
सर्दियों में रक्त संचार के लिए जरूरी आसन Publish Date : 17/02/2026
सर्दियों में रक्त संचार के लिए जरूरी आसन
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
अधिक ठंड रक्त संचार और पाचन तंत्र को धीमा कर देती है। जोड़ों का पुराना दर्द उभरने लगता है। योग गुरु अक्षर यहां कुछ आसन बता रहे हैं, जो शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों के प्रवाह को बेहतर रखने में मदद करते हैं-
अधोमुख श्वानासन
यह आसन रीढ़ को मजबूती देने के साथ दिमाग और शरीर के ऊपरी हिस्से में रक्त संचार बेहतर बनाता है।
विधिः हाथों और घुटनों के बल आएं। कूल्हों को ऊपर उठाएं, ताकि शरीर 'वी' आकार में आ जाए। एड़ियों को जमीन की और दबाएं 15 से 8 सांसों तक रुकें।
ताड़ासन
यह आसन शरीर के पॉश्चर को सही रखता है। पूरे शरीर में रक्त प्रवाह सक्रिय करता है।
विधिः सीधे खड़े हों, पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। हाथों को ऊपर उठाएं, उंगलियों को आपस में फंसाएं और ऊपर की ओर खींचें। 20-30 सेकंड गहरी सांस लें।
वीरभद्रासन
यह आसन पैरों व कूल्हों में रक्त संचार बेहतर बनाता है।
विधिः सीधे खड़े हो जाएं। एक पैर आगे रखते हुए 90 डिग्री तक मोड़े। दूसरे को पीछे ले जाएं। दोनों हाथों को जोड़ें और ऊपर ले जाएं। दृष्टि हाथों की ओर रखें।
वृक्षासन
यह आसन संतुलन बढ़ाता है। पॉश्चर और पैरों समेत पूरे शरीर में संचार बेहतर होता है।
विधिः एक पैर पर सीधे खड़े हों। दूसरे पैर के तलवे को जांघ या पिंडली पर रखें। हाथों को छाती के पास प्रार्थना की मुद्रा में या ऊपर रखे।
विपरीत करणी
यह पैरों की सूजन कम करने और नसों में रक्त प्रवाह को वापस हृदय की ओर भेजने के लिए बेहतरीन है।
विधिः दीवार के पास पीठ के बल लेट जाएं और अपने पैरों को दीवार के सहारे सीधा ऊपर उठाएं। 3-5 मिनट तक इसी मुद्रा में रहे।
वज्रासन
यह आसन पाचन अंगों में रखत प्रवाह बढ़ाता है और चयापचय में सुधार करता है।
विधिः घुटनों के बल अपनी एड़ियों पर बैठ जाएं। रीढ़ सीधी और हाथों को जांघों पर रखें।
कपालभाति प्राणायाम

यह तकनीक कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन और पाचन में सहायता करती है।
विधिः सीधे बैठें। नाक से जोर से सांस बाहर छोड़े और सांस लेने की प्रक्रिया कोस्वाभाविक रहने दें। इसे 1-2 मिनट तक करें।
इन आसनों और प्राणायाम के साथ नियमित ध्यान करना भी खराब रक्त संचार के लिए सबसे अच्छे उपचारों में से एक हो सकता है।
त्रिकोणासन
यह रीढ़ और पेट के हिस्से को सक्रिय करता है, जिससे पाचन मेंमदद मिलती है।
विधिः पैरों को फैलाकर खड़े हों। एक ओर झुकते हुए हाथ से पैर को छुएं और दूसरा हाथ आकाश की ओर सीधा रखें।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
