
बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 21/02/2026
बवासीर का आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
बवासीर का आयुर्वेदिक इलाज मुख्य रूप से पाचन क्रिया को सुधारने, कब्ज दूर करने और सूजन कम करने पर केंद्रित है। इसके उपचार में अर्शकल्प वटी, त्रिफला चूर्ण, और एलोवेरा जूस के साथ फाइबर युक्त आहार (अंजीर, अलसी), भरपूर पानी और छाछ का सेवन शामिल है। यह समस्या के मूल कारण (कब्ज) को ठीक कर बवासीर की समस्या से राहत प्रदान करता है।
बवासीर का प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार
प्रमुख आयुर्वेदिक दवाएंः पतंजलि अर्शकल्प वटी बवासीर के उपचार के लिए एक बहुत कारगर औषधि है, जो सूजन और दर्द में राहत देती है। इसके अलावा, अर्श कुठार, अभयारिष्ट और त्रिफला आदि का उपयोग भी किया जाता है।
बवासीर घरेलू और प्राकृतिक उपायः
एलोवेराः
सूजन और खुजली को कम करने के लिए एलोवेरा जेल को गुदा के बाहरी मस्सों पर लगाएं या 20-30 मिली खाली पेट इसका जूस का सेवन करें।
छाछः छाछ में सेंधा नमक और भुना जीरा मिलाकर पीने से पाचन सुधरता है और कब्ज दूर होती है।
नारियल तेलः सूजन कम करने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर नारियल का तेल लगाएं।
जिमीकंदः बवासीर में जिमीकंद की सब्जी या भरता खाना बहुत लाभकारी माना जाता है।
आहार प्रक्रिया में बदलावः सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीकर पेट साफ़ रखें। साबुत अनाज, सब्जियां, और फाइबर युक्त भोजन का सेवन अधिक से अधिक करें।
योग और प्राणायामः पवनमुक्तासन और भुजंगासन का नियमित अभ्यास करने से यह बवासीर के दर्द को कम करने में मदद करता है।
अपेक्षित सावधानियाँ: यदि बवासीर से बहुत अधिक मात्रा में खून आ रहा हो, दर्द असहनीय हो, या घरेलू उपायों से 3-4 दिनों में आराम न मिले, तो तुरंत किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श करना उचित रहता है।
बवासीर का उपचार करने के लिए 7 प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ-
बवासीर से पीड़ित होने पर गुदा के अंदर या बाहरी हिस्से में मस्से बन जाते हैं और नसों में सूजन आ जाती है। कभी -कभी इन मस्सों से खून भी निकलता है, जिसके चलते मरीज को तेज दर्द का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी के कारण आपको उठने-बैठने, चलने-फिरने, अपने दैनिक जीवन के कामों को करने तथा खासकर मलत्याग करते समय दर्द सहन करना पड़ता है।
यह कोई बड़ी या गंभीर बीमारी नहीं है। अगर शुरूआती स्टेज में ही इसके लक्षणों को पहचानकर सही इलाज कराया जाए तो बहुत ही कम समय में इससे छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन ज्यादातर लोग शुरुआत में ही इसे नजरअंदाज कर देते हैं जिसके कारण यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। इसकी गंभीरता के साथ मरीज की परेशानियां भी कई गुना बढ़ जाती हैं। यह बीमारी किसी भी लिंग के आदमी को प्रभावित कर सकती है।
बवासीर की 7 कारगर आयुर्वेदिक दवाएं
साइड-इफेक्ट्स नहीं होने के कारण आयुर्वेदिक दवाइयाँ बहुत किफायती होती हैं। लेकिन इनके अधिक डोज से मरीज को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, इसलिए इनका सेवन करने से पहले अपने वैद्य से इसका डोज तय करवाना न भूलें।
कांकायन वटी
कांकायन वटी अदरक, पिप्पली जड़ी बूटियों और हरीतकी को मिलाकर बनाया जाता है। बवासीर से पीड़ित होने पर गुदा के आस-पास की नसों में खून जमने लगता है। नियमित रूप से इस दवा का सेवन करने से गुदा की नसों में खून का जमाव ठीक होने के साथ साथ बवासीर के कारण उत्पन्न दर्द और सूजन भी दूर हो जाता है। यह भूख बढ़ाने तथा तथा कब्ज को दूर करने का काम करता है, जिससे बवासीर के लक्षण कम होने लगते हैं।
त्रिफला गुग्गुल
बवासीर के लक्षणों को दूर करने वाली खास आयुर्वेदिक दवाओं में त्रिफला गुग्गल का नाम भी शामिल है। यह दवा पिप्पली, हरीतकी, गुग्गल, विभूतकी और आंवला जैसी जड़ी बूटियों से मिलकर निर्मित होती है। इसका सेवन करने से बवासीर के कारण गुदा में जन्म दर्द और सूजन खत्म हो जाता है, साथ ही साथ इंफेक्शन की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं। अगर आप बवासीर से पीड़ित हैं और उपचार के लिए अच्छी आयुर्वेदिक दवा की तलाश में हैं तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने के बाद त्रिफला गुग्गल का उपयोग करना चाहिए। यह आपकी परेशानी को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से कम कर सकता है।
अंजीर
अंजीर पेट से जुड़े विकारों को नष्ट करके बवासीर के लक्षणों को खत्म करता है। इसके सेवन से पाइल्स के कारण उत्पन्न दर्द, जलन और खुजली काफी हद तक खत्म हो जाती है। इतना ही नहीं, अंजीर खाने से पाचन तंत्र ठीक होता हैं एवं पाचन से संबंधित समस्याएं जैसे की पेट में गैस बनना, खाना हजम नहीं होना, समय पर शौंच नहीं आना आदि भी दूर हो जाते हैं। आप अंजीर को पानी में भिगोकर खा सकते हैं।
मंजिष्ठा
रक्त की गंदगी साफ करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है। इसका उपयोग बवासीर के अलावा कैंसर, किडनी स्टोन, दस्त और पेचिश की समस्या को दूर करने के लिए भी किया जाता है। मंजिष्ठा में ट्यूमर नष्ट करने वाले तथा ऊतकों को सिकोड़ने के गुण मौजूद होते हैं। बड़े से बड़े घाव को मंजिष्ठा आसानी से भर देती है। बवासीर में खून के थक्के गांठ के रूप में देखने को मिलते हैं। मंजिष्ठा के सेवन से यह जल्द ही नष्ट हो जाते हैं, इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर भी सामान्य रखने में मदद करती है। आप मंजिष्ठा का पाउडर, काढ़ा या पेस्ट का सेवन कर सकते हैं।
हरीतकी
हरीतकी को आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे गुणकारी औषधि माना जाता है। यह पाचन संबंधी बीमारियों को ठीक करने के लिए सदियों से उपयोगी है। कब्ज पर लगाम लगाकर यह मलत्याग के दौरान होने वाले दर्द को कम करता है और अप्रत्यक्ष रूप से मस्सों को कम करने में सहायक होता है। बवासीर को ठीक करने के अलावा हरीतकी का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों में भी किया जाता है, जिसमें शरीर की कमजोरी को दूर करना, डायरिया को ठीक करना, गैस और कब्ज से राहत दिलाना आदि शामिल हैं।
सूरन
बवासीर में गुदा में फोड़े हो जाते हैं जिसके कारण मलत्याग करने में असहजता होती है। विशेषज्ञ के अनुसार सूरन खूनी बवासीर में बहुत फायदेमंद होता है। यह कब्ज की शिकायत दूर करता है जिससे बवासीर के बढ़ने का खतरा कम हो जाता है। पेट में कीड़े होने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। मल द्वार से खून निकलने और गुदा क्षेत्र में खुजली होने पर सूरन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अर्शकल्प
बवासीर के लिए अर्शकल्प बहुत ही अच्छी आयुर्वेदिक दवा है। बाजार में आप पतंजलि या फिर वेदऋषि की अर्शक्ल्प वटी नामक टेबलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। दोनों ही कंपनी की दवाइयां अपनी-अपनी जगह बेहतर कार्य करती हैं। इनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं जो बवासीर का इलाज करने के लिए एक बेहतर विकल्प साबित होते हैं।
निष्कर्ष
पाइल्स कब्ज के कारण होता है। अगर आप अपने खान पान और लाइफस्टाइल में सकारात्मक बदलाव लाते हैं तो इसके लक्षण कम होने लगते हैं। इसके लिए आपको पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, अपने डाइट में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए तथा रोजाना सुबह और शाम में हल्का फूलका व्ययायाम करना चाहिए।
लेकिन अगर ऐसा करने के बाद आपकी बीमारी में कोई बदलाव नहीं आता है तो आप ऊपर बताई गई आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर इन दवाओं का इस्तेमाल करने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ तो फिर आपको लेजर सर्जरी से बवासीर का इलाज कराना चाहिए। लेजर सर्जरी के जरिए बवासीर को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है। यह बवासीर के इलाज का सबसे आधुनिक और और उन्नत तरीका है। यह ओपन सर्जरी से कई गुना बेहतर होता है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
