खर्राटे से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं यह घरेलू उपाय      Publish Date : 18/11/2025

        खर्राटे से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं यह घरेलू उपाय

                                                                                                                                                               डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

सोते वक्त सांसों के साथ तेज आवाज और वाइब्रेशन आना खर्राटा  कहलाता है। खर्राटा नींद से संबंधित एक समस्या है। खर्राटों की आवाज नाक या मुंह, कहीं से भी आ सकती है। यह आवाज सोने के बाद किसी भी समय शुरू और बंद हो सकती है। खर्राटे सांस अंदर लेते समय आते हैं। खर्राटे लेने वाले लोगों को नींद से जागने के बाद गले में जलन महसूस हो सकती है। अधिकांश लोगों सोचते है कि खर्राटे का कोई समाधान नहीं है, लेकिन यह सोचना गलत है। खर्राटों की समस्या को कुछ घरेलू उपचार से दूर किया जा सकता हैं, लेकिन खर्राटे रोकने के उपाय को जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि खर्राटे क्यों आते हैं।

आयुर्वेद में खर्राटे की परेशानी से छुटकारा पाने के अनेक उपाय बताए गए हैं। इन उपायों से खर्राटे का उपचार किया जा सकता हैं। आइए जानते हैं कि खर्राटे का आयुर्वेदिक उपचार कैसे करें।

खर्राटे क्यों आते हैं?

                                                                         

अक्सर लोग खर्राटे से परेशान रहते हैं और यह जानने की कोशिश करते हैं कि खर्राटे क्यों आते हैं। दरअसल खर्राटे एक तरह की ध्वनि होती है। यह ध्वनि तब पैदा होती है, जब व्यक्ति नींद के दौरान अपनी नाक और गले के माध्यम से स्वतंत्र रूप से सांस नहीं ले पाता है। जब हवा का बहाव गले की त्वचा में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा कर देता है। जो लोग अक्सर बहुत ज्यादा खर्राटे लेते हैं उनके गले और नाक के ऊतक में बहुत ज्यादा कंपन होता है। इसके अलावा व्यक्ति की जीभ की स्थिति भी सांस लेने के रास्ते में आती है जिसके कारण खर्राटों की समस्या होती है। 

खर्राटे आने के लक्षणः

खर्राटे आने के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं”-

  • तेज आवाज के साथ सांस लेना और छोड़ना।
  • थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ सेकेंड के लिए सांस का रुक जाना।
  • धीरे-धीरे सांस रुकने की रफ्तार और समय का बढ़ना।
  • सोते-सोते सांस ना आने पर हड़बड़ा कर जाग जाना।
  • दिन भर सुस्ती और आलस्य से भरे रहना।
  • नींद पूरी होने पर भी दिनभर नींद आना।
  • थकान महसूस होना, आदि।

खर्राटे आने के कारणः

खर्राटे आने के अनेक कारण होते हैं, जिनमें मुख्य कारण निम्न हैं:-

मोटापाः वजन बढ़ने के कारण भी खर्राटे आते हैं। जब किसी व्यक्ति का वजन बढ़ता है, तो उसकी गर्दन पर अधिक मांस लटकने लगता है। लेटते समय इस मांस के कारण सांस की नली दब जाती है, और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

अधिक मात्रा में खूब शराब पीना- कई दर्द निवारक दवाओं की तरह ही अल्कोहल भी शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को कम करती है, और उन्हें विस्तार देती है। कई बार बहुत अधिक अल्कोहल के सेवन से गले की मांसपेशियां फैल जाती हैं, जिससे खर्राटे उत्पन्न हो सकते हैं।

मांसपेशियों की कमजोरीः जब गले और जीभ की मांसपेशियां बहुत शांत और शिथिल हो जाती हैं तो यह लटकने लगती हैं। इससे सांस का रास्ता रूक जाता है। आमतौर पर गहरी नींद, अधिक एल्कोहॉल का सेवन या नींद की गोलियां लेने के कारण ऐसा होता है। उम्र के बढ़ने से भी मांसपेशियों का लटक जाना भी स्वाभाविक है।

साइनसः खर्राटे आने का एक कारण साइनस है। साइनस के बढ़ने से नाक के छिद्र जाम हो जाते हैं। इतना ही नहीं, खर्राटे की ध्वनि बढ़ने पर भी नाक के रास्ते पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में अगर आप साइनस के मरीज हैं तो सावधानी बरतें। यदि आपको जुकाम है, या साइनस बढ़ने से परेशान हैं तो सोने के पहले भाप लें। इससे सारी गंदगी बाहर आ जाएगी और सांस लेने में आसानी होगी।

सोने का गलत तरीका:- सोते समय गले का पिछला हिस्सा थोड़ा संकरा हो जाता है। ऐसे में ऑक्सीजन संकरी जगह से अंदर जाती है तो आस-पास के टिशू वायब्रेट होते हैं।

सर्दीः अधिक दिनों तक नाक बंद रहने पर डॉक्टर से जांच करवाएं। नींद की गोलियां, एलर्जी रोधक दवाइयां भी श्वसन मार्ग की पेशियों को सुस्त बना देती हैं, जिनसे खर्राटे आने लगते हैं।

नीचे वाले जबड़े का छोटा होना भी खर्राटे आने का कारण है। जब व्यक्ति का जबड़ा सामान्य से छोटा होता है, तो लेटने पर उसकी जीभ पीछे की तरफ हो जाती है। इससे सांस की नली ब्लॉक हो जाती है। ऐसे में सांस लेने और छोड़ने के लिए प्रेशर लगाना पड़ता है। इससे वाइब्रेशन होता है।

  • वात एवं कफ दोष होने पर खर्राटे आते हैं।
  • कफ की अधिकता के कारण मांस की वृद्धि होती है, जो कि श्वास नलिका में अवरोध उत्पन्न करता है।
  • श्वासनलिका में अवरोध से वात की वृद्धि होती है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है।
  • पुरुषों की सांस लेने की नली महिलाओं की नली से पतली होती है, इसलिये पुरुषों को खर्राटे ज्यादा आते हैं।
  • यह बीमारी आनुवंशिक भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होती है।

नाक के वायुमार्ग में रूकावट:- नाक में विकृति होना जैसे सैप्टम (नाक के रास्ते को दो भागों में बांटने वाली दीवार) का टेढ़ापन, या नाक के अंदर निकले छोटे-छोटे कणों के कारण भी वायुमार्ग में रुकावटें आ सकती हैं। इसके इसके अलावा कुछ लोगों को सर्दी के दिनों में खर्राटे आने लगते हैं।

  • व्यक्ति की गर्दन अगर ज्यादा छोटी हो, तो भी सोते समय सांस के साथ आवाज आती है।

बच्चों को खर्राटे आने के कारणः

बच्चों को खर्राटे आने के निम्न कारण हो सकते हैं:-

  • टॉन्सिल्स बढ़ा होना।
  • जीभ का मोटा होना।
  • जुकाम या हड्डी टेढ़ी होने से नाक में रुकावट आना।

खर्राटे की समस्या को रोकने के घरेलू उपायः

                                                         

खर्राटों के उपचार के लिए निम्न घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं:-

पुदीना के तेल से खर्राटे का समाधानः

पुदीने में कई ऐसे तत्व होते हैं जो गले और नाक के छेदों की सूजन को कम करने का काम करते हैं। इससे सांस लेना आसान हो जाता है। सोने से पहले पिपरमिंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर गरारा करने से समस्या कम हो जाती है। इस उपाय को कुछ दिन तक लगातार करें। इससे खर्राटों की समस्या में आराम मिलता है।

उपयोग करने का तरीकाः

  • एक कप उबलता हुआ पानी लें। इसमें 10 पुदीने की पत्तियां डालकर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। जब यह पानी गुनगुना पीने योग्य हो जाए, तो इसे छानकर या बिना छाने ही पिएं। इससे कुछ ही दिनों में खर्राटों की समस्या ठीक हो जाती है।

दालचीनी का प्रयोग खर्राटे रोकने में:

खर्राटे की समस्या से निजात पाने के लिए एक ग्लास गुनगुने पानी में तीन चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर पिएं। इसके लगातार सेवन से काफी राहत मिलती है।

लहसुन के प्रयोग से खर्राटे का उपचारः

लहसुन, नासिका मार्ग में बलगम के निर्माण और श्वसन प्रणाली की सूजन को कम करने में मदद करता है। अगर आप साइनस के कारण खर्राटे लेते हैं, तो लहसुन आपको तुरंत राहत प्रदान करेगा। लहसुन में घाव को भरने का गुण होता है। लहसुन ब्लॉकेज को साफ करने के साथ ही श्वसन-तंत्र को भी बेहतर बनाने में मदद करता है।

अच्छी और चैन की नींद के लिए लहसुन का उपयोग काफी असरकारक है। एक या दो लहसुन की कली को पानी के साथ सेवन करें। इस उपाय को सोने से पहले करने से खर्राटों से राहत पाई जा सकती हैं, साथ ही चैन की नींद ली जा सकती हैं।

हल्दी कारगर है खर्राटे रोकने में:

हल्दी में एंटी-सेप्टिक और एंटी-बायोटिक गुण होते हैं। इसका उपयोग करने से नाक साफ हो जाती है। इससे सांस लेना आसान हो जाता है। रोज रात को सोने से पहले दूध में हल्दी पकाकर (हल्दी वाला दूध) पीने से लाभ होगा।

ऑलिव ऑयल खर्राटे रोकने में कारगरः

ऑलिव ऑयल एक बहुत ही कारगर घरेलू उपाय है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते है। यह श्वसन-तंत्र की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में बहुत लाभकारी रहता है। यह दर्द को कम करने में मदद करता है। एक छोटी चम्मच ऑलिव ऑयल में सामान मात्रा में शहद मिलाकर, सोने से पहले नियमित रूप से लें। गले में कंपन को कम करने और खर्राटों को रोकने के लिए इस उपाय को अपनाएं।

इलायची से करें खर्राटे रोकने का कामः

इलायची सर्दी-खांसी की दवा के रूप में काम करती है। यह श्वसन-तंत्र खोलने का काम करती है। इससे सांस लेने की प्रक्रिया आसान होती है। रात को सोने से पहले इलायची के कुछ दानों को गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिएं। इससे खर्राटे की समस्या में राहत मिलती है। सोने से कम से कम 30 मिनट पहले इस उपाय को करना उचित रहता है।

खर्राटे बंद करने के लिए करें दूध का सेवनः

दूध कई बीमारियों के लिए अच्छा है। रात को सोने से पहले कम से कम एक कप दूध अवश्य पिएं। इससे खर्राटे आने बंद हो जाते हैं।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।