लिवर की समस्याओं को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय      Publish Date : 28/06/2026

लिवर की समस्याओं को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपाय

                                                                                                   डॉ9 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

वर्तमान की जीवनशैली के चलते अपने खानपान पर यथोचित ध्यान न देने के कारण आजकल लोग अक्सर पाचन से जुड़ी समस्याओं से जूझते रहते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के अनुसार, पाचन से जुड़ी विभिन्न बीमारियाँ लीवर में खराबी के चलते होती हैं। इसके अतिरक्त अत्याधिक शराब का सेवन करना और अनियमित खानपान साथ में आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली भी लीवर के लिए काफी हानिकारक है। आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियों के बारे में बताया गया है जो कि हमारे लीवर को स्वस्थ रखने में हमारी मदद करती हैं। हमारे आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ0 सुशील शर्मा ऐसी कुछ जड़ी-बूटियों और औषधियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान कर रहे हैंः- 

लीवर को स्वस्थ रखती है भुंई आंवला या भूम्यामलकीः

                                 

भूम्यामलकी एक प्रमुख आयुर्वेदिक औषधि है जो कि आसानी से घर के आस-पास आपको एक छोटे पौधे के रूप मिल जाती है। यह जड़ी-बूटी लीवर को कई तरह के संक्रमण से बचाती है और लीवर की सेहत को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। लीवर से जुड़े रोगों से पीड़ित मरीजों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार भुंई आंवला का सेवन करना चाहिए।

भुंई आंवला या भूम्यामलकी के उपयोग का तरीका

लीवर के लिए भूम्यामलकी का उपयोग आप चूर्ण, कैप्सूल या टेबलेट के रूप में कर सकते हैं। हालांकि, आजकल इसका जूस भी बाजार में मिलता है। खुराक संबंधित जानकारी के लिए चिकित्सक से परामर्श लें। 

लीवर की क्षमता को बढ़ाती है कुटकी

कुटकी एक जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग लीवर के रोगों में प्रमुख रूप से किया जाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार कुटकी लीवर की सूजन को कम करती है साथ ही लीवर की कार्य क्षमता को भी बढ़ाती है। जो लोग लीवर में सूजन की समस्या से पीड़ित हैं उन्हें चिकित्सक से सलाह लेकर कुटकी का सेवन करना चाहिए। 

कुटकी के सेवन का तरीकाः

आजकल कुटकी का कैप्सूल या चूर्ण बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है। लेकिन आपको किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही इसका सेवन करना चहिए।

लीवर के लिए बहुत फायदेमंद है आंवलाः

आंवला आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली एक जानी मानी औषधि है। यह लीवर को डिटॉक्स करने का काम करती है। आंवला में पाए जाने वाले फायटो नुट्रिएंट्स लीवर की कार्य क्षमता को बढ़ाते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, आंवले में हेप्टो प्रोटेक्टिव क्षमताएं होती हैं जो लीवर की कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं। 

आंवला के सेवन का तरीकाः

आंवले का उपयोग आप कई तरह से कर सकते हैं। सबसे आसान और कारगर तरीका है कि आप कच्चे आंवले का सेवन करें। इसके अलावा आज कल बाजार में आंवले के जूस, टेबलेट, कैप्सूल्स और कैंडी आदि भी आसानी से मिल उपलब्ध हैं। अतः आप प्रतिदिन सीमित मात्रा में इनमें से किसी भी एक चीज का सेवन कर सकते हैं।

लीवर को संक्रमण से बचाती है एलोवेराः

एलोवेरा में भरपूर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो लीवर को फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले कई तरह के नुकसान और संक्रमण से बचाते हैं। अतः प्रतिदिन सीमित मात्रा में एलोवेरा का सेवन करने से लीवर लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।

एलोवेरा के सेवन करने का तरीकाः

एलोवेरा का उपयोग सबसे ज्यादा जूस के रूप में किया जाता है। रोजाना सुबह खाली पेट दो तीन छोटी चम्मच एलोवेरा जूस में इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए।. 

लीवर की सूजन को कम करती है पुनर्नवाः

                                             

आज के समय में अधिकांश लोग लीवर में सूजन की समस्या से परेशान रहते हैं। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या का सामना कर रहे हैं पुनर्नवा आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। पुनर्नवा एक जड़ी-बूटी है जिसका इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। यह लीवर की सूजन घटाती है साथ ही लीवर से जुड़े अन्य रोगों के खतरे को भी कम करती है।

पुनर्नवा के सेवन का तरीका

पुनर्नवा चूर्ण, कैप्सूल, टेबलेट और सिरप के रूप में उपलब्ध है। अतः आप किसी भी रूप में इसका सेवन कर सकते हैं। इसे कितनी मात्रा में लेना है इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।