
गर्मी से बचाएं आंखें और त्वचा Publish Date : 16/06/2026
गर्मी से बचाएं आंखें और त्वचा
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
गर्मी के मौसम में अनेक चुनौतियों का एक साथ सामना करना पड़ता है। इन दिनों बाहर निकलते समय आंखों और त्वचा को धूप से बचाना सबसे जरूरी है, क्योंकि पराबैंगनी किरणों, शुष्क हवा, धूल और आर्द्रता के चलते परेशानी होने की अधिक आशंका रहती है। इस मौसम में किन बातों का रखें ध्यान, कैसे बढ़ाएं सतर्कता, इन दिनोंतेज गर्मी और धूप न केवल नींद छीनती है बल्कि इससे त्वचा और आंखों के संक्रमण का भी खतरा रहता है। गर्मी के कारण एलर्जी और संक्रमण की परेशानी हो सकती है।

इससे आपकी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो सकती है। गर्मी और उमस से सतर्कता बरती जाए तो ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। इन दिनों हाइड्रेट रहना जरूरी है, साथ ही सही दिनचर्या और खानपान को लेकर भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। ये भले सामान्य बात लगे, पर इससे गर्मी से होने वाली समस्याओं से बचे रहेंगे। बच्चों, बुजुर्गों और बीमारी से पीड़ित लोगों को इन दिनों अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होती है, खासकर जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उन्हें आंखों और त्वचा के संक्रमण की आशंका अधिक रहती है।
मौसमी फल हैं भीतरी सनस्क्रीन
धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाव में मौसमी फल भी सनस्क्रीन की तरह अंदरूनी अंगों को सुरक्षित रखते हैं। इसका प्रभाव हमारी सेहत के साथ त्वचा और आंखों पर पड़ता है। इस मौसम में लोग आंवले का सेवन कम करते हैं, पर गर्मी में भी यह लाभकारी है। इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होती है। इससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।इसके अलावा, मौसमी फलों जैसे— तरबूज, आम, जामुन आदि का प्रयोग भी धूप से बचाव करने में कारगर होता है, जिन्हें भीतरी सनस्क्रीन कहा जा सकता है।
ध्यान रहे पानी पीने के अलावा, खीरा, तरबूज, संतरा और स्ट्राबेरी जैसे अधिक पानी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना न भूलें। ये खाद्य पदार्थ न केवल आपके शरीर को हाइड्रेट करते हैं, बल्कि आपकी त्वचा को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। इससे आंखों को भी लाभ मिलता है। हाइड्रेट रहने, धूप से बचाव करने जैसी सतर्कता से त्वचा संक्रमण और आंखों की परेशानियों से बचे रहते हैं।
गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखना जरूरी

गर्मी में आंखों में सूखापन की समस्या अधिक होती है। यूवी किरणों और प्रदूषण के कारण आंखों में संक्रमण का भी खतरा रहता है। बाहर निकलते समय गॉगल्स का प्रयोग करना चाहिए। यह आकार में बड़ा हो, ताकि आंखों को पूरी तरह ढक सके। यदि तैराकी के लिए जा रहे हैं तो इसे पहनना न भूलें।बच्चे अक्सर अनदेखी करते हैं। आंखों को सीधी धूप से बचाने के लिए चौड़ी किनारी वाली टोपी या हैट लगाएं।यदि आंखों में खुजली हो रही है या कोई समस्या है तो उन्हें हाथों से मलना नहीं चाहिए, अन्यथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
कोई भी दवा या आई ड्राप चिकित्सक से परामर्श के बाद ही लें। पंखे या एसी की हवा के सीधे संपर्क से भी आंखों को बचाकर रखें। धूप में अधिक देर रहने या स्क्रीन देखने से आंखों की थकान, उससे लगातार पानी आने की परेशानी हो रही है, तो चिकित्सक से जल्दी परामर्श लें।ब्रेक लेने का नियम अपनाएं, यानी हर 20 मिनट पर 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
सनस्क्रीन के प्रयोग से त्वचा रहेगी सुरक्षित
त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है। यह धूल, मिट्टी, हानिकारक बैक्टीरिया आदि से बचाता है। त्वचा पर होने वाले पसीने के जरिये शरीर का तापमान संतुलित रहता है, पर पसीना लंबे समय तक बना रहे, तो त्वचा संबंधी परेशानी भी हो सकती है। धूप आवश्यक है, क्योंकि इसकी मदद से त्वचा विटामिन डी का निर्माण करती है, लेकिन इन दिनों तेज धूप व गर्मी इसके लिए चुनौती बन जाती है। त्वचा की स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। बुजुर्ग और बच्चे साफ-सफाई में लापरवाही बरतते हैं, इसलिए उनमें संक्रमण व त्वचा संबंधी परेशानी अधिक देखी जाती है। चूंकि उनकी प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है इसलिए सफाई का अधिक ध्यान जरूरी है। साथ ही, रोजाना सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। यह केवल धूप से बचाव के लिए ही नहीं है। इसे घर के भीतर भी लगाएं। यह स्क्रीन से निकलने वाले हानिकारक किरणों से भी सुरक्षा देते हैं। लोग अच्छे ब्रांड का सनस्क्रीन लगाकर मान लेते हैं कि सुरक्षित हैं, पर हर तीन घंटे में सनस्क्रीन लगाना चाहिए। इसी तरह संक्रमण से बचाव के लिए रोज एक आंवला लेना बेहतर होता है।
ताकि त्वचा रहे स्वस्थ व सुरक्षित

- अक्सर सनस्क्रीन लगाते समय कान, गर्दन और हाथों पर ध्यान नहीं दिया जाता। चेहरे की तरह ही इन पर भी धूप का प्रभाव होता है।
- सुबह 11 बजे से शाम चार बजे के बीच तेज धूप होती है। इस अवधि में बाहर निकलने से बचें या सुरक्षा उपायों के साथ निकलें।
- ऐसे मॉइस्चराइजर और सीरम चुनें, जिनमें हाइजुलरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid), ग्लिसरीन और एलोवेरा जैसे नमी प्रदान करने वाले तत्व मौजूद हों। ये त्वचा में नमी बनाए रखते हैं, इससे त्वचा मुलायम रहती है।
- घर या दफ्तर में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करने से हवा में नमी बढ़ाने और त्वचा को अत्यधिक शुष्क होने से बचाने में मदद मिल सकती है।
- सीरम का प्रयोग करते हैं तो जेल वाले प्रोडक्ट चुनें। साथ ही ऐसे सीरम चुनें, जिनमें विटामिन सी जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त हों।
- त्वचा तैलीय है या मुंहासों से परेशान हैं, तो रोमछिद्रों को बंद होने से बचाने के लिए जेल वाले सनस्क्रीन का प्रयोग बेहतर विकल्प है।
खानपान में रहे विशेष ध्यान
- विटामिन-सी से त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचने में मदद मिलती है। भोजन में बेरी, शिमला मिर्च व ब्रोकोली आदि को शामिल करें।
- ओमेगा-3 त्वचा को हाइड्रेटेड रखने और सूजन को कम करने में मदद करता है। यह वसायुक्त मछली (सैल्मन, मैकेरल), चिया सीड्स और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थों में खूब होते हैं।
- एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थ लें ये धूप के संपर्क में आने से होने वाले फ्री रेडिकल नुकसान से लड़ने में मदद करते हैं। ये ब्लूबेरी, पालक और टमाटर जैसे खाद्य पदार्थों में आपको मिल सकता है।
आंखों को मिले ठंडक, बनी रहे इसकी सेहत
- यदि आंखों में जलन महसूस हो रही है, थकान महसूस होती है तो ठंडे पानी में कपड़ा भिगो लें और उसे निचोड़कर कुछ देर आंखों पर रखें।
- आर ओ वाटर से आंखों को धोएं। सामान्य पानी में संक्रमण होने का खतरा रहता है।
- ठंडे आई मास्क या खीरे के टुकड़े का प्रयोग भी अच्छा है।
- आई मेकअप का प्रयोग करने के बाद उसे अच्छी तरह साफ कर लें। अन्यथा इससे भी आंखों में जलन या खुजली हो सकती है और आंखों में संक्रमण भी हो सकता है।
- रात को अच्छी नींद भी आंखों की सेहत के लिए आवश्यक है।
- एसी के सीधे और लंबे समय तक संपर्क में रहने से आंखों में मौजूद आंसू की परत सूख सकती है। इससे आंखों में अत्यधिक सूखापन, जलन और खुजली जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
- आहार में एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फल (खट्टे फल और बेरीज), पत्तेदार सब्जियां और कैरोटीन से भरपूर सब्जियां शामिल करना चाहिए। इससे गर्मियों में होने वाली आंखों की जलन व सूखापन कम करने में मदद मिलती है। अपनी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बनाएं।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
