
अनियमित मासिक धर्म की समस्या के लिए आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 09/06/2026
अनियमित मासिक धर्म की समस्या के लिए आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
वर्तमान समय की खराब जीवनशैली, तनाव और अनहेल्दी खानपान आदि के चलते महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन और अनियमित पीरियड्स आदि समस्याओं के प्रमुख कारण बन रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार और उचित आयुर्वेदिक परामर्श से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकना सम्भव है।
हालांकि, वर्तमान में बहुत सी जागरूकताओं के उपरांत भी भारत में हॉर्मोन से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जो कि आज की एक बड़ी समस्या बन चुकी है। महिलाओं में हॉर्मोन से जुड़ी समस्याएं होने के पीछे के कारणों में अधिकतर मामलों में खराब जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान सामने आया है।

यही हॉर्मोनल समस्या जब बढ़ जाती है तो आपके पीरियड्स को अनियमित कर देती है। कई छोटी-छोटी आदतें व समस्याएं हैं जिनके कारण यह परेशानी होने लगती हैं जैसे अधिक तनाव रहना, बाहर के भोजन का अधिक सेवन करना और पर्याप्त एक्सरसाइज न करना आदि शामिल है। हॉर्मोन से जुड़ी समस्याओं के कारण आने वाले समय में इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार ऐसा वात और पित्त दोष के असंतुलन के कारण होता है। इन दोषों को संतुलित बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय भी बताए गए हैं।
पीरियड्स के अनियमित होने का प्रमुख कारण
हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा कहते हैं कि यदि आयुर्वेद की दृष्टि से इस समस्या को देखा जाए तो पीरियड्स अनियमित होने का मुख्य कारण महिलाओं में अग्नि (पाचन शक्ति) का कमजोर होना और आर्तव धातु का दूषित होना होता है। जहां अन्य चिकित्सा पद्धति में केवल लक्षणों को दबाया जाता है वहीं आयुर्वेद में इस समस्या को समूल समाप्त करने के लिए उपचार किया जाता है। इसके माध्यम से आपके शरीर के अंदर दोषों को संतुलित करने की कोशिश की जाती है।
आयुर्वेद में अनियमित पीरियड्स का उपचार

पीरियड्स को नियमित बनाए रखने के आयुर्वेद में किसी भी प्रकार की दवा से अधिक मरीज की जीवनशैली को सुधारने पर जोर दिया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार मरीज को अपने खानपान में पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए। ऐसे भोजन करने की कोशिश करें जो कि पचाने में आसान हों। इसके लिए मरीज को अपने आहार में ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए और इसके साथ ही जितना हो सके तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार मरीज को अधिक जंक फूड, मैदा या चीनी आदि का सेवन न करने की भी सलाह दी जाती है, क्योंकि इनका सेवन से शरीर में पित्त और वात दोष बढ़ सकते हैं।
हॉर्मोन संतुलन के लिए प्रभावशाली कुछ जड़ी बूटियां
अनियमित मासिक धर्म का सबसे बड़ा कारण सम्बन्धित महिला में हॉर्मोन असंतुलन की स्थिति को माना जाता है और इसलिए हॉर्मोन के संतुलन को बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में कई ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जो हॉर्मोन के संतुलित बनाए रखने में बेहद प्रभावी सिद्व होती है। ऐसे में यदि इन जड़ी-बूटियों का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो आप हॉर्मोनल संतुलन बनाए रख सकते हैं।
इर्रेगुलर पीरियड्स के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधियों में उपयोग की जाने वाली औषधियों में प्रमुख रूप से शामिल है -
- अशोक
- शतावरी
- अश्वगंधा
- अशोक की छाल
आयुर्वेद के अनुसार इन औषधियों का सेवन अगर सही तरीके से किया जाए तो इनका सेवन करने से महिलाओं की प्रजनन शक्ति बढ़ती है और उनका गर्भाशय भी मजबूत होता है।
नियमित योग और प्राणायाम करना भी है जरूरी
इर्रेगुलर पीरियड्स की समस्या को दूर करने के लिए उचित खानपान के साथ-साथ आपके लिए नियमित रूप से योग और प्राणायाम करना भी जरूरी होता है। ऐसा करने से इर्रेगुलर पीरियड्स की समस्या से मुक्ति पाई जा सकता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार भुजंगासन, बद्धकोणासन और अनुलोम-विलोम प्राणायाम आदि ऐसे योगासन है, जिनकी जो रक्त संचार प्रक्रिया में सुधार होता हैं और साथ ही साथ इनसे तनाव भी कम होता है। अगर हॉर्मोन संतुलित रहेंगे तो आपके पीरियड्स भी नियमित रहेंगे।
अधिकतर लोग यही भूल करते हैं कि वे शारीरिक स्वास्थ्य का तो ध्यान रखते हैं लेकिन इस चक्कर में वह अपने मानसिक स्वास्थ्य को भूल जाते हैं। अधिक तनाव भी हॉर्मोनल असंतुलन का एक मुख्य कारण ही इसलिए इसे कम करने के लिए भरपूर नींद लें, ध्यान करें और जरूरत पड़ने पर आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
