दुबले-पतले लोगों में भी है आंत से जुड़ी बीमारियों का खतरा      Publish Date : 06/06/2026

   दुबले-पतले लोगों में भी है आंत से जुड़ी                        बीमारियों का खतरा

                                                                                                         डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

अगर आपका वजन सामान्य से कम है यानी आप दुबले-पतले हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको बीमारियों का खतरा नहीं है या फिर कम है। आज के अपने इस लेख के माध्यम से हम यह जानेंगे आखिर कैसे दुबले-पतले लोगों में आंतों से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं।

इस बात में कोई शक नहीं है कि मोटापा हमारे शरीर में तरह-तरह की बीमारियां लेकर आता है, जिनमें कई क्रोनिक बीमारियां व जानलेवा बीमारियां भी शामिल होती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दुबले-पतले लोगों को किसी प्रकार की बीमारियों का खतरा नहीं होता है। अक्सर यह माना जाता है कि जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं, उन्हें ही पेट एवं आंतों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। जबकि लोगों को यह समझना भी आवश्यक है कि पेट व आंतों से जुड़ी बीमारियां सिर्फ शरीर के वजन में बदलाव होने से ही नहीं बल्कि खानपान व जीवनशैली से जुड़ी आदतों पर भी निर्भर करती है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि आजकल उन लोगों में भी आंत से जुड़ी बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ रहा है, जिनका वजन कम है या फिर जो लोग दुबले पतले हैं।

                               

सबसे पहले समझना जरूरी है कि हमारे शरीर में “गट हेल्थ” यानी आंतों की सेहत बहुत महत्वपूर्ण होती है। आंतों में अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का संतुलन बना रहना चाहिए। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो वजन चाहे कम हो या अधिक, लंकिन फिर भी समस्या शुरू हो सकती है।

खानपान से जुड़ी विभिन्न गलत आदतें

खासतौर पर जिनका वजन कम है यानी दुबले-पतले लोग अपने खानपान का ध्यान नहीं रखते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे कुछ भी खा लें उनका वजन नहीं बढ़ेगा। हालांकि, यह हो सकता है कि उनका वजन न बढ़े लेकिन खराब खानपान उनके पेट व आंतों को नुकसान तो पहुंचा ही रहा होता है। जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड या लंबे समय तक खाली पेट रहना आंतों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इससे गैस, एसिडिटी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अधिक स्ट्रेस और बिजी लाइफस्टाइल

आपका मानसिक स्वास्थ्य और आपकी आंतों का स्वास्थ्य दोनों एक दूसरे से एक खास कनेक्शन से जुड़े होते हैं और इस कनेक्शन को गट-ब्रेन-एक्सिस कहा जाता है। अगर आपकी आंत ठीक से काम नहीं कर पा रही है, तो उसका असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी अवश्य ही पड़ता है और वहीं अगर आपको स्ट्रेस या अन्य कोई मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या है तो इससे भी आपको आंतों पर असर पड़ने लगता है।

बिना डॉक्टर से पूछे बार-बार दवाएं लेना

आजकल यह एक बड़ी समस्या बन चुका है, कि लोग बिना डॉक्टर से पूछे खुद ही इंटरनेट पर सर्च करके दवाएं लेने लगे हैं। बिना जरूरत दवाएं लेने से आंतों के अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है और संक्रमण या एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इसका असर आपके लिवर और किडनी के साथ-साथ आंतों पर भी पड़ता है।

फाइबर को गंभीरता से न लेना

विशेष रूप से जिन लोगों का वजन काफी कम होता है, यानी जो दुबले-पतले शरीर वाले लोग अक्सर ऐसी चीजें खाते हैं जो कि उनके वजन को बढ़ाती हैं, क्योंकि उनका लक्ष्य अपने शरीर के वजन को बढ़ाना होता है, ताकि वे पतले-दुबले न दिखें। ऐसे में वे हाई फैट वाली डाइट तो लेते हैं, लेकिन फाइबर को इग्नोर कर देते हैं। शरीर में फाइबर की कमी धीरे-धीरे आंतों पर असर डालती है, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग और पेट दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

                          

आप दुबले-पतले हों या फिर आपको वजन ज्यादा बढ़ा हुआ हो, आंतों को स्वस्थ रखना हर किसी के लिए बेहद जरूरी है और इसके लिए निम्न बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए-

  • फाइबर युक्त आहार लें जैसे साबुत अनाज, फल और सब्जियां आदि।
  • संतुलित डाइट रखें ज्यादा फैट या शुगर वाली चीजें न खाएं।
  • दिनभर में पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि आपको डिहाइड्रेशन की समस्या न होने पाए।
  • मेंटल स्ट्रेस न होने दें और अगर हो गया है तो योग व वॉकिंग आदि से कम करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बगैर कोई भी दवा न लें।

अगर पेट में दर्द या फिर पेट से जुड़ी कोई भी समस्या होती है तो आपको किसी अच्छे गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ पतला होना स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। सही खानपान, अच्छी दिनचर्या और आंतों का संतुलन ही असली सेहत की पहचान है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।