
अश्वगंधा तनावजन्य रोगों की एक अचूक औषधि Publish Date : 09/05/2026
अश्वगंधा तनावजन्य रोगों की एक अचूक औषधि
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
अश्वगंधा में रोग निवारण और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए अपूर्व शक्ति है। इसी कारण सदियों से आयुर्वेद में अश्वगंधा को एक चमत्कारिक औषधि का स्थान प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अश्वगंधा की तुलना चीन की बहुचर्चित औषधि ‘जेनसिंग’ से की जा सकती है। अश्वगंधा भारत में सरलता से सर्वत्र उपलब्ध है। अश्वगंधा तनाव जनित रोगों को भी दूर करने में बेहद कारगर है।

अश्वगंधा का क्षुप (एक छोटा पौधा) 2 से 5 फुट ऊँचा होता है। इसकी शाखाएं गोलाकार और चारों तरफ फैली होती हैं। शरद ऋतु में इस पौधे पर फूल आते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा कफ, वात नाशक, बल-वीर्य वर्धक और मानसिक तनावजन्य रोगों की श्रेष्ठ औषधि है। अश्वगंधा के कुछ लाभप्रद प्रयोग-नुस्खे इस प्रकार हैं:-
- आयु व आवश्यकता के अनुसार अश्वगंधा का चूर्ण 3 से 10 ग्राम प्रतिदिन सुबह-शाम. गर्म दूध से सेवन करना चाहिए। यह नुस्खा शारीरिक कमजोरी, धातुक्षीणता, स्नायुविक दुर्बलता, अनिद्र तथा मानसिक तनाव को दूर करने में विशेष लाभप्रद है।
- बच्चों के सूखा रोग (रिकेट्स) में अश्वगंधा का प्रयोग सदियों से किया जाता रहा है।
- क्षय रोग रोग (टीबी) के उपचार में अश्वगंधा लाभप्रद औषधि है।
- प्रसव उपरांत आयी दुर्बलता को दूर करने में भी अश्वगंधा उपयोगी है।
- चेन्नई के डॉ0 के. राजन द्वारा की गई एक शोध के अनुसार अश्वगंधा आयुवर्धक और रक्तवर्धक है।
- जोड़ों की सूजन व शरीर की किसी ग्रंथि की सूजन में अश्वगंधा के पत्तों का लेप लाभकारी है।
- अश्वगंधा के पौधे का ताजा रस 10 से 30 मि.ली. शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें। यह नुस्खा गठिया वात (गाउट) लाभकारी है।
- अश्वगंधा व तिल चूर्ण को समान मात्रा में मिलाएं। फिर इस मिश्रण को 3 से 5 ग्राम प्रतिदिन गुड़ के साथ सेवन करें। यह नुस्खा स्त्री रोगों को दूर करने में सहायक है।
- अश्वगंधा चूर्ण और गिलोय को समान मात्रा में मिलाएं। प्रतिदिन सुबह-शाम 3 से 6 ग्राम मात्रा में इसे गर्म जल के साथ सेवन करें। यह नुस्खा पुराने बुखार को दूर करने में लाभप्रद है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
