सोरायसिस के लिए आयुर्वेदिक उचित आहार व्यववस्था      Publish Date : 26/03/2026

सोरायसिस के लिए आयुर्वेदिक उचित आहार व्यववस्था

                                                                                        डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

सोरायसिस त्वचा से जुड़ी एक बीमारी है। सोरायसिस रोग में त्वचा के ऊपर लाल धब्बा या पपड़ी-सी बन जाती है। पपड़ी में खुजली होती है। सोरायसिस की बीमारी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के कमजोर होने के कारण होती है। सोरायसिस के कारण रोगी को आम जीवन से संबंधित अनेक तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी सोरायसिस से पीड़त हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सोरायसिस का इलाज कराने के साथ-साथ सोरायसिस के लिए डाइट प्लान को अपनाकर आप बीमारी पर उचित नियंत्रण पा सकते हैं।

सोरायसिस रोग में क्या खाएं

सोरायसिस से ग्रस्त लोगों का आहार ऐसा होना चाहिएः-

अनाज: पुराना चावल, गेहूं, जौ आदि।

दाल: अरहर, मूंग, मसूर दाल आदि।

फल एवं सब्जियां: सहजन, टिण्डा, परवल, लौकी, तोरई, खीरा, हरिद्रा, लहसुन, अदरक, अनार, जायफल आदि।

अन्य: अजवाइन, शुंठी, सौंफ, हिंग, काला नमक, जीरा, लहसुन, गुनगुना पानी का सेवन करें।

सोरायसिस रोग में क्या ना खाएं

सोरायसिस से ग्रस्त लोगों को इनका सेवन नहीं करना चाहिएः-

अनाज: नया धान, मैदा आदि।

दाल: चना, मटर, उड़द आदि।

फल एवं सब्जियां: पत्तेदार सब्जियाँ, सरसों, टमाटर, बैंगन, नारंगी, नींबू, खट्टे अंगूर, आलू, कंददृमूल आदि।

अन्य: दही, मछली, गुड़, दूध, अधिक नमक. कोल्ड्रिंक्स, संक्रमित/फफूंदी युक्त भोजन, अशुद्ध एवं संक्रमित जल आदि।

सख्त मना: तैलीय मसालेदार भोजन, मांसहार और मांसाहार सूप, अचार, अधिक तेल, अधिक नमक, कोल्डड्रिंक्स, मैदे वाले पर्दाथ, शराब, फास्टफूड, सॉफ्टडिंक्स, जंक फ़ूड, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, तला हुआ एवं कठिनाई से पाचन वाला भोजन आदि।

विरुद्ध आहार: मछली + दूध

सोरायसिस की बीमारी में आपकी जीवनशैली

सोरायसिस की बीमारी में आपकी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-

  • दिन में न सोएं।
  • भोजन के बाद टहलें।
  • पहले वाला भोजन पचे बिना न खाएं।
  • हल्का व्यायाम करें।
  • तनाव मुक्त जीवनशैली जीने की कोशिश करें।
  • त्वचा को सूखा रखने की कोशिश करें।
  • सूरज की तेज रोशनी से त्वचा की रक्षा करें।
  • गुस्सा, डर, और चिंता न करें।
  • पेशाब और शौच को न रोकें।
  • आसमान में बादल होने पर ठंडे जल का सेवन करें।
  • पूर्वी हवाओं का अत्यधिक सेवन करें।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।