
फंगल इन्फेक्शन के लिए आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 21/03/2026
फंगल इन्फेक्शन के लिए आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
फंगल इन्फेक्शन जिसे माइकोसिस भी कहते है, एक त्वचा का विकार है, जो जीवन में लगभग हर व्यक्ति एक न एक बार जरूर महसूस करता है। फंगल इन्फेक्शन प्रत्येक वर्ष दुनिया के करोड़ों व्यक्तियों को अपना शिकार बनाता है, यदि केवल भारत की ही बात करें तो भारत में हर साल फंगल इन्फेक्शन से ग्रसित 10 लाख नए मरीज बढ़ जाते है। फंगल इन्फेक्शन एक संक्रमण रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में काफी तेजी से फ़ैल सकता है। किसी फंगल संक्रमित व्यक्ति से सीधे संपर्क से आपको भी फंगल इन्फेक्शन की शिकायत हो सकती है। फंगल इन्फेक्शन मुख्यतः उन वस्तुओ से फैलती है जो फंगल इन्फेक्शन से ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आई हो या फिर उस संक्रमित व्यक्ति ने उन वस्तुओ का इस्तेमाल किया हो, जैसे कंघी, साबुन, तौलिया, कपड़े, रुमाल इत्यादि वस्तुओ से फंगल इन्फेक्शन फ़ैल सकता है।

हालांकि फंगल इन्फेक्शन साफ़ सफाई में न रहने से, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता से और खराब लाइफस्टाइल से भी हो सकता है। फंगल इन्फेक्शन को कुछ आसान घरेलू नुस्खों और उपायों से ठीक किया जा सकता है, घरेलू नुस्खों और उपायों का उल्लेख आपको हमारे इस लेख से जानने को मिलेगा-
आखिर यह फंगल इन्फेक्शन है क्या?
फंगल इन्फेक्शन फंगस द्वारा होने वाला एक संकम्रण है जो मुख्य रूप से त्वचा को अपना शिकार बनाता है। फंगस त्वचा के अतिरिक्त पूरे शरीर को भी प्रभावित कर सकता है। फंगस की कई प्रजातियां होती है जो धूल, पौधों और व्यक्ति से व्यक्ति को फैलती है। खराब जीवन शैली और साफ़ सफाई में न रहना फंगल इन्फेक्शन होने का मुख्य कारण है।
यदि शरीर के अलग-अलग अंगों में फंगल इन्फेक्शन हो तो फंगल इन्फेक्शन के लक्षण हर स्थान के लिए अलग-अलग होंगे। फंगल इन्फेक्शन अधिकतर त्वचा के लाल पड़ने और हलकी खुजली से शुरू होता है। रैशेस पड़ना, खुजली होना और संक्रमित हिस्से में जलन सी होना फंगल इन्फेक्शन के सबसे आम लक्षण है।
फंगल इन्फेक्शन के लक्षण:
फंगल इन्फेक्शन से संक्रमित व्यक्ति निम्नलिखित लक्षणों को अनुभव करता है:-
- संक्रमित हिस्से में काफी खुजली होना।
- शुष्क और रूखी त्वचा होना।
- प्रभावित हिस्सा लाल पड़ना।
- छोटे-छोटे दाने होना।
- हल्की सूजन सी होना।
- प्रभावित हिस्से में सफ़ेदपन पड़ना।
- शरीर के अन्य हिस्सों में फंगस का फैलना।
- गोलाकार दाद होना।
फंगल इन्फेक्शन कितने प्रकार के होते है?
फंगल इन्फेक्शन मुख्यतः चार प्रकार के होते है-
- एथलीट फुट
- दाद या रिंगवॉर्म फंगल इन्फेक्शन
- जॉक खुजली
- यीस्ट इन्फेक्शन
फंगल इन्फेक्शन के कारण:

- कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता।
- किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से।
- आपके चारो-ओर प्रदुषण होने से।
- कंस्ट्रक्शन कार्य के चलने से।
- कंघी, साबुन, रेजर इत्यादि दूसरे किसी व्यक्ति के इस्तेमाल से।
- मौसम के अत्यधिक गर्म या अत्यधिक ठंडा होने से।
- रूखी त्वचा से।
- गंदे ओर प्रयोग में आये हुए कपड़े पहन ने से।
- टाइट कपड़े पहन ने से।
- ओबेसिटी या अत्यधिक मोटापे से।
- तनाव पूर्ण जीवन जीने से।
- हार्मोनल बदलावों से।
फंगल इन्फेक्शन उपचार के उपाय:
- अपने शरीर को साफ़ रखे।
- नहाने के तुरंत पश्चात अपने शरीर को अच्छी तरह से सूखा ले।
- रोजाना स्नान अवश्य करें।
- ढीले, कम्फ़र्टेबल कपड़े पहने।
- टाइट कपड़े न पहने।
- सूती के कपड़े पहने।
- प्रभावित हिस्से में नारियल का तेल लगाए।
- दही का सेवन करें।
- केले, बेरीज इत्यादि का सेवन करें।
- शैम्पू व साबुन को बदले।
- प्रभावित हिस्से को गर्म पानी ओर साबुन से दिन में कम से कम 3 से 4 बार धोये।
- प्रभावित हिस्से को सूखा रखे।
फंगल इन्फेक्शन को ठीक करने के घरेलू उपचार:

सरसों के बीज का पाउडर और पानी:
- दो चम्मच सरसों के बीज का पाउडर लेकर उसमें थोड़ी सी मात्रा में पानी मिलाकर उसका पेस्ट बना ले।
- उपयोग करने का तरीका: इस पेस्ट को अपने प्रभावित हिस्से में रोजाना तब तक लगाए जब तक फंगल इन्फेक्शन खत्म न हो जाये।
लहसुन और शहद
- लहसुन की कुछ बालियाँ लेकर उसको बारीक पीस ले।
- दो चम्मच लहसुन का पेस्ट लेकर उसमे एक चम्मच शहद अच्छी तरह मिला ले।
- त्वचा के प्रभावित हिस्से में लहसुन और शहद का पेस्ट लगाए और सूखने तक लगा रहने दे। सूखने के पश्चात उसे शांत जल से धो ले।
बेकिंग सोडा और पानी
- थोड़ा सी पानी की मात्रा लेकर बेकिंग सोडा के साथ उसका पेस्ट बना ले।
- पेस्ट बनाने के पश्चात इस पेस्ट को अपने फंगल इन्फेक्शन प्रभावित हिस्से में लगा ले और 20 से 25 मिनट तक लगा रहने दे तत्पश्चात इसको गुनगुने पानी से धो ले।
टी ट्री आयल
- फंगल इन्फेक्शन प्रभावित हिस्से में टी ट्री आयल को धीरे-धीरे लगाए। यह तेल दाद व खुजली के लिए काफी प्रभावी है।
सेब का सिरका
- सेब के सिरके की कुछ बुंदे लेकर उसे फंगल इन्फेक्शन प्रभावित हिस्से में लगाए, सेब के सिरके में एसिड होता है यह इन्फेक्शन उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया को खत्म कर देता है।
पानी से भरा टब और नमक
- एक टब गर्म पानी से भरा लीजिये और उसमें थोड़ा सा नमक अच्छी तरह घोल लीजिये।
- अच्छी तरह घोलने के पश्चात गुनगुने नमकीन पानी से भरे टब में प्रभावित हिस्से को डाल ले और कुछ देर तक रहने दे।
कच्ची हल्दी और पानी
- एक कच्ची हल्दी का टुकड़ा लेकर उसको छोटे-छोटे टुकड़ों में काट ले और उसमें थोड़ा सा पानी डालकर उसको ब्लेंड कर ले। इन उत्पादों को तब तक पिस्से जब तक इसका उत्तम पेस्ट न बन जाये।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
