
सर्दी के मौसम का अमृत बथुआ Publish Date : 27/11/2025
सर्दी के मौसम का अमृत बथुआ
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
बथुवे का सेवन अनादि काल से किया जाता रहा है, लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की एक पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरे रंग से रंगने के लिए प्लस्तर में बथुवा मिलाते थे और हमारे घर घर की बुजुर्ग महिलाएं अपने सिर से रूसी यानि डैंड्रफ साफ करने के लिए बथुवे के पानी से अपने बाल धोया करती थीं। इस प्रकार यह तो सत्य है कि बथुवा अपने आप में गुणों की एक खान है।
बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर होता है तथा बथुवे में कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स भी पाए जाते हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि बथुवे के पत्तों में 7.3 ग्राम कॉर्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर बथुए में 43 kcal कैलोरी होती है।

जब बथुवा मट्ठा, लस्सी या दही में मिला दिया जाता है तो यह किसी भी मांसाहार से अधिक प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से अधिक सुपाच्य एवं पौष्टिक आहार बन जाता है।
जब हम बीमार होते हैं तो आजकल सबसे पहले हमें विटामिन की गोली सेवन करने की सलाह दी जाती हैं, जिससे हमारे शरीर की कमजोरी दूर हो सके। किसी गर्भवती महिला को विशेषरूप से चिकित्सक विटामिन बी, सी व आयरन की गोली का सेवन करने की सलाह देते है, जबकि बथुवे में यह सब कुछ उपलब्ध होता है। कहने का मतलब है कि बथुवा पहलवानो से लेकर गर्भवती महिलाओं तक, बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए ही किसी अमृत से कम नहीं है।

बथुआ हमारे अमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत Liver को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है। इसके साथ ही बथुवे में जिंक भी होता है जो कि शुक्राणुवर्धक तत्व होता है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी भाई को Sexual Weakness यानि मर्दाना कमजोरी है तो उन्हें बथुवा का सेवन करना चाहिए, यह अद्भुत लाभ प्रदान करता है। बथुवा कब्ज को भी दूर करता है, जिससे आपके शरीर में ताकत और स्फूर्ति बनी सदैव ही बनी रहती है।
इसके सम्बन्ध में विशेषज्ञ कहते हैं कि इस मौसम में जब तक बथुए का साग मिलता रहे, आपको नित्य इसकी सब्जी करते रहना चाहिए। बथुए का रस, उबाला हुआ पानी भी पीएँ यह पेशाब के रोगी के लिए सर्वश्रेष्ठ औषधि हैँ।
‘‘कुल मिलाकर बथुआ इस मौसम में प्रकृति का एक श्रेष्ठ उपहार है’’।।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
