पाचन क्रिया को सुधारने के लिए करें नौकासन      Publish Date : 28/05/2026

पाचन क्रिया को सुधारने के लिए करें नौकासन

                                                                                                डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

नौकासन शब्द सुनते ही हमारे मन में नाव जैसी आकृति बनकर उभर आती है। इस आसन में भी हमारे शरीर की आकृति नौका के समान हो जाती है, इसलिए इसे नौकासन कहा जाता है। यदि आपको अपने पेंट के फैट को कम करना हो, नाभि को सही रखना हो और पाचन तंत्र को मजबूत बनाना हो, तो आपके लिए नौकासन करना अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है। नौकासन करने से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती है और पेट की चर्बी कम करने में सहायता मिलती है। जिन लोगों की नाभि वार-बार खिसक जाती है, उनके लिए यह आसन रामबाण की तरह कार्य करता है।

                                     

इस आसन का नियमित अभ्यास करने से व्यक्ति का पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर में स्फूर्ति आती है। नौकासन को करने के लिए आसन के लिए दरी, कंबल या योगा मैट का उपयोग करना चाहिए। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दंडासन में बैठें। इसके बाद कोहनियों के बल लेट जाएं। छाती को फुलाते हुए दोनों पैरों को 30 से 40 डिग्री तक ऊपर उठाएं और अपनी दृष्टि को पैरों की ओर रखें। इस अवस्था में लगभग एक मिनट तक रुके और लंबी तथा गहरी श्वास लें और पैरों को सीधे रखें। 1 मिनट पूरा होने पर शवासन में लेट जाएं। पैरों और पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़कर श्वास-प्रश्वास पर ध्यान दें।

इस आसन को करते समय कोहनियां कंधों की स्थिति एक सीध में हो। कोहनियों को आपस में अधिक से अधिक पास रखने का प्रयास करें, इससे छाती अच्छे से फूलती है। दोनों पैरों के पंजों को शरीर की ओर खींचने से पेट की मांसपेशियों पर खिंचाव बढ़ता है। इस दौरान अपनी गर्दन को ढीला रखें, उस पर अनावश्यक दवाव न डालें। छाती को अधिक से अधिक फुलाने का प्रयास करें, ताकि पेट की मांसपेशियों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ सके।

                                

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।