
जीन और दवाओं के माध्यम से किडनी का उपचार Publish Date : 20/10/2026
जीन और दवाओं के माध्यम से किडनी का उपचार
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
-
उपलब्धि : अब जीन और दवाएं करेंगी किडनी की मरम्मत, डायलिसिस व ट्रांसप्लांट युग का होगा अंत
वाशिंगटन/ लंदन/ नई दिल्ली। क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे करोड़ों मरीजों के लिए विज्ञान एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हम किडनी उपचार के 'गोल्डन एज' में प्रवेश कर चुके हैं, जहां नए जीन और दवा आधारित उपचार क्षतिग्रस्त किडनी की मरम्मत करेगी। यह खोज बताती है कि भविष्य में डायलिसिस और ऑर्गन ट्रांसप्लांट अतीत की बात बन जाएं।

नेशनल ज्योग्राफिक की प्रीमियम हेल्थ सेक्शन की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि वैज्ञानिकों ने किडनी क्षति को रिवर्स करने का तरीका खोज लिया है। अब तक किडनी फेल होने की स्थिति में मरीजों को जीवन बचाने के लिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट ही विकल्प माना जाता था, लेकिन अब नई पीढ़ी की दवाएं विशेषकर ओजेम्पिक और इसी वर्ग के जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट किडनी में हुई दीर्घकालिक क्षति को धीरे-धीरे ठीक करने के प्रमाण दे रही हैं।
शोध में पाया गया कि ये दवाएं न सिर्फ ब्लड शुगर नियंत्रित करती हैं, बल्कि किडनी टिश्यू की सूजन को कम कर, रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखती हैं और नेफ्रॉन (किडनी की फिल्टरिंग यूनिट) की कार्यक्षमता को बहाल करने में मदद करती हैं। नई पद्धति और दवा की खोज का श्रेय अमेरिका, यूरोप और एशिया के संयुक्त शोध नेटवर्क को जाता है। विशेष रूप हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और बोस्टन स्थित किडनी-रिसर्च सहयोगी नेटवर्क, कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट स्वीडन और जापान की तोहोकू यूनिवर्सिटी की टीमों ने इस विषय पर बहुत गहराई से काम किया है।

इन संस्थानों ने पिछले दस वर्षों में किडनी क्षति के आणविक (मॉलिक्युलर) कारणों पर संयुक्त अध्ययन किया और पाया कि क्रॉनिक किडनी डिजीज केवल कोशिकाओं के मरने का परिणाम नहीं होती, बल्कि किडनी कोशिकाओं के मेटाबॉलिक सिग्नल गड़बड़ाने के कारण खुद को मरम्मत करने की क्षमता खो जाती है। इसी वैज्ञानिक आधार पर ऐसी दवाओं की खोज की गई जो कोशिकाओं को फिर से रिपेयर मोड में ले जाकर क्षतिग्रस्त ऊतक को ठीक कर सकें। यही शोध बाद में जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं, जिनमें ओजेम्पिक प्रमुख है, के रूप में विकसित हुआ।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।