
बच्चों का बिस्तर गीला करनाः कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 02/01/2026
बच्चों का बिस्तर गीला करनाः कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
परिचयः
बिस्तर गीला करना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में रात्रि निथारने की बीमारी (नोक्टर्नल एन्यूरेसिस) कहा जाता है, इस समस्या में नींद के दौरान अनैच्छिक रूप से पेशाब निकल जाता है। यह समस्या अक्सर बच्चों में देखी जाती है, लेकिन कभी-कभी वयस्कता तक भी बनी रह सकती है। हालांकि यह आमतौर पर कोई गंभीर चिकित्सीय समस्या नहीं है, लेकिन इससे व्यक्ति और उसके परिवार को मानसिक परेशानी हो सकती है।
बिस्तर गीला करने के कारण:
1. विकासात्मक कारक:
- मूत्राशय पर नियंत्रण विकसित होने में विलम्ब।
2. आनुवंशिक प्रवृत्ति:
- परिवार में बिस्तर गीला करने का इतिहास होने के चलते भी इसकी संभावना बढ़ जाती है।
3. छोटी मूत्राशय क्षमता:
- एक छोटा मूत्राशय जो अधिक मात्रा में मूत्र को धारण करने में असमर्थ रहता है।
4. हॉर्मोनल असंतुलन:
- एंटीडियूरेटिक हॉर्मोन
(एडीएच) का निम्न स्तर, जो रात में मूत्र उत्पादन को कम करता है।
5. गहरी नींद के पैटर्न:
- मूत्राशय भरा होने पर भी जागने में कठिनाई होना।
6. मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI):
- मूत्राशय में जलन बिस्तर गीला करने का कारण बन सकती है।
7. तनाव या चिंता:
- भावनात्मक कारक, जिनमें पारिवारिक मुद्दे या स्कूल से संबंधित तनाव शामिल हो सकते हैं।
8. विभिन्न चिकित्सा स्थिति:
- मधुमेह, स्लीप एपनिया या कब्ज।
बिस्तर गीला करने के लक्षणः

- नींद के दौरान अनैच्छिक पेशाब हो जाना।
- गीलेपन के कारण रात में असुविधा होती है।
- लंबे समय तक गीलेपन के कारण जननांग क्षेत्र में जलन या चकत्ते पड़ना।
- भावनात्मक पीड़ा, शर्मिंदगी या चिंता का विषय।
बिस्तर गीला करने के सम्बन्ध में आयुर्वेदिक विचार
आयुर्वेद के अनुसार बिस्तर गीला करने की समस्या अक्सर वात दोष के असंतुलन और मूत्राशय पर कमजोर नियंत्रण से जुड़ी होती है। उपचार का मुख्य उद्देश्य मूत्र प्रणाली को मजबूत करना, मन को शांत करना और दोषों का संतुलन बहाल करना है।
आयुर्वेदिक कारण (संप्राप्ति):
- मूत्रमार्ग की मांसपेशियों का कमजोर होना (मूत्रवाह स्रोतस)।
- वात दोष बढ़ने से अनियंत्रित रूप से पेशाब निकल जाता है।
- अविकसित पाचन (अग्नि) और विषाक्त पदार्थों (अमा) का संचय।
- बिस्तर गीला करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार
1. हर्बल उपचार
अश्वगंधा (विथानिया सोम्नीफेरा):
- यह तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है और चिंता को कम करता है।
खुराकः प्रतिदिन 250-500 मिलीग्राम (किसी पेशेवर मार्गदर्शन में)।
शतावरी (शतावरी रेसमोसस):
- मूत्राशय की मजबूती और हॉर्मोनल संतुलन को बढ़ाता है।
मात्राः सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ 1-2 चम्मच पाउडर का सेवन करें।
ब्राह्मी (बैकोपा मोनिएरी):
- यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार करता है और तनाव से राहत प्रदान करता है।
खुराकः 250-500 मिलीग्राम कैप्सूल या चाय के रूप में।
पुनर्नवा (बोरहविया डिफ्यूसा):
- यह मूत्रवर्धक और विषहरणकर्ता के रूप में कार्य करता है।
मात्राः 1 छोटा चम्मच रस या पाउडर दिन में दो बार।
2. आहार संबंधी सिफारिशें
- अम्लीय या मसालेदार भोजन से परहेज करें, विशेष कर शाम के समय।
- सोने से 2 घंटे पहले तरल पदार्थों का सेवन कम कर देना चाहिए।
- अपने आहार में जायफल या इलायची मिला हुआ गर्म दूध जैसे सुखदायक खाद्य पदार्थ शामिल करें।
- कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
3. जीवनशैली में बदलाव
- नियमित रूप से सोने की दिनचर्या स्थापित करें।
- सोने से पहले पेशाब करने के लिए प्रोत्साहित करें।
- ध्यान या योग, जैसे बालासन (बाल आसन) के माध्यम से तनाव कम करें।
4. आयुर्वेद में चिकित्सा पद्धतियाँ

अभ्यंग (तेल मालिश):
- तंत्रिका तंत्र को शांत करने के लिए गर्म तिल के तेल या अन्य औषधीय तेल का प्रयोग करना चाहिए।
बस्ती (एनीमा थेरेपी):
- यह वात दोष को शांत करने और मूत्राशय पर नियंत्रण मजबूत करने में सहायक सिद्व होता है।
5. विशिष्ट आयुर्वेदिक फार्मूलेशन
चंद्रप्रभा वटी:
- वात को संतुलित करता है और मूत्र संबंधी स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
खुराकः भोजन के बाद गुनगुने पानी के साथ 1-2 गोलियों का सेवन करें।
6. समस्या के लिए कुछ घरेलू उपचारः
दालचीनी चूरा:
- सोने से पहले शहद में एक चुटकी दालचीनी मिलाएं।
सरसों के बीज:
- एक छोटा चम्मच गुनगुने दूध में भिगोकर सोने से पहले पी लें।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
