अल्काइन वॉटरः फिटनेस और स्वाथ्य की स्थिति      Publish Date : 22/03/2026

अल्काइन वॉटरः फिटनेस और स्वाथ्य की स्थिति

                                                                                               डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

‘‘अभी तक माना जाता है कि सेहत के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन का बहुत आवश्यक होता है, किन्तु वर्तमान समय में अधिक पीएच वाले अल्काईन वॉटर के सेवन करने की सलाह दी जा रही है। युवाओं और फिटनेस के चाहने वाले लोगों में इसका चलन काफी तेजी के साथ बढ़ा है। ऐसे में यह सवाल उठना भी जरूरी है कि क्या बवास्तव में इस विशेष पानी की आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति के लिए है।इसके सम्बन्ध में मानव शरीर का पीएच विज्ञान क्या कहता है? ऐसे में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर आपको बता रहे हैं अल्काईन वॉटर की आवष्यकता के बारे में छोटी-बड़ी सब बातें’’-

दोस्तों अगर आज के समय परिदृश्य में बात की जाए तो आजकल हमारी डाइट का स्वरूप मुख्य रूप से ‘अम्लीय’ अर्थात एसिडिक हो चुका है। ऐसे में अत्याधिक मात्रा में प्रोसेस्ड और डिब्बा बंद सामग्रियों का सेवन करने के परिणाम स्वरूप  हमारे शरीर में टॉक्सिन्स की मात्रा काफी बढ़ जाती है, जो कि सूजन एवं अन्य विभिन्न प्रकार के रोगों का कारण बनते हैं।

जब हम जंक फूड का सेवन कम या अधिक मात्रा में करते हैं तो हमारा शीर उस जंक फूड रूपी कचरे से निपटने के लिए अधिक एसिड का निर्माण करता है, जिससे हमारे पेट का पीएच (पोटैंशियल ऑफ हाइड्रोजन) का संतुलन बिगड़ जाता है। इस स्थिति से पार पाने के लिए ही आजकल अल्काईन (क्षारीय प्रकृति) की अधिकता युक्त खान-पान की सामग्री का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इस प्रकार अल्काईन वॉटर भी इन्हीं चीजों में से एक है।

पीएच का गणितः

मानव के शरीर का पीएच लेवल 0 से 14 के बीच होता है, जिसमें 7 पीएच लेवल को ‘न्यूट्रल’ माना जाता है। पीएच के 7 से ऊपर के स्तर को क्षारीय (अल्काईन) होने का संकेत माना जाता है, जबकि 7 से कम पीएच लेवल को अम्लीय (एसिडिक) होने का संकेत माना जाता है।। ऐसे में जब हमारे शीर कापीएच अलईन होता है तो हमारा शरीर कुशलतापूर्वक कार्य करता है, तो वहीं जब हमारे शीरी का पीएच स्तर एसिडिक होता है तो हमारा शरीर रोगों का घर बन जाता है। जब शरीर कापीएच स्तर कम होता है तो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, दिमागी स्मॉग, पाचन से सम्बन्धित समस्याएं (जलन और गैस इत्यादि) एवं वजन के बढ़नें के जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

कभी-कभी यह अनिंद्रा, किडनी की समस्या और ब्लड शुगर के असंतुलन जैसे गम्भीर मुद्दों का कारण भी बन सकता है। इसी कारण के चलते ताजे फल, हरी सब्जियाँ और जूस आदि के जैसी अल्काईन डाईट का लेना बहुत अधिक आवश्यक और महत्पूर्ण हो जाता है।

क्या अल्काईन वॉटर वास्तव में प्रभावकारी होता है?

                                

अल्काईन वॉटर का विचार सुनने में बहुत वैज्ञानिक प्रतीत होता है कि उच्च पीएच युक्त पानी का सेवन करने से हमारा शरीर भी अल्काईन हो जाएगा, लेकिन सच तो यह है कि हमारा शरीर अपने पीएच के स्तर को स्वयं ही बहुत ही कड़ाई के साथ नियंत्रित करने में सक्षम होता है। ऐसे में आप जो भी पानी पीते हैं, उसका इसके संतुलन पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है।

हालांकि कुछ शोध परिणाम स्पष्ट करते हैं कि यह पानी एसिड रिफ्लेक्स के लक्षणों से राहत प्रदान करने में सहायता कर सकता है। ऐसे में यदि आपको अल्काईन वॉटर का सेवन करना पसंद है तो आप इसे सेवन कर सकते हैं। सामान्यतौर पर भी यह सुरक्षित ही माना जाता है। परन्तु वास्तव में विषैले तत्वों को शरीर से बाहर करने, वजन को कम करने एवं रोगों से बचाने के लिए यह कोई जादुई पानी नहीं होता है।

ध्यान रखने योग्य कुछ बातें- बहुत अधिक नींबू डालकर पानी पीने से आपके एसिड रिफ्ेक्स के लक्षण बढ़ सकते हैं। लम्बे समय तक बेकिंग सोडा युक्त पानी पीना भी शरीर के लिए सुक्षित नहीं माना जाता है। इसी प्रकार सेब का सिरका भी अम्लीय प्रकृति का होता है।

क्या खाएं और क्या नहीं?

नीबू का कमाल

नीबू पीएच स्तर 2 से 2.3 के बीच होने के कारण इसे एसिडिक श्रेणी में रखा जाता है। परन्तु नींबू अम्लीय होते हैं, लेकिन शरीर में जाने के बाद क्षारीय प्रभाव उत्पन्न करते हैं। गर्म पानी के साथ लेना शरीर को डिटॉक्स करने और सेल्युलर (वचा के नीचे जमा जिद्दी चर्बी को कम करने में मदद कर सकता है। ऐसे में सुबह उठते ही गुनगुने पानी के साथ नींबू का सेवन करें। नींबू में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स विशेष रूप से विटामिन सी, लिवर को पाचक एंजाइम बनाने में मदद करता है। इससे हमारा पाचन तंत्र बेहतर ढंग से काम करता है। इस पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जो कि हमें डिहाइड्रेश की समस्या से बचाते हैं।

खूब खाएं फल-सब्जियाँ

  • सेब, केला ओरेंज, अंगूर, तरबूज नींबू एवं नाशवती आदि का सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
  • पालक के जैसी हरी पत्तेदार सब्जियाँ, खीरा, करेला और बैंगन जैसी सब्जियों का सेवन अधिकता से करें।
  • जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

इनका सेवन करने से बचें

  • डिब्बाबंद एवं जंक फूड आदि से दूरी बनाकर रखना चाहिए। कृत्रिम रूप से पकाए गए फल और सब्जियों का सेवन न करें जैसे कि कोल्ड स्टोरेज में रखे गए आलू भी अत्लीय प्रकृति के हो जाते हैं। इसलिए ताजे फल एवं सब्जियों के सेवन को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • बहुत अधिक मसाले वाले भोजन एवं सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन करने से बचें, क्योकि इनका पीएच लगभग 3.4 होता है जो कि बहुत अधिक अम्लीय होता है।
  • खाना खाने के समय या खाने के बाद कोल्ड ड्रिंक्स का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हमारे शरीर के पाचक एंजाइम्स 37 डिग्री के तापमान पर बेहतर ढंग से कार्य करते हैं। शीतल पेय पदार्थें का सेवन करने से हमारे पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है और इससे भोजन सही तरीके से नहीं पचता है।
  • ब्हुत अधिक शराब का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • धूम्रपान को एकदम छोड़ देना चाहिए, क्योंकि निकोटिन एवं कैफीन दोनों ही हमारे शरीर की अम्लता को बढ़ाते हैं। 

किसी होड़ में न फंसें, शरीर की जरूरत समझें

अल्काईन के नाम पर फैली गलत धारणाओं में न फसें। हर समय बहुत पीएच (10 से ऊपर) वाला पानी पीना या पूरी तरह से उसके ऊपर ही निर्भर होना आपके पाचन तंत्र को कुप्रभावित कर सकता है या खनिज के अवशोषण में बाधा डाल सकता है। इससे कुछ मामलों में झुनझनी, जी मिचलाना या पेट की ऐंठन की समस्या हो सकती है। त्वचा या किडनी रोग विशेषज्ञ कीसलाह पर ही ऐसा करें। अगर आप क्रॉनिक एसिड रिफ्लेक्स के रोगी है या फिर एक खिलाड़ी है, जिन्हें तुरंत ही हाईड्रेशन या ताजगी की आवश्यकता है तो आप इसका सेवन कर सकते हैं। अन्य मामलों में आप सामान्य पानी का सेवन करते रहें और पूरी तरह से इस पर निर्भर होने से बचें।

सेहत की बेहतरी के लिए जरूरी है कि आप पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करते रहें अच्छे पाचन के लिए साबंत अनाल से प्राप्त होने वाले खनिजों पर अधिक ध्यान दें।

घर पर ही तैयार करें अल्काईन वॉटर:

खीरा-पुदीना वाला पानी (शीतल और आरामदायक)

तैयार करने की विधिः एक लीटर पानी में खीरे के 5-6 पीस और कुछ पत्तियाँ पुइीने की डालकर रख दें और इस प्रकार से बने पानी का दिनभर सेवन करते रहें।

लाभः शरीर को आवश्यक नमी प्रदान करता है। पेट के भारीपन और अफारे आदि की समस्या में राहत प्रदान करता है। इसके अलावा यह एसिडिटी की समस्या से राहत प्रदान करता है और शरीर को शीतलता भी प्रदान करता है।

अदरक वाला पानी (सूजनरोधी पानी)

विधिः ताजे अदरक के कुछ टुकड़े एक लीटर पानी में उबाल कर इस पानी का सेवन गुनगुनी अवस्था में ही करना चाहिए।

लाभः इस पानी का सेवन करने से पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है और साथ ही एस्डि रिफ्लेक्स की समस्या में भी राहत प्राप्त होती है। हालांकि इस पानी का सेवन कम मात्रा में करना ही श्रेयकर होता है।

सौंफ का पानी (पाचन के लिए बेहतर)

विधिः एक लीटर पानी में एक चम्मच सौंफ को रातभर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह के समय इस पानी को हल्का सा उबालकर ठण्ड़ा करके इसका सेवन करें।

लाभः एसिडिटी, गैस और जलन आदि की समस्याओं से राहत प्राप्त होती है।

जीरा पानी (पाचन क्रिया को बढ़ावा)

विधिः एक लीटर पानी में एक चम्मच जीरा को उबालकर इसे ठण्ड़ करके थोड़ा-थोड़ा सेवन करें।

लाभः पाचन क्रिया में लाभ और पेट के भारीपन की समस्या को कम करता है।

नारियल पानी और सादा पानी मिक्स (इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन)

विधिः आधा कप नारियल का पानी और आधा कप सादा पानी मिलाकर इसका सेवन करें।

लाभः पोटेशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है जो शरीर को हाईड्रेट बनाए रखता है।

तुलसी का पानी (सूजन रोधी पानी)

विधिः एक लीटर पानी में 5-6 पत्ती तुलसी की डालकर इसे कुछ घण्टों के लिए रख दें। बा में इस पानी का सेवन करें।

लाभः तुलसी का पानी सूजन को कम करने में सहायता करता है। इसके साथ ही यह पानी पेट और गले के लिए विश्ेष रूप से आरामदायक होता है।

चिया के बीज का पानी (आँत के लिए लाभदायक):

विधिः एक गिलास पानी में ण्क चम्मच चिया सीड्स को 15-20 मिनट तक भिगोकर रखें, इसके बाद बीज सहित इस पानी का सेवन करें।

लाभः फाइबर से भरपूर यह पानी आँत एवं उनकी क्रिया को बेहतर बनाता है। इसका सेवन करने से पेट भरा हुआ महसूस होता है जिससे वजन भी कम होता है। 

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।