
आंत में रुकावट होने के प्रमुख कारण लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 31/05/2026
आंत में रुकावट होने के प्रमुख कारण लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
आंत हमारे पाचन तंत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होती है और इसमें किसी तरह की रुकावट होना बेहद दर्दनाक और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है। आज के अपने इस लेख में हम गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से हम आंतों से जुड़ी समस्या के बारे में कुछ विशेष जानकारियां देने वाले हैं।
आंत में रुकावट यानी इंटेस्टाइनल ऑब्स्ट्रक्शन (Intestinal Obstruction) एक ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें छोटी या बड़ी आंत में खाना, पानी और गैस का सामान्य प्रवाह रुक जाता है। यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों, पेट की सर्जरी करा चुके लोगों और कुछ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में इसका खतरा अधिक होता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है, इसलिए इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। हमारे इस लेख में हमारे आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ0 सुशील शर्मा ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनके बारे में हर जानना बहुत जरूरी है।
आंत में रुकावट के प्रमुख लक्षण
आंत में रुकावट के दौरान मरीज को कई गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसका सबसे सामान्य संकेत पेट में तेज और बार-बार उठने वाला दर्द होता है, जो कई बार मरोड़ जैसा महसूस होता है। इसके साथ पेट फूलने लगता है, क्योंकि गैस और भोजन आंत में आगे नहीं बढ़ पाते। मरीज को भारीपन और बेचैनी महसूस हो सकती है। खाना ठीक से पच न पाने की वजह से मतली और बार-बार उल्टी की समस्या भी हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में उल्टी से बदबू आना गंभीर स्थिति का संकेत माना जाता है। लंबे समय तक गैस या मल पास न होना भी आंत में ब्लॉकेज का बड़ा लक्षण है। इसके अलावा भूख कम लगना, शरीर में कमजोरी, डिहाइड्रेशन और लगातार थकान महसूस होना भी इस बीमारी के सामान्य संकेतों में शामिल हैं।
आंत में रुकावट होने के प्रमुख कारण
पेट की पुरानी सर्जरी - जिन लोगों की पहले पेट या आंत की सर्जरी हो चुकी होती है, उनमें अंदरूनी चिपकाव (Adhesions) बनने लगते हैं। यही चिपकाव कई बार आंत को दबाकर रुकावट पैदा कर देते हैं। यह आंत में रुकावट का सबसे सामान्य कारण माना जाता है।
हर्निया - हर्निया के कारण भी आंत का एक हिस्सा पेट की कमजोर मांसपेशियों से बाहर निकल आता है। कई बार यह हिस्सा फंस जाता है और ब्लड सप्लाई रुकने लगती है, जिससे आंत में ब्लॉकेज हो सकता है।
आंत में ट्यूमर या कैंसर - आंत में बनने वाला ट्यूमर या Colorectal Cancer भी रास्ता संकरा कर सकता है। धीरे-धीरे भोजन और मल का रास्ता बंद होने लगता है, जिससे रुकावट की स्थिति पैदा हो जाती है।
कब्ज और मल का जमाव - लंबे समय तक रहने वाली गंभीर कब्ज के कारण भी आंतों में रुकावट हो सकती है, क्योंकि इससे मल का रास्ता बंद होने लगता है और पेट फूलने व दर्द जैसी परेशानी बढ़ जाती है।
आंत का मुड़ जाना या फंस जाना - कई बार आंत अपनी जगह से मुड़ जाती है, जिसे Volvulus कहा जाता है। इससे आंत में खून की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। बच्चों में आंत का एक हिस्सा दूसरे हिस्से में घुस जाना (Intussusception) भी रुकावट का कारण बन सकता है, समय पर इलाज करान बेहद जरूरी है

अगर पेट में लगातार तेज दर्द हो, उल्टी रुकने का नाम न ले रही हो, पेट असामान्य रूप से फूल गया हो या लंबे समय तक गैस और मल पास न हो रहा हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। देरी होने पर आंत फटने, गंभीर इंफेक्शन फैलने और जान का खतरा भी बढ़ सकता है। आंत में रुकावट का इलाज इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती मामलों में दवाओं, शरीर में तरल पदार्थ चढ़ाने और पाइप के जरिए पेट की गैस व जमा पदार्थ निकालकर राहत दी जाती है, जबकि गंभीर स्थिति में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। समय पर जांच और सही इलाज से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है, इसलिए इसके लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।
यदि आंतों में रुकावट गंभीर नहीं है और केवल क्रोनिक कब्ज या आंतों की कमजोरी के कारण मल फंसा हुआ है, तो आयुर्वेद में पाचन अग्नि (जठराग्नि) को ठीक करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं।
प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ
त्रिफला चूर्णः के अनुसार आंवला, हरड़ और बहेड़ा का यह मिश्रण आंतों को साफ करने और कब्ज दूर करने में मदद करता है।
अभयारिष्टः यह लिक्विड फर्मेंटेड सिरप आंतों की गतिशीलता (Peristalsis) को बढ़ाता है और मल को आसानी से बाहर निकालता है।
कैस्टर ऑयल (एरंड तेल): रात में गुनगुने दूध या पानी के साथ एक चम्मच एरंड तेल लेने से आंतों में जमा कठोर मल नरम होकर साफ होता है।
इच्छाभेदी रसः तीव्र कब्ज होने पर स्वामी रामदेव के अनुसार यह पेट की गहरी गंदगी को साफ करने में मदद करता है, लेकिन इसे केवल डॉक्टर की देखरेख में ही लेना चाहिए।
आहार और जीवनशैली में बदलावः
गुनगुना पानीः दिनभर थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पीने से पाचन क्रिया सुचारू रहती है और टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं।
फाइबर और तरल पदार्थः भोजन में दलिया, मूंग की दाल, लौकी और तोरी जैसी हल्की और सुपाच्य चीजें शामिल करें।
घी का सेवनः भोजन में गाय के शुद्ध घी का संतुलित उपयोग आंतों में रूखापन (Vata Dosha) कम करता है जिससे मल का मार्ग आसान होता है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
