विटानि बी-12 की कमीः आयुर्वेदिक के विभिन्न उपाय      Publish Date : 01/02/2026

    विटानि बी-12 की कमीः आयुर्वेदिक के विभिन्न उपाय

                                                                                                                                                       डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

एक दिन मैं कॉफ़ी शॉप में बैठा, लोगों को आते-जाते देख रहा था और सोच रहा था कि हम अपनी सेहत को के प्रति कितने अजीब हो गए हैं। ख़ासकर जब बात विटामिन B12 की आती है। थकान, मूड स्विंग्स, हाथ-पैर में झनझनाहट, आदि सब आजकल इतने आम हो गए हैं कि अब हम इन्हें ‘नॉर्मल’ मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं और जब पता चलता है कि हमारे शरीर में विटामिन B12 की कमी है, तो हममें से अधिकर लोग सीधा सप्लीमेंट्स की तरफ भागते हैं। लेकिन रुकिए! क्या हमने कभी सोचा है कि हज़ारों साल पुरानी हमारी अपनी विरासत, आयुर्वेद, इस बारे में क्या कहता है?

आखिर क्या है विटामिन B12, और आयुर्वेद इसे कैसे देखता है?

असल में विटामिन B12, जिसे कोबालामिन भी कहते हैं, हमारे शरीर के लिए एक ज़रूरी विटामिन है। यह रेड ब्लड सेल्स बनाता है, हमारे नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखता है और DNA बनाने में भी मदद करता है। हालांकि हमारा शरीर इस विटामिन को अपने आप नहीं बना सकता। यह विटामिन हमें खाने से ही प्राप्त होता है, और मांसाहारी चीज़ों में अधिकांशतः यह पाया जाता है। यही कारण है कि भारत जैसे देश में, जहाँ शाकाहारियों की एक बड़ी आबादी है, B12 की कमी एक बड़ी समस्या है।

आयुर्वेद सीधे-सीधे ‘विटामिन B12’ का नाम नहीं लेता ऐसा इसलिए क्योंकि हज़ारों साल पहले यह कॉन्सेप्ट था ही नहीं। इसके बजाय, आयुर्वेद शरीर की ‘रस धातु’, ‘रक्त धातु’, और ‘मज्जा धातु’ को मज़बूत करने की बात करता है। वस्तुतः यह वही सब चीज़ें हैं जिन्हें B12 सीधे तौर पर प्रभावित करता है। तो, आयुर्वेद का लक्ष्य सिर्फ B12 का लेवल बढ़ाना नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम को सुधारना है जो इसे बनाता और सोखता है। और यहीं पर आयुर्वेद मॉडर्न दवाओं से अलग हो जाता है और यह सिर्फ लक्षणों का इलाज नहीं करता, यह उसकी जड़ पर काम करता है।

                                                

इसका उद्देश्य केवल विटामिन B12 की कमी पूरी करना नहीं, बल्कि पाचन शक्ति (अग्नि) को उत्तेजित करना है।

अश्वगंधाः अश्वगंधा को ‘स्ट्रेस के दुश्मन’ की संज्ञा भी दी जाती है। यह सीधे तौर पर B12 नहीं देता, लेकिन यह नर्वस सिस्टम को मज़बूत करता है और थकान से भी लड़ता है - जो विटामिन B12 की कमी के दो सबसे बड़े लक्षण होते हैं। कुछ रिसर्च तो यह भी कहती हैं कि यह पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है।

शतावरीः यह जड़ी-बूटी ख़ासकर महिलाओं के लिए वरदान मानी जाती है, पर यह खून बनाने और इम्युनिटी बढ़ाने में भी यह बहुत मदद करती है।

आंवला: आंवला तो हमारी सेहत का सुपरहीरो है। इसमें विटामिन B भरपूर होता है, जो पोषक तत्वों को सोखने में मदद करता है। कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि इसमें खुद भी कुछ मात्रा में B12 होता है, हालाँकि इस पर अभी और रिसर्च होनी है।

पुनर्नवा मंडूर और आरोग्यवर्धिनी वटीः ये कुछ क्लासिकल आयुर्वेदिक दवाएं हैं जो लिवर को स्वस्थ रखने और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने में मदद करती हैं, ये दोनों समस्याएं B12 की कमी से जुड़ी हुई भी हो सकती हैं।

आयुर्वेद किसी एक चीज़ पर फोकस करने के बजाय, पूरे शरीर को एक साथ ठीक करने की कोशिश करता है। यह ऐसा है जैसे आप सिर्फ एक मुरझाए हुए पत्ते को पानी देने के बजाय, पूरे पेड़ की जड़ों में खाद-पानी दे रहे हों।

क्या विटामिन B12 पाउडर सच में लाभदायक होते है?

बाज़ार में आजकल विटामिन बी12 पाउडर का बड़ा चलन है। इसके अनेक लाभ भी हैं, यह सीधा शरीर में जाता है और जल्दी काम करता है। कई तरह के B12 पाउडर बेनिफिट्स बताए जाते हैं, जैसे तुरंत ऊर्जा मिलना और मेटाबॉलिज़्म का तेज़ होना। लेकिन यहाँ एक पेंच भी है कि अगर आपकी पाचन अग्नि ही मंद है, तो यह महंगा पाउडर भी पूरी तरह से शरीर में नहीं लग सकेगा।

यह बात नहीं है कि यह पाउडर बेकार हैं। इमरजेंसी में या जब कमी बहुत अधिक होती है, तो यह चीजें ज़रूरी हो सकते हैं। लेकिन असली और टिकाऊ समाधान के लिए, हमें आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण को ही अपनाना चाहिए। आप स्पिरुलिना जैसे प्राकृतिक सप्लीमेंट्स पर भी विचार कर सकते हैं, जिसे आयुर्वेद में भी एक शक्तिशाली पोषक तत्व माना गया है। स्पिरुलिना में भी प्राकृतिक रूप से पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को ताक़त देते हैं। स्पिरुलिना कैप्सूल भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।