीर में, विशेष रूप से श्रोणि और धड़ क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देती है।
मानसिक तनाव कम करता है: यह तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर तंत्रिका तनाव को दूर करने में मदद करता है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
