
खतरनाक हैं सर्दी की सूखी हवाएं, रहें बचकर Publish Date : 07/12/2025
खतरनाक हैं सर्दी की सूखी हवाएं, रहें बचकर
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
सर्दी की हवाएं ताजगी नहीं देती, यह सेहत के लिए घातक भी हो सकती है, ऐसे में इनसे अपना बचाव करें- वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक ने बताया कि सर्दी में किस तरह से अपना ख्याल रखें।
सर्दियों का यह मौसम ताजगी, ऊर्जा व स्वादिष्ट आहार की सौगात लेकर आता है, तो वहीं इसकी शीत वात (ठंडी हवा) मानव शरीर के लिए कई प्रकार से चुनौती भी बन जाती है। आयुर्वेद के अनुसार शीत ऋतु में चलने वाली ठंडी हवाएं शरीर के वात दोष को अत्यधिक बढ़ा देती है। इससे जोड़ों के दर्द से लेकर सर्दी, जुकाम, हृदय-संवेदनशीलता और मानसिक तनाव तक अनेक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
दरअसल सर्दी के मौसम में ठंडी हवाएं शरीर पर किस तरह प्रभाव डालती है और आयुर्वेद इस मौसम में कैसी सावधानियां सुझाता है, इन तमाम पहलुओं पर हमारे वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक (विशेषज्ञ) डॉ. सुशील शर्मा से विशेष बातचीत की गई। इसके सम्बन्ध में डॉ0 शर्मा ने बताया कि ठंड के इस मौसम में खासकर दिसंबर व जनवरी माह में लोगों को काफी सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
सर्दी के इस मौसम में ठंडी हवाएं किस तरह से शरीर पर प्रभाव डालती है?
इस सवाल पर डॉ. शर्मा ने कहा कि “आयुर्वेद में “वात” को चलन, शुष्कता, ठंडक, गति और संवेदना का कारक माना गया है। जब शरीर पर ठंडी हवा पड़ती है, तो यह स्थिति वात दोष को और अधिक उत्तेजित कर देती है। इससे शरीर में विभिन्न प्रकार के विकार (रोग) उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है।“
ठंडी हवा का शरीर पर प्रभावः
जोड़ों में दर्द और अकड़नः डॉ. शर्मा ने बताया कि शीत वात की अधिकता से हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों में कड़ापन आता है। गठिया, साइटिका, पीठ दर्द और घुटने के दर्द की समस्याएं इस मौसम में बढ़ जाती हैं।
सर्दी-जुकाम तथा अन्य श्वसन विकारः इस मौसम में ठंडी हवा नाक-गले की श्लेष्मा को सुखा देती है। आयुर्वेद में इसे “वात कफ का संयोगज विकार” बताया गया है। इससे गले में खराश, खांसी, कफ जमना, दमा, एलर्जी, साइनस जैसी समस्याएं बढ़ जाती है।
त्वचा का रूखापन व फटनाः वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक के अनुसार ठंडक और हवा दोनों में “शोषक” (सुखाने वाले) गुण होते हैं। इससे त्वचा फटना, होंठ सूखना, एड़ी में दरार, हाथ पैरों का रुखापन आदि होता है।
हृदय पर प्रभावः आयुर्वेद के अनुसार ठंडा मौसम रक्त वाहिनियों को संकुचित करता है। इससे रक्तचाप (Blood Pressure) में उतार-चढ़ाव, हृदय पर भार, हाथ-पैर ठंडे रहना आदि के जैसे लक्षण उभर सकते हैं।
मानसिक स्थिति पर प्रभाव-चिड़चिड़ापन और चिंताः वात दोष का बढ़ना मन में अस्थिरता लाता है। इस मौसम में चिंता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और एकाग्रता में कमी सामान्य समस्याएं होती हैं। इसके अलावा आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में ठंडी हवा से होने वाले रोग शीत-वात के कारण आयुर्वेद में वर्णित प्रमुख रोगों में वातार्त (वात से होने वाला जोड़ों का दर्द), आमवात (गठिया), उरःकष्ट (सीने में जकड़न), श्वास कास (दमा व खांसी), त्वचा रोग (अत्यधिक शुष्कता, एग्जिमा), सिरदर्द एवं वातजन्य, सर्दी-जुकाम आदि शामिल हैं।
ठंडी हवा से बचाव और आयुर्वेद की सरल सलाह
डॉ. शर्मा नक बताया कि ठंडी हवा से बचाव के लिए आयुर्वेद में सरल सलाह दी गई हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति इस मौसम में स्वस्थ और फिट रह सकते हैं। यह सलाहें इस प्रकार हैः
शरीर को गर्म बनाएं रखें (उष्ण उपाय): आयुर्वेदिक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुशील शर्मा ने बताया कि इस मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए सिर, कान और गर्दन को कपड़े से ढककर रखना उचित उपाय है।
तेल से मालिश करें: इन दिनों मालिश के लिए तिल का तेल सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। रात में सरसों या तिल का तेल पैरों में लगाएं, तो इससे शरीर में गर्माहट बनी रहेती है।
पाचन अग्नि को मजबूत बनाए रखना भी जरूरीः आयुर्वेद के अनुसार चूंकि सर्दी में अग्नि मजबूत होती है, इसलिए सूप, गर्म दलिया, मूंग दाल, अदरक, लहसुन, गरम मसालों का सेवन, भोजन में तिल तेल, घी का पर्याप्त उपयोग करें और ठंडे पेय और फ्रिज के पानी का सेवन न करें।
श्वसन तंत्र को सुरक्षित रखें: डॉ. शर्मा ने बताया कि श्वसन तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए भाप लेना, सौंठ, तुलसी, दालचीनी का काढ़ा का उपयोग करें और घर में सुबह-शाम कपूर या अजवाइन की धूनी दें।
त्वचा की करें सुरक्षाः डॉ. सुशील शर्मा ने बताया कि तिल या नारियल तेल की नियमित मालिश, गुनगुने पानी से स्नान, मॉइस्चराइजर के प्रयोग से त्वचा की सुरक्षा की जा सकती है।
बढ़ाएं प्रतिरक्षाः सर्दी के इस मौसम में प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए च्यवनप्राश, आंवला, अश्वगंधा, हल्दी वाला गोल्डन दूध, ये सभी औषधियां “वात-शमन” और “ओज-वर्धक” मानी गई हैं। इसलिए लोगों को इस दिशा में भी उचित ध्यान देने की आवश्यकता है।
सर्दियों में आहार-क्या खाएं और क्या न खाएं?
डॉ. शर्मा ने बताया कि सर्दियों में गर्म सूप, मूंग दाल, बाजरा रोटी, तिल, गुड़, च्यवनप्राश, ताजे आंवले, गाजर, मूली, उष्ण पेयः सौंठ चाय, अदरक पानी का सेवन करें. ठंडी चीजें जैसे ठंडा पानी, ठंडी दही, कच्चे सलाद (अधिक मात्रा में), तेल रहित अधिक सूखे भोजन का सेवन न करें।
ठंडी हवा से बचाव ही स्वास्थ्य का मूल मंत्र”
डॉ. शर्मा ने अंत में बताया कि “ठंडी हवा से बचाव ही स्वास्थ्य का मूल मंत्र है। लिहाजा सर्दियों में ठंडी हवा का स्पर्श वात को बढ़ाकर शरीर को अनेक बीमारियों की ओर धकेल सकता है, लेकिन कुछ सरल सावधानियों, गर्म आहार, तेल-मालिश और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले यह उपाय अपनाकर हम इन समस्याओं से अपना बचाव कर सकते हैं। ऐसे में गर्म रहें, स्वस्थ रहें, यही इस मौसम का मंत्र है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को यह सलाह भी दी है कि यदि इस मौसम में अधिक दिक्कत आती है, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें चाहिए।“
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
