
अल्जाइमर रोग के लिए प्रमुख आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 29/06/2026
अल्जाइमर रोग के लिए प्रमुख आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
अल्जाइमर के रोग में धीरे-धीरे याद्दाश्त खोने लगती है। ये एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें स्वभाव पर भी असर पड़ता है। ये एक प्रकार का डिमेंशिया होता है जिसमें सोचने, समझने और सीखने की क्षमता में गिरावट आने लगती है। बता दें कि अल्जाइमर की बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर कईं ज्यादा असर डालती है, लेकिन अल्जाइमर के 5 आयुर्वेदिक उपचार करके इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
अल्जाइमर के आयुर्वेदिक उपचार

1) केसर - केसर में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद होते हैं। इसका सेवन करने से अल्जाइमर रोगियों की याददाश्त में बहुत सुधार हो सकता है। केसर में अवसाद से जूझ रहे लोगों को ठीक करने के भी गुण मौजूद मौजूद हैं। अवसाद भी याददाश्त भूलने की बीमारी से जुड़ा हुआ है।
2) हल्दी - हल्दी का सेवन करने से दिमाग के स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। इसमें बीटा-एमिलॉइड मौजूद होता है, जो दिमाग को साफ करके अल्जाइमर रोग को दूर करने में मदद कर सकती है।
3) अश्वगंधा - अश्वगंधा ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करने में बहुत मदद करती है। इसका सेवन करने से दिमाग को बहुत लाभ पहुंचता है। अश्वगंधा का सेवन करने से अल्जाइमर रोग के विकास और प्रगति में तेजी आ सकती है। यह दिमाग को मजबूत करता है।
4) दालचीनी - दालचीनी हर घर में पाया जाने वाला मसाला है। दालचीनी प्री-डायबिटिक लोगों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसमें प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में ब्लड सर्कुलेशन को सुधारने की ताकत होती है, जो दिमाग के काम को तेज करती है। इसमें कोलेस्ट्रॉल, फास्टिंग ग्लूकोज के लेवल को कम करने में मदद मिल सकती है।
5) थाइम - इस जड़ी-बूटी का सेवन करने से दिमाग में न्यूरॉन्स को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में बहुत मदद मिलती है। ये दिमाग में एक्टिव ओमेगा-3 डीएचए की मात्रा को बढ़ाने में मदद कर सकती है। थाइम का सेवन करने से ओमेगा-3 फैटी एसिड याददाश्त और मूड को बढ़ाने का काम करता है और दिमाग को भी तेज करता है।
अल्जाइमर रोग (Alzheimer's Disease) के लिए आयुर्वेदिक उपचार में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा, पंचकर्म थेरेपी और सात्विक आहार को सबसे प्रभावी माना जाता है। आयुर्वेद में अल्जाइमर को मुख्य रूप से 'स्मृति भ्रंश' कहा जाता है, जो शरीर में 'वात दोष' के असंतुलन और 'मज्जा धातु' (मस्तिष्क के ऊतकों) के क्षय के कारण होता है।
नीचे अल्जाइमर के लिए प्रमुख आयुर्वेदिक उपचार, जड़ी-बूटियाँ और जीवनशैली के उपाय दिए गए हैं:
मुख्य आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ (मेध्य रसायन)
आयुर्वेद में मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने वाली जड़ी-बूटियों को 'मेध्य रसायन' कहा जाता है:
ब्राह्मी (Brahmi): मस्तिष्क की कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) को पुनर्जीवित करती है। यह याददाश्त और एकाग्रता में सुधार करती है।
शंखपुष्पी (Shankhpushpi): मानसिक तनाव और चिंता को कम करती है। यह भूलने की बीमारी की गति को धीमा करती है।
अश्वगंधा (Ashwagandha): मस्तिष्क में एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। यह अल्जाइमर का कारण बनने वाले 'अमाइलॉइड प्लाक' को जमने से रोकता है।
बच (Vacha): यह मानसिक स्पष्टता बढ़ाती है और वाणी (speech) तथा तंत्रिका तंत्र में सुधार करती है।
गिलोय (Guduchi): मस्तिष्क की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और सूजन (inflammation) को कम करती है।
आयुर्वेदिक थेरेपी (पंचकर्म)
शरीर से विषाक्त पदार्थों (आमा) को बाहर निकालने और वात दोष को शांत करने के लिए ये थेरेपी बहुत फायदेमंद हैं:
शिरोधारा (Shirodhara): माथे पर गुनगुने औषधीय तेल (जैसे ब्राह्मी तेल) की पतली धार गिराई जाती है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत करती है।
नस्य (Nasya): नाक में गाय का शुद्ध घी या अणु तेल डाला जाता है। आयुर्वेद के अनुसार नाक को मस्तिष्क का द्वार माना जाता है।
अभ्यंग (Abhyanga): तिल के तेल या महानारायण तेल से पूरे शरीर की मालिश करने से बढ़ा हुआ वात शांत होता है।
आहार और जीवनशैली (Diet & Lifestyle)

- शुद्ध गाय का घी: भोजन में घी का उपयोग बढ़ाएं। यह मस्तिष्क के ऊतकों को पोषण देता है।
- भीगे हुए बादाम और अखरोट: रोजाना सुबह खाली पेट खाने से याददाश्त मजबूत होती है।
- ताजा और गर्म भोजन: बासी, जंक फूड और ठंडे भोजन से बचें क्योंकि ये वात दोष को बढ़ाते हैं।
- हल्दी का सेवन: हल्दी में 'कर्क्युमिन' होता है, जो मस्तिष्क की सूजन को कम करने में मदद करता है।
योग और प्राणायाम
- अनुलोम-विलोम: मस्तिष्क में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है।
- भ्रामरी प्राणायाम: मानसिक शांति देता है और तनाव दूर करता है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
