
रोबोटिक जीरो एरर टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी Publish Date : 19/09/2026
रोबोटिक जीरो एरर टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी
डॉ0 युवराज चौधरी एवं मुकेश शर्मा
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रोबोटिक जीरो एरर टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ही है पूर्णतया क्षतिग्रस्त घुटने का असली इलाज
आज के दौर में ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी घुटनों का गठिया सबसे ज्यादा बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्या बन चुका है, खासकर 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में। इसका प्रमुख कारण है, बदलती जीवनशैली, धूप में कम निकलना, प्रोटीन, कैल्शियम की कमी, बढ़ता वजन, कम शारीरिक सक्रियता और उम्र के साथ होने वाला जोड़ों का घिसाव- आदि ये सभी मिलकर इस बीमारी को और गंभीर बना देते हैं। समस्या तब और जटिल हो जाती है, जब मरीज घुटनों के दर्द को लंबे समय तक नजरअंदाज करते हुए केवल अस्थायी उपायों पर निर्भर रहते हैं।
वरिष्ठ आर्थापेडिक सर्जन
घुटनों की समस्या को केवल ‘घुटनों तक सीमित’ समझना एक बड़ी भूल है। यदि समय पर सही इलाज नहीं किया गया, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी तकनीक पारंपरिक सर्जरी की तुलना में कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित मानी जाती है।
हंस हॉस्पिटल के वरिष्ठ आर्थापेडिक सर्जन डॉ0 युवराज चौधरी ‘रोबोटिक जीरो एरर टोटल नी रिप्लेसमेंट’ तकनीक के विशेषज्ञ के रूप में इसका उल्लेखनीय इलाज कर रहे हैं।
घुटनों का दर्द आज केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि बदलती जीवनशैली, गठिया, मोटापा, पुरानी चोटों एवं कैल्शियम की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। कई मरीजों के लिए स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, बैठना-उठना और यहाँ तक कि रात में आराम से सोना भी कठिन हो जाता है।
जब दवाइयाँ, इंजेक्शन एवं फिजियोथेरेपी से पर्याप्त राहत नहीं मिलती, तब घुटना प्रत्यारोपण सबसे प्रभावी उपचार माना जाता है। अब चिकित्सा विज्ञान ने इस क्षेत्र में एक नई क्रांति प्रस्तुत की है - ‘रोबोटिक ‘जीरो एरर’ घुटना प्रत्यारोपण’। यह अत्याधुनिक तकनीक केवल घुटना बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि घुटने की प्राकृतिक कार्यक्षमता, संतुलन और गति को अधिकतम सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।
रोबोटिक जीरो एरर घुटना प्रत्यारोपण एक आधुनिक कंप्यूटर-नियंत्रित एवं रोबोटिक तकनीक आधारित शल्य क्रिया है, जिसमें अत्यंत सूक्ष्म सटीकता के साथ ऑपरेशन किया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता है ‘बिना मांसपेशी काटे ऑपरेशन’, अर्थात शल्य क्रिया के दौरान मांसपेशियों को काटे बिना विशेष कोमल ऊतकों में सुरक्षित तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी चलने-फिरने लगता है।
इसी प्रकार ‘बिना लिगामेंट काटे’ तकनीक के अंतर्गत घुटने के महत्वपूर्ण स्नायुबंधों को सुरक्षित रखते हुए उनका प्राकृतिक संतुलन बनाए रखा जाता है, जिससे ऑपरेशन के बाद घुटना अधिक प्राकृतिक महसूस होता है।
इस आधुनिक तकनीक में हड्डी में अनावश्यक कटाई नहीं की जाती, जिससे हड्डी की संरचना अधिक सुरक्षित रहती है। साथ ही ‘बोन मैरो को बिना क्षति पहुँचाए’ शल्यक्रिया की जाती है, जिससे रक्तस्राव, फैट एम्बोलिज्म तथा अन्य जटिलताओं की संभावना काफी कम हो जाती है। रोबोटिक एवं डिजिटल सेंसर आधारित तकनीक द्वारा ‘स्नायुबंधों का शून्य त्रुटि संतुलन’ किया जाता है, जिससे घुटने की स्थिरता, सीधापन और सहज गति अत्यंत सटीक बनती है।
इस शल्य क्रिया का उद्देश्य केवल दर्द हटाना नहीं, बल्कि गति में शून्य कमी सुनिश्चित करना भी है, ताकि मरीज ऑपरेशन के बाद सहज रूप से चल सके, बैठ सके, सीढ़ियाँ चढ़ सके तथा सामान्य जीवन का आनंद पुनः प्राप्त कर सके।
रोबोटिक तकनीक की सहायता से घुटना प्रत्यारोपण अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, अधिक सटीक और अधिक सफल हो गया है। इसमें कम दर्द, कम रक्तस्राव, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, अधिक प्राकृतिक घुटने का अनुभव तथा प्रत्यारोपित जोड़ की लंबी आयु जैसे अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। गंभीर गठिया, टेढ़े पैर, पुरानी चोटों से खराब हुए घुटने तथा लगातार दर्द एवं अकड़न से पीड़ित मरीजों के लिए यह तकनीक अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।
आज रोबोटिक ‘जीरो एरर’ घुटना प्रत्यारोपण आधुनिक अस्थि एवं जोड़ शल्य चिकित्सा का भविष्य माना जा रहा है। यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि मरीज को पुनः सक्रिय, आत्मनिर्भर और दर्दमुक्त जीवन देने की दिशा में चिकित्सा विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि है। यदि घुटनों का दर्द आपके जीवन की गति रोक रहा है, तो यह आधुनिक तकनीक एक अत्याधुनिक, सुरक्षित एवं प्रभावी समाधान बन सकती है।
पारंपरिक सर्जरी से अलग क्यों है यह तकनीक?
जहाँ पारंपरिक सर्जरी में इमप्लांट की पोजीशन डॉक्टर की आंखों और अनुभव पर निर्भर करती है, वहीं रोबोटिक तकनीक इसे सेंटीमीटर नहीं, बल्कि मिलीमीटर के स्तर पर नियंत्रित करती है। इससे न केवल घुटने का एलाइनमेंट परफेक्ट होता है, बल्कि शरीर के अन्य जोड़ जैसे कि कूल्हे और टखने पर भी सही संतुलन बना रहता है।
इसके अलावा, इस प्रक्रिया में हड्डी की अत्यधिक कटिंग नहीं की जाती। सटीकता के कारण घाव छोटा होता है, ब्लड लॉस कम होता है, और मरीज ऑपरेशन के कुछ ही घंटों में अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है।
लेखकः डॉ0 युवराज चौधरी, निदेशक, हंस मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल, कंकर खेड़ा मेरठ।