पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपचार      Publish Date : 01/06/2026

पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ाने के आयुर्वेदिक उपचार

                                                                          डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

  • टेस्टोस्टेरोन नामक हॉर्मोन ताकत, सहनशक्ति, मनोदशा और पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य को बनाए रखने की कुंजी है।

दुर्भाग्यवश, आज के तनाव, खराब खान-पान और नींद की कमी के कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, यहां तक कि 30 वर्ष की आयु के पुरुषों में भी आज यह समस्या काफी आम है। इस हॉर्मोन के सम्बन्ध में हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा इसके लिए एक सफल उपचार प्रदान करते हैं जो कि प्राकृतिक रूप से हॉर्मोनल संतुलन को बहाल करते हैं।

टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के कुछ कारगर आयुर्वेदिक उपचारः

                   

1. अश्वगंधा:- प्राकृतिक रूप से टेस्टोस्टेरोन बूस्टर अश्वगंधा एक एडाप्टोजेनिक पौधा है जो तनाव के स्तर को कम करने और टेस्टोस्टेरोन और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

उपयोग संबंधी सुझावः रात्री में सोने से पहले आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर को गुनगुने दूध में मिलाकर सेवन करें। सही मात्रा जानने के लिए, किसी योग्य आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श प्राप्त करें।

2. आरामदायक नींद को प्राथमिकता दें:- नींद शरीर के लिए पुनर्स्थापन का प्राकृतिक चक्र है। टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन निर्बाध एवं गहरी नींद के दौरान स्रावित होता है। अतः एक गहरी और निर्बाध नींद लेना सुनिश्चित् करें।

आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाहः रात को जल्दी सो जाएं, यानी रात 10 बजे से पहले। मन को शांत करने और अच्छी नींद सुनिश्चित करने के लिए सिर की त्वचा पर ब्राह्मी या जटामांसी तेल से मालिश भी कर सकते हैं।

3. शिलाजीत:- भीतर से पुनर्जीवन प्रदान करने वाली अयुर्वेदिक औषधि- शिलाजीत एक शक्तिशाली रसायन (कायाकल्पक) है जो शक्ति, पौरुष, कामुकता और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है।

मात्राः शुद्ध शिलाजीत राल की मटर के दाने जितनी मात्रा गुनगुने दूध के साथ दिन में एक बार लें। शिलाजीत के सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए किसी अनुभवी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की देखरेख में ही शिलाजीत का सेवन करें।

4. जिंक से भरपूर और हॉर्मोन को सहारा देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें - जिंक की कमी का प्रभाव सीधा टेस्टोस्टेरोन पर पड़ता है। अपने दैनिक आहार में निम्नलिखित आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थों को शामिल करें- कद्दू के बीज, भीगी हुई खजूर, कच्चा आंवला, कौंच बीज और गोक्षुरा जैसी जड़ी-बूटियाँ। आयुर्वेदिक सलाह के साथ इनका प्रयोग करने पर ये सबसे अधिक प्रभावी सिद्ध होंगे।

5. समझदारी से व्यायाम करें:- कठिन नहीं, आयुर्वेद भी संतुलित गतिविधि का सुझाव देता है। अत्याधिक मेहनत से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है। सही संयोजन क्या है? शक्ति, योग और श्वास व्यायाम।

दैनिक दिनचर्याः शारीरिक गतिविधियों के लिए दिन में केवल 30 मिनट का समय हॉर्मोन को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने में सहायक होगा।

विशेषः आयुर्वेद लक्षणों को छुपाता नहीं है, यह आपके शरीर को संतुलन में वापस लाता है। थकान, ऊर्जा की कमी या हॉर्मोनल असंतुलन, अब समय आ गया है कि आप अपना नियंत्रण वापस प्राप्त करें, सुरक्षित, हर्बल, डॉक्टर द्वारा अनुशंसित उपचार।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।