
बच्चेदानी में गांठः आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 25/03/2026
बच्चेदानी में गांठः आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
आजकल बच्चेदानी में गांठ की समस्या का सामना लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को करना पड़ रहा है। लेकिन ज्यादातर भारतीय महिलाएं इसे अनदेखा कर देती हैं। तेजी से बढ़ती इस समस्या के कारण महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और उन्हें गर्भधारण में भी कठिनाई का समाना करना पड़ सकता है। आज की अपनी इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से हम अपने आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से जानेंगे की फाइब्रॉइड क्या होते हैं? बच्चेदानी में गांठ होने के लक्षण क्या हैं और बच्चेदानी में गांठ का घरेलू उपचार कैसे किया जा सकता है?
बच्चेदानी में गांठ (यूट्रस में गांठ) होने पर क्या समस्या होती हैं?
गर्भाशय की मांसपेशियों में बढ़ने वाला यह ट्यूमर मरीज के पेट के निचले हिस्से में दर्द का कारण बन सकता है। इसकी वजह से मरीज को बार बार पेशाब आ सकता है और जो महिलाएं माँ बनना चाहती हैं, उन्हें गर्भधारण में कठिनाई भी हो सकती है। बच्चेदानी में गांठ होने पर अधिकतर महिलाओं को यही लगता है कि बिना सर्जरी यह ठीक नहीं हो पाएगा लेकिन यहाँ बच्चेदानी में गांठ के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बात करेंगे।

बच्चेदानी में गांठ (यूट्रस में गांठ) का सफल घरेलु उपचार
त्रिफलाः नियमित रूप से सुबह खाली पेट में त्रिफला का सेवन करने से यूट्रस में गांठ के लक्षण कम होते हैं। त्रिफला तीन फलों के मिश्रण से बनता है - आँवला, हरड़ और बहेड़ा। इसको हल्के गुनगुने पानी में मिलाकर लेने से शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
कैस्टर ऑयल पैकः आयुर्वेद में अरंडी के तेल को बहुत ही असरदार औषधि के रूप में जाना जाता है। आप एक सूती कपडे को तेल में भिगोकर उसे अपने पेट के निचले हिस्से पर रखें। एक गर्म पानी की बोतल लेकर उसे भी अपने पेट पर करीब 30-40 मिनट के लिए डालें। ऐसा करने से बच्चेदानी में गांठ के आकार में कमी आती है।
अशोक छाल का काढ़ाः आयुर्वेद में अशोक की छाल का काढ़ा बनाकर पीना भी बहुत यूट्रस में गांठ के उपचार में असरदार माना जाता है। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है उन्हें यह काढ़ा जरूर पीना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड फ्लो सही बना रहता है। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा पेट दर्द होता है या अनियमित पीरियड्स की समस्या रहती है उनके लिए भी यह औषधि बहुत लाभदायक होती है।
हल्दी वाला दूधः हल्दी एक प्रभावशाली आयुर्वेदिक औषधि है, जिसमे करक्यूमिन नामक तत्व मौजूद होता है जो कि सूजन को कम करती है। इसके लिए मरीज प्रतिदिन रात में हल्के गुनगुने दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पीने से बच्चेदानी की गांठ ठीक हो सकती है।
अलसी के बीजः बच्चेदानी में गांठ का एक कारण हॉर्माेन असंतुलन भी है, जो अलसी के सेवन से कम हो सकता है। मरीज, अलसी पाउडर को पानी या दही के साथ ले सकते हैं, इससे बिना किसी सर्जरी बच्चेदानी में गांठ से राहत पा सकते हैं।
बच्चेदानी में गांठ के लिए पंचकर्म उपचार
आयुर्वेद की पंचकर्म थेरेपीः आयुर्वेद में पंचकर्म थेरेपी को बच्चेदानी की गांठ के लिए बहुत असरदार माना जाता है। इसकी मदद से शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर दोषों को संतुलित करने में मदद मिलती हैं और शरीर की शुद्धि होती हैं। अगर किसी विशेषज्ञ की निगरानी में वमन, विरेचन और बस्ती करवाते हैं तो यह समस्या 3 महीने में ठीक हो सकती है और मरीज प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने के योग्य हो सकती हैं।
बच्चेदानी में गांठ होने पर क्या परहेज करना चाहिए?
बच्चेदानी में गांठ होने पर आपको चीनी, जंक फ़ूड, प्रोसेस्ड फ़ूड, ज्यादा कैफीन, शराब, आदि से परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे सूजन बढ़ सकती है।
किस विटामिन की कमी से गांठ होती है?
बच्चेदानी में गांठ का मुख्य कारण विटामिन बी 9 या बी 12 की कमी होना होता है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
