पित्ताशय की पथरी के लिए आयुर्वेदिक उपचार      Publish Date : 14/06/2026

पित्ताशय की पथरी के लिए आयुर्वेदिक उपचार

                                                                                                     डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

पित्ताशय में जब कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या फिर सख्त होने लगता है, तो हमें अक्सर पथरी की शिकायत हो जाती है। ऐसे में रोगी को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है और साथ में खाना पचने में भी दिक्कत आने लगती है। पित्त की पथरी यानि गॉलस्टोन छोटे-छोटे पत्थर होते हैं, जो पित्ताशय की थैली में बनते हैं। पित्त की पथरी लीवर के नीचे स्थित होती है। पित्त की पथरी बहुत दर्दनाक हो सकता है यदि इसका समय पर उपचार नहीं किया जाए तो इसे निकालने के लिए एक ऑपरेशन की आवश्यकता हो सकती है।

लीवर और गॉल ब्लैडर के बीच बाइल डक्ट नामक एक छोटी-सी नली होती है, जिसके माध्यम से यह पित्त को गॉलब्लैडर तक पहुंचाता है। जब व्यक्ति के शरीर में भोजन जाता है तो यह ब्लैडर पित्त को पिचकारी की तरह खींच कर उसे छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में भेज देता है, जिसे डुओडेनियम कहा जाता है। इससे पाचन क्रिया की शुरुआत होती है।

                                  

कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी हो सकती है। पित्ताशय की पथरी के लक्षण जो कुछ नजर में आते हैं वह इस प्रकार से हैं:-

  • बदहजमी
  • खट्टी डकार
  • पेट फुलाना
  • एसिडिटी
  • पेट में भारीपन
  • उल्टी
  • पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।

पित्ताशय में पथरी होने की स्थिति से कैसे बचा जा सकता है?

पित्ताशय में पथरी के होने से बचने के लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव लाना आवश्यक होता है। पित्ताशय में पथरी होने पर पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए-

आहार

  • गाजर और ककड़ी का रस को 100 मि.ली. की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
  • सुबह खाली पेट 50 मि.ली. नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।
  • शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शक्कर युक्त पेय हानिकारक है। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
  • नाशपाती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों से पित्ताशय के रोग दूर होते हैं।
  • विटामिन-सी अर्थात् एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
  • पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है और प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
  • तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।
  • खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है।
  • रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी की शिकायत दूर होती है।

क्या खाने से परहेज करनी चाहिए-

  • पित्त की पथरी होने पर चिकित्सकों ने आहार से अण्डों को हटाने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार इसमें काफी कोलेस्ट्रॉल होता है जो पित्ताशय में पथरी का कारण बनता है।
  • यदि आपको तली हुई चीजें खाना पसंद है तो उसे तुरन्त छोड़ दीजिए। यह न केवल सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि इससे पित्त की पथरी की समस्या और भी बढ़ सकती है। इसलिए आप कोशिश करें कि ज्यादा तली हुई चीजें न खाएं। आपको बता दें कि तली हुई खाद्य पदार्थ में हाइड्रोजनित वसा, ट्रांस वसा और सेचुरेटेड वसा होती है जो आपकी पित्ताशय के दर्द को बढ़ा सकता है। तलने के लिए स्वस्थ विकल्प के रूप में आप जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करें।
  • पित्त की पथरी में परहेज की बात करें तो आपको मांसाहारी से भी परहेज करना चाहिए जैसे, मीट, लाल मांस, सूअर का मांस और चिकन आदि। इसके अलावा आप तैलीय मदली भी न खाएं।
  • प्रोसेस्ड फूड के पीछे लोग क्यों भाग रहें हैं इसकी एक वजह यह भी है कि ये खाने में अच्छे लगते हैं और इसे बनाने के लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। लेकिन इसका स्वाद हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। यह न केवल शरीर के पाचन तंत्र को खराब कर सकता है बल्कि पित्त की पथरी की समस्या को भी बढ़ा सकता है। आमतौर पर ट्रांस फैटी एसिड, पैकेज्ड फूड में मौजूद होते हैं जो पित्त की पथरी के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। आप चिप्स, कुकीज, डोनट्स, मिठाई या मिश्रित पैक वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
  • पित्त की पथरी होने पर आप परिष्कृत अवयव वाले खाद्य पदार्थ से दूरी बनाएं। व्हाइट ब्रेड, परिष्कृत आटा पास्ता, सफेद चावल और परिष्कृत चीनी ये सभी चीजें फैट का रूप ले लेती है, जो पित्त में कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि कर सकती है।
  • पित्त की पथरी की समस्या है तो आप वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन मत कीजिए। दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम, भारी क्रीम और खट्टा क्रीम में उच्च स्तर के फैट होते हैं, जो पित्त की पथरी को बढ़ाने का काम करते हैं। अपने आहार में डेयरी की मात्रा कम करने की कोशिश करें या कम वसा वाले दूध को चुनें।
  • पित्त की पथरी में परहेज के लिए या आपको अपने पित्ताशय की थैली की रक्षा करने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। सबसे बड़ी समस्या उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ से हैं। इसलिए इनसे दूरी बनाकर रखें। खाद्य पदार्थ जैसे वनस्पति तेल और मूंगफली का तेल चिकना या तला हुआ होता है, इन्हें छोड़ना अधिक मुश्किल होता है और इससे पित्ताशय की थैली की समस्या हो सकती है। प्रोसेस्ड या व्यावसायिक रूप से बेक्ड उत्पादों की तरह ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थ, पित्ताशय की थैली के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सफेद पास्ता, ब्रेड और शुगर जैसे परिष्कृत सफेद खाद्य पदार्थों से बचें, ये आपके पित्ताशय की थैली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आपको शराब और तंबाकू से भी बचना चाहिए।
  • पित्त की पथरी में अम्लीय फूड नहीं खाना चाहिए। खाद्य पदार्थ जो अम्लीय होते हैं, जैसे कि खट्टे फल, कॉफी और टमाटर सॉस न केवल आपके पेट के लिए जलन पैदा कर सकते हैं बल्कि इससे आपको पित्त की पथरी भी हो सकती है।

क्या खाना चाहिए-

  • फल और सब्जियों की अधिक मात्रा।
  • स्टार्च युक्त कार्बाहाइड्रेट्स की अधिक मात्रा। उदाहरण के लिए ब्रेड, चावल, दालें, पास्ता, आलू, चपाती और प्लान्टेन (केले जैसा आहार)। जब सम्भव हो तब साबुत अनाजों से बनी वस्तुएं लें।
  • थोड़ी मात्रा में दूध और डेयरी प्रोडक्ट लें। कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट लें।
  • कुछ मात्रा में मांस, मछली, अण्डे और इनके विकल्प जैसे फलियाँ और दालें।
  • वनस्पति तेलों जैसे सूरजमुखी, रेपसीड और जैतून का तेल, एवोकाडो, मेवों और गिरियों में पाए जाने वाली असंतृप्त वसा।
  • रेशे की अधिकता से युक्त आहार ग्रहण करें। यह फलियों, दालों, फलों और सब्जियों, जई और होलवीट उत्पादों जैसे ब्रेड, पास्ता और चावल में पाया जाता है।
  • तरल पदार्थ अधिक मात्रा में लें, जैसे कि पानी या औषधीय चाय आदि का प्रतिदिन कम से कम दो लीटर सेवन करें।

जीवनशैली-

योग और व्यायाम-नियमित व्यायाम रक्त ऊतकों में कोलेस्ट्रॉल को घटाता है, जो कि पित्ताशय की समस्या उत्पन्न कर सकता है। प्रतिदिन तीस मिनट तक, सप्ताह में पांच बार, अपेक्षाकृत मध्यम मात्रा की शारीरिक सक्रियता, व्यक्ति के पित्ताशय की पथरी के उत्पन्न होने के खतरे पर अत्यधिक प्रभावी होती है।

योग-पित्ताशय की पथरी के उपचार के लिए जिन योगासनों का अभ्यास करना चाहिए, वह हैं-

  • सर्वांगासन
  • शलभासन
  • धनुरासन
  • भुजंगासन

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।