
हलासन का नियमित अभ्यास करने से होगा बेहतर स्वास्थ्य Publish Date : 07/04/2026
हलासन का नियमित अभ्यास करने से होगा बेहतर स्वास्थ्य
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
योग की प्राचीन परम्परा में प्रत्येक मुद्रा को आसन का नाम दिया गया है। इन आसनों नाम आमतौर पर उस आकृति पर आधारित होते हैं, जिस प्रकार से हमारे शरीर की आकृति बनती है। इन्हीं सब आसनों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण एवं प्रभावशाली आसन है ‘‘हलासन’’।
हलासन शब्द, दो शब्दों ‘हल’ और ‘आसन’ से मिलकर बना है। हल जो कि भारतीय कृषि में उपयोग किए जाने वाला एक पारम्परिक उपकरण है, जिससे किसान अपने खेतों को जोतते हैं। ऐसे में जब यह आसन पूरी तरह से किया जाता है तो हमारे शीर की आकृति भी इसी हल के आकार की बन जाती है। इसलिए इस आसन को हिन्दी में हलासन और अंग्रेजी में फ्लो पोज के नाम से जाना जाता है।

इस आसन को पूरी तरह से करने के लिए हमारे शरीर का पर्याप्त रूप से लचीला होना बहुत जरूरी होता है। आरम्भ में लोग इस आसन को पूरी तरह से नहीं कर पाते हैं, लंकिन प्रतिदिन अभ्यास करने से धीरे-धीरे शरीर में लचीलापन आने लगता है। इस प्रकार से जब यह आसन आधा किया जाता है तो इसे ‘अर्धहलासन’ के नाम से जाना जाता है।
आयुष मंत्रालय के द्वारा भी हलासन को एक उन्नत योगासन बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार, हलासन का नियमित अभ्यास करने से हमारे शरीर के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में व्यापक सुधार देखने को मिलता है। इस आसन का नियमित रूप से अभ्यास करने से हमारे शरीर के गर्दन, कंधे, पीठ और मांसपशियाँ आदि मजबूत बनते हैं। इसके साथ ही इस आसन का अभ्यास करने से हतारी रीढ़ की हड्डी में लचीलापन, थायराइड ग्रन्थि की उत्तेजना, पाचन क्रिया में व्यापक सुधार और थकान एवं तनाव के स्तर कम करने में लाभकारी सिद्व होता है।
हालांकि, आरम्भ में इस आसन का अभ्यास किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना उचित रहता है। इस आसन को करने से हमारी मांसपेशिया मजबूत होती है और हमारे तंत्रिका तंत्र (न्यूरो सिस्टम) को भी स्वस्थ बनाए रखता है। इसके साथ ही यह हमारे शरीर की थकान और तनाव के स्तर को भी कम करने में सहायता प्रदान करता है, जिससे हमे मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त, हलासन थायराइड ग्रन्थि के कार्य को भी बेहतर बनाता है, हमारे शरीर की यह ग्रन्थि हमारे मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को नियंत्रित करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हलासन हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि कि इम्यून सिस्टम को भी सुदृढ़ता प्रदान करता है, जिसके चलते हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसके साथ ही हलासन का नियमित अभ्यास करने से हमारा पाचन तंत्र भी बेहतर कार्य करता है और हमारे शरीर में ऊर्जा का संचार नियमित बना रहता है।
गर्भवती महिलाओं, हाई ब्लड प्रेशर या गर्दन और पीठ दर्द आदि की समस्याओं से जुझ रहे लोगों को हलासन का अभ्यास करने से बचना चाहिए। आम लोगों को भी इस आसन की शुरूआत किसी योग विशेषज्ञ की निगरानी और सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
