गर्मियों में आंखों में होने वाली एलर्जी और रूखेपन से कैसे बचाव करें      Publish Date : 12/05/2026

गर्मियों में आंखों में होने वाली एलर्जी और रूखेपन से कैसे बचाव करें

                                                                                                                     डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

गर्मियों के मौसम आंखों पर भी गंभीर प्रभाव डालता है, जिसके कारण आंखों में एलर्जी, जलन और खुजली जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आज के इस लेख में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 डॉ0 सुशील शर्मा बता रहे हैं इन समस्याओं और उनके समाधान के बारे में विस्तार से-

हर साल गर्मियों में एक जैसा पैटर्न देखने को मिलता है आंखों में लालिमा, जलन, खुजली और इन्फेक्शन के मामलों में साफ बढ़ोतरी। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर समस्याएं सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से आसानी से रोकी जा सकती हैं। तेज धूप, बढ़ती यूवी किरणें, सूखी और प्रदूषित हवा ये सभी मिलकर आंखों के लिए मुश्किल हालात बना देते हैं। इसके बावजूद, लोग अक्सर इन समस्याओं को हल्के में लेते हैं या सही कारण समझ नहीं पाते। यह लेख आपको आसान भाषा में समझाता है कि गर्मियों में आंखों को क्या नुकसान होता है और उनसे बचाव कैसे किया जा सकता है।

गर्मियों से आंखों में सूखापन होना

                                             

गर्मी का मौसम आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। सामान्य परिस्थितियों में आंखों पर एक पतली नमी की परत (Tear Film) होती है, जो उन्हें सूखने और संक्रमण से बचाती है। लेकिन जब तापमान ज्यादा होता है और हवा में नमी कम होती है, तो यह परत जल्दी सूखने लगती है। इससे आंखों में ड्राईनेस, जलन, चुभन और थकान महसूस होती है। अगर शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो, तो यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि आंसू बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। आंखों में सूखापन होना गर्मियों के कारण आंखों में होने वाली बीमारियों में से एक है।

इसके अलावा, एसी, पंखे या गर्म हवाओं के लंबे संपर्क में रहने से आंखों की नमी लगातार कम होती रहती है। आजकल बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम भी एक बड़ा कारण है। आमतौर पर हम एक मिनट में 15-20 बार पलक झपकाते हैं, जिससे आंखें नम बनी रहती हैं। लेकिन मोबाइल या लैपटॉप देखते समय यह संख्या घटकर लगभग 5-7 बार रह जाती है, जिससे आंखें जल्दी सूखने लगती हैं और इसके कारण कई बार ड्राई आई सिंड्रोम भी हो सकता है।

यूवी रेज का आंखों पर प्रभाव

गर्मियों में यूवी किरणें भी अधिक तेज होती हैं, जो सीधे और परावर्तित होकर आंखों तक पहुंचती हैं। लंबे समय तक इनका असर आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कांटेक्ट लेंस पहनने वाले लोगों के लिए यह मौसम और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है, क्योंकि सूखी आंखों में लेंस असहज लगते हैं और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

किन लक्षणों को न करें इग्नोर

आँखों से जुड़े लक्षणों को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है, ताकि समस्या बढ़ने से पहले ही उसे संभाला जा सके। ड्राई आईज के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -

  • बीच-बीच में धुंधला दिखना।
  • जलन या चुभन महसूस होना।
  • आंखों से पानी आना (जो अक्सर सूखेपन की प्रतिक्रिया होती है)।
  • रोशनी से दिक्कत होना।

अगर आंखों में एलर्जी हो गई है, तो उसके लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं -

  • लगातार खुजली होती है।
  • आंखें लाल हो जाती हैं।
  • पलकों में हल्की सूजन आ सकती है।
  • बाहर जाने पर समस्या और बढ़ने लगना।

अगर लक्षण ज्यादा गंभीर हों जैसे लगातार दर्द, ज्यादा लालिमा, गाढ़ा डिस्चार्ज या नजर में बदलाव तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

एक्सपर्ट्स की सलाह

हाइड्रेशन और सही डाइट - पर्याप्त पानी पीना सबसे आसान और असरदार तरीका है। दिन में लगभग 3-4 लीटर पानी शरीर और आंखों दोनों के लिए जरूरी है। इसके साथ ही, ओमेगा-3 (मछली, अखरोट) और विटामिन । (गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियां) आँखों की सेहत को बेहतर बनाए रखते हैं।

सनग्लास का सही चुनाव क्यों जरूरी है - अक्सर लोग केवल काले या डार्क सनग्लास पहन लेते हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं होता। जरूरी यह है कि चश्मा UV400 प्रोटेक्शन वाला हो, जो हानिकारक यूवी हैं और यूवीबी किरणों को रोक सके।

स्क्रीन टाइम को समझदारी से मैनेज करें - डिजिटल स्क्रीन से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन सही आदतें मदद कर सकती हैं। 20-20-20 नियम अपनाएं, हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।

पलक झपकाने की आदत डालें - अपनी आंखों को हेल्दी रखे के लिए कई बार जानबूझकर पलक झपकाने से आंखों की नमी बनी रहती है।

आई ड्रॉप्स का सही इस्तेमाल - जरूरत पड़ने पर लुब्रिकेंट (Artificial Tears) ड्रॉप्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जो आंखों को नमी देते हैं। हालांकि, किसी भी ड्रॉप का नियमित इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

कॉन्टैक्ट लेंस उपयोग करने वालों के लिए टिप्स

  • गर्मियों में लेंस पहनने का समय कम रखें।
  • रोजाना डिस्पोजेबल लेंस बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
  • सोते या तैरते समय लेंस न पहनें।
  • लेंस लगाने और निकालने से पहले हाथों की सफाई का खास ध्यान रखें।
  • आंखों की सही सफाई।
  • आंखों को हल्के पानी से साफ करना ठीक है, लेकिन बार-बार या जोर से धोना नुकसान पहुंचा सकता है।
  • आंखों को रगड़ने से एलर्जी बढ़ सकती है और आंखों की सतह को नुकसान हो सकता है।
  • ऐसी गलतफहमियां जो नुकसान पहुंचाती हैं।

गर्मियों में आंखों की देखभाल को लेकर कई गलत धारणाएं हैं जैसे -

  • लाल आंखों के लिए मिलने वाले ड्रॉप्स को रोज इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं होता।
  • बार-बार आंख धोना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
  • सिर्फ डार्क सनग्लास पहनना पर्याप्त नहीं है, यूवी प्रोटेक्शन जरूरी है।
  • हर लाल आंख को “गर्मी का असर” समझ लेना गलत हो सकता है।
  • खास तौर पर, बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड ड्रॉप्स का इस्तेमाल गंभीर साइड इफेक्ट्स दे सकता है, जैसे आंखों का प्रेशर बढ़ना।

लंबे समय तक आंखों को स्वस्थ कैसे रखें

गर्मी का मौसम भले ही आंखों के लिए चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन इसी दौरान अपनाई गई अच्छी आदतें लंबे समय तक फायदा देती हैं। नियमित आंखों की जांच बहुत जरूरी है, क्योंकि कई गंभीर समस्याएं जैसे ग्लूकोमा शुरुआत में बिना लक्षण के होती हैं। समय पर जांच और सही देखभाल से आंखों की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।