खिचड़ीः सुविधा, स्वाद और सेहत      Publish Date : 04/02/2026

                   खिचड़ीः सुविधा, स्वाद और सेहत

                                                                                                                                       डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

यह खिचड़ी का शानदार दौर है। बीत गए वो दिन जब खिचड़ी को कई लोगों ने मजबूरी का भोजन मान लिया था। आज खिचड़ी की ताकत का अंदाजा डॉक्टरों को भी हो गया है। यह अब संतुलित आहार ही नहीं, नए दौर का सुपरफूड है। लोग लौट-लौटकर खिचड़ी में सहूलियत, राहत और सेहत खोजने लगे हैं। जनवरी साल का वह समय है, जब अधिकांश लोग हफ्तों के गरिष्ठ खान-पान की अति के बाद अपनी दिनचर्या में लौट रहे होते हैं। शायद यही कारण है कि शरीर सहज ही खिचड़ी जैसे संतुलित और पौष्टिक भोजन की ओर आकर्षित होता है।

त्योहार के मौके पर खिचड़ी खाने का सांस्कृतिक महत्व तो है ही, साथ ही इसके सेहत से जुड़ कई पहलू भी हैं। खिचड़ी मौसम बदलने के साथ शरीर को मजबूती देती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। वैश्विक वेलनेस उद्योग में, इसे शुद्ध शाकाहारी, ग्लूटन-मुक्त, पेट के लिए अनुकूल, वातरोधी और वायो अवेलेबल के रूप में प्रचारित किया जाता है। बायो अवेलेवल एक ऐसा शब्द है, जिसका उपयोग यह बताने के लिए किया जाता है कि खाद्य पदार्थ के सभी पोषक तत्व शरीर आसानी से ग्रहण कर सकता है, लेकिन इन भारी भरकम शब्दों के बिना भी, भारतीयों ने पोषण के लिए हमेशा खिचड़ी का सहारा लिया है।

बलवान और बीमार दोनों का भोजन

खिचड़ी पाचन और तंत्रिका तंत्र को पूरी कोमलता के साथ संतुलित करती है। खिचड़ी का असर तुरंत दिखाई देता है। इस पर मुंबई स्थित विक्ट्रियो न्यूट्रिशन की संस्थापक और पोषण विशेषज्ञ हिमानी जरीवाला बताती है, 'पोषण के लिए खिचड़ी संपूर्ण आहार है, वहीं कोम्बुचा और प्रोवायोटिक्स आदि सप्लीमेंट्स मात्र हैं। विभिन्न त्योहारों के बाद खिचड़ी खाना आंतों को आराम देता है। खिचड़ी गर्म और मुलायम ऐसा भोजन है, जो सुपाच्य है। शरीर को ऊर्जा और पर्याप्त नमी देता है। सूजन-रोधी मसालों और पेट के अनुकूल फाइबर से भरपूर है। दालों में 'लाइसिन' होता है और अनाज में सल्फर आधारित अमीनो एसिड जैसे 'मेथियोनीन' और 'सिस्टीन' होते हैं। ये सभी मिलकर आवश्यक नौ अमीनो एसिड प्रदान करते हैं, जिससे पूर्ण प्रोटीन की पूर्ति होती है।'

अब 'वायोहैकिंग' जैसे शब्द चलन में आए हैं। पर सदियों पहले से ही आयुर्वेद खिचड़ी के जरिये पाचन को ठीक कर रहा है। आंत विशेषज्ञ और आयुर्वेद कोच के अनुसार,'खिचड़ी एक संतुलित भोजन है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और सब्जियां सब एक साथ मिल जाते हैं। खिचड़ी की असल शक्ति तब दिखती है, जब तन बीमार होता है या मन भावनात्मक दवाव में होता है। एक बर्तन में बनाया जाने वाला यह सुपाच्य भोजन काम के बोझ को 50 प्रतिशत तक कम कर देता है। लिवर को आराम मिलता है और वह तुरंत डिटॉक्स मोड में आ जाता है।

यह कहना कि खिचड़ी में पर्याप्त एमिनो ए‌सिड्स नहीं होते, गलत है। आधुनिक प्रोटीन बाजार ने यह भ्रम पैदा किया है। सादे ढंग से पूरी तरह बनस्पति आधारित भोजन शरीर की सभी जरूरतें पूरी कर देता है।'

आंत और लिवर के लिए विष नाशक आहार

                                                        

'आनंदा इन द हिमालयाज' में खिचड़ी केवल सुकून देने वाला भोजन नहीं, बल्कि खानपान का जरूरी हिस्सा है। वहां के शेफ दिवाकर बलोदी कहते हैं, 'वैश्विक स्तर पर आंतों की सेहत एक प्रमुख मुद्दा है। लोग आतों और मस्तिष्क के संबंधों 'गट-ब्रेन एक्सिस' और उसके प्रभावों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। खिचड़ी एक ओर सुकून देने वाला भोजन है, तो दूसरी ओर उपचार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेदिक पद्धति के आधार पर यहां आने वाले अतिथियों के दोष या शरीर की प्रकृति को ध्यान में रखकर उनके लिए व्यक्तिगत रूप से खिचड़ी तैयार की जाती है। 'दिवाकर बलोदी कहते हैं, 'डिटॉक्स के लिए सादी पारंपरिक खिचड़ी खाएं, जो सफेद चावल, मूंग दाल, हल्दी, घी और सेंधा नमक से तैयार की जाती है। यह पोषण के लिहाज से हल्की और सुपाच्य होती है। इसे पचाने के लिए आंतों को ज्यादा मेहनत करनी नहीं करनी पड़ती। वहीं पाचन तंत्र की बहाली करनी हो तो ज्वार, बाजरा जैसे मोटे अनाज, जौ और औषधीय मसालों से बनी साबुत अनाज की खिचड़ी खानी चाहिए।

प्यार से पोषण तक

खिचड़ी भारतीय घरों से कभी गायय नहीं हुई। लंबे समय से यह थाली में बनी रही। ज्यादातर इसे बीमारी के समय खाया जाता था। यह कोई ऐसी चीज नहीं थी, जिसे बाहर से ऑर्डर करके मंगवाया जाता या खाने से पहले फोटो ली जाए। अब, जैसे-जैसे लोग शहरों में अकेले रह रहे हैं और दुनियाभर के स्वादों का आनंद ले रहे हैं, तो जमीन से जुड़े होने का एहसास कराने वाली खाने की चीजों की मांग बढ़ी है। बात केवल पुरानी यादों को जीना भर नहीं है। कोलकाता की शेफ स्नेहा सिंधी कहती हैं, 'लोग सुकून देने वाला प्यार से पकाया भोजन करना चाहते है। खिचड़ी उन्हें वही देती है- यह तृप्ति देने वाला हल्का और संपूर्ण भोजन है।'वे आगे कहती हैं, 'खिचड़ी बहुत साधारण चीजों को मिलाकर बनाई जाती है, पर उसे बनाने में तकनीक महत्वपूर्ण है। जिस व्यंजन में सामग्री बहुत साधारण होती है, उसे बनाने में अधिक कौशल की जरूरत होती है। अगर आप इसकेफ्लेवर प्रोफाइल (स्वाद की गहराई) को सही ढंग से तैयार नहीं करते हैं, तो यह केवल एक बेस्वाद 'लेई' जैसी लगेगी। जितनी तरह की अलग-अलग सामग्री होगी, उतनी ही सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। यह एक ऐसी चुनौती है, जिसका शेफ आनंद लेते हैं।

तंत्रिका तंत्र को भी ताकत

खिचड़ी का सुकून केवल सांस्कृतिक नहीं है, यह तंत्रिका तंत्र से भी जुड़ा है। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट रीता मेंडोंका कहती हैं, 'जब व्याकुल होता है, तो शरीर कुछ आसान, जानी-पहचानी भरोसेमंद चीजें खाना चाहता है। गर्म और मुलायम इस भोजन को चबाने या स्वाद को समझने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती मन और तंत्रिका तंत्र तुरंत इसे सुरक्षा के तौर पर स्वीकार लेता है। धीमी गति से खाई गई खिचड़ी बिना किसी विशेष प्रयास के एक संतुलनकारी अभ्यास बन जाती है। यह तंत्र को उसी क्षण शांति का वास्तविक अनुभव कराती है। धीरे-धीरे शरीर को मजबूती देती है।' दुख, थकान या बीमारी के क्षणों में, यह भावनात्मक देखभाल बन जाती है। मेंडोंका बताती हैं, 'कोई आपके लिए खिचड़ी तब बनाता है, जब आप अपना खयाल नहीं रख पाते। खिचड़ी मानसिक स्तर पर सुरक्षा का एहसास कराती है। वैश्विक वेलनेसकी दुनिया इसे 'फंक्शनल इंटिंग' कहती है और भारत के लिए, यह बस रात का आसान भोजन है।'

हर दाना काम का

  • चावलः कार्बोहाइड्रेट से भरपूर चावल शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देते हैं।
  • दालेंः (जैसे मूंग दाल): प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और पाचन में सहायता करती है।
  • धीः इसमें स्वस्थ वसा होती है, जो शरीर को गर्माहट देती है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करती है।
  • हल्दीः इसमें 'करक्यूमिन होता है, जिसमे सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। हल्दी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और शरीर की सूजन कम करती है।
  • अदरकः इसमें 'जिजरॉल' प्रचुरता में होता है, जो पाचन में सुधार करता है, संक्रमण से लड़ता है और शरीर को अंदरूनी गर्माहट देता है।
  • सब्जियां: यदि खिचड़ी में सब्जियां डाली जाएं, तो यह फाइबर की मात्रा बढ़ा देती है, जो आंतों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।
  • काली मिर्च और जीराः ये मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इनमें सूजन-रोधी गुण होते हैं और शरीर पोषक तत्वों को बेहतर ढंग से ग्रहण कर पाता है।

                                             खिचड़ी का दम

पोषक तत्व

कैलोरी

प्रति सौ ग्राम

120-130 कैलोरी

प्रोटीन

4.5-5.5 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट

18-22 ग्राम

फाइबर

2.5-3.5 ग्राम

वसा

4-6 ग्राम

चंद खासियत

  • पूर्ण प्रोटीनः चावल और दाल का मिश्रण 'अमीनो एसिड' की कमी को पूरा करता है, जिससे शाकाहारियों के लिए यह एक उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन आहार है।
  • कम ग्लाइसेमिक इंडेक्सः यदि इसमें सब्जियां और छिलके वाली दाल मिलाएं, तो यह शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करती है, इसे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती रहती है।
  • पोषण: यदि आप इसमें 1 चम्मच घी डालते हैं, तो कैलोरी लगभग 45-50 कैलोरी बढ़ जाएगी, लेकिन यह विटामिन ए, डी, ई के अवशोषण में मदद करेगा।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।