
हीमोफिलिया के लिए पारंपरिक उपचार Publish Date : 15/08/2026
हीमोफिलिया के लिए पारंपरिक उपचार
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
हीमोफिलिया का निदान
हीमोफीलिया से गंभीर रूप से पीड़ित अधिकांश लोगों को अपने जीवन के पहले वर्ष के भीतर ही इसका पता लग जाता है, जबकि इसे हल्के रूप वाले लोगों को वयस्क होने तक भी इस स्थिति के बारे में पता नहीं चल पाता है। वहीं कुछ लोगों को शल्य चिकित्सा के दौरान अपेक्षा से अधिक रक्तस्राव होने पर हीमोफीलिया का पता चल पाता है।
हीमोफिलिया के लिए परीक्षण
कुछ परीक्षणों से हीमोफीलिया की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इनमें निम्नलिखित परीक्षण शामिल हो सकते हैं:-
स्क्रीनिंग टेस्टः यह रक्त परीक्षण होते हैं जिनके माध्यम से ज्ञात होता है कि आपका रक्त कितनी अच्छी से तरह जमता है अर्थात कितनी जल्दी रक्त का थक्का जमता है।
रक्त के थक्के जमने के कारक की जाँचः इन रक्त परीक्षणों से रक्त के थक्के जमने के कारक की कमी का पता चल सकता है। इन परीक्षणों से हीमोफीलिया के प्रकार और यह भी पता चल सकता है कि यह हल्का, मध्यम या गंभीर हो सकता है।
आनुवंशिक परीक्षणः जिन लोगों के परिवार में हीमोफीलिया का इतिहास रहा है, वे आनुवंशिक परीक्षण करवा सकते हैं। इससे पता चल सकता है कि कौन वाहक है और इससे गर्भावस्था के बारे में निर्णय लेने में आपको सहायता भी मिल सकती है।
प्रसवपूर्व परीक्षणः गर्भावस्था के दौरान यह पता लगाना संभव है कि अजन्मे बच्चे को हीमोफीलिया है या नहीं। लेकिन परीक्षण से भ्रूण को कुछ जोखिम हो सकते हैं। प्रसवपूर्व परीक्षण के फायदे और नुकसान के बारे में अपने स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से बात करें। हीमोफीलिया के विशेषज्ञ हीमोफिलिया से संबंधित आपकी स्वास्थ्य समस्याओं में आपकी मदद कर सकते है।
हीमोफिलिया का उपचार
गंभीर हीमोफीलिया के मुख्य उपचार में नस में एक ट्यूब के माध्यम से अनुपस्थित या कम मात्रा में मौजूद रक्त के थक्के जमने वाले कारक को बदलना शामिल होता है।
यह थेरेपी रक्तस्राव की स्थिति में ही उसका उपचार कर सकती है। कुछ लोग रक्तस्राव को रोकने के लिए नियमित रूप से घर पर ही यह उपचार करवाते हैं तो वहीं कुछ लोग निरंतर रिप्लेसमेंट थेरेपी लेते हैं।
रक्त के थक्के जमने के लिए प्रतिस्थापन कारक दान किए गए रक्त से प्राप्त किया जा सकता है और इसके साथ ही अन्य उत्पाद, जिन्हें रिकॉम्बिनेंट क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है, प्रयोगशाला में तैयार किए जाते हैं, मानव रक्त के माध्यम से नहीं किए जाते हैं।
हीमोफिलिया के अन्य उपचारों में शामिल हैं:
डेस्मोप्रेसिनः हीमोफीलिया के कुछ हल्के मामलों में, यह हार्माेन शरीर को अधिक रक्त के थक्के बनाने वाले कारक स्रावित करने के लिए प्रेरित कर सकता है। एक स्वास्थ्य पेशेवर इसे धीरे-धीरे नस में इंजेक्ट कर सकता है या कुछ लोग इसे नाक में स्प्रे के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं।
एमिसिज़ुमैब (हेमलिब्रा): यह एक नई दवा है जिसमें रक्त के थक्के जमने वाले कारक नहीं होते हैं। यह हीमोफिलिया ए से पीड़ित लोगों में रक्तस्राव को रोकने में मदद कर सकती है।
कॉन्सीज़ुमैब (अल्हेमो) और मारस्टासिमैब (हिम्पावज़ी): ये नई दवाएं हीमोफिलिया ए और बी दोनों में रक्तस्राव को रोकने में मदद कर सकती हैं।
रक्त के थक्के को जमने से रोकने वाली दवाएँ:
इन्हें एंटीफिब्रिनोलिटिक्स दवाएं भी कहा जाता है, ये दवाएँ रक्त के थक्कों को टूटने से बचाती हैं। इनमें एमिनोकैप्रोइक एसिड (एमिकार) और ट्रैनेक्सैमिक एसिड (लिस्टेडा) जैसी दवाएँ शामिल हैं। मुँह से ली जाने वाली ये दवाएँ रक्त के थक्के जमने और घावों को भरने में मदद करती हैं। ये दवाएँ सर्जरी और दंत चिकित्सा में उपयोगी होती हैं।
फाइब्रिन सीलेंटः थ्रोम्बिन नामक एक दवा, जिसे त्वचा पर लगाया जाता है, सर्जरी और दंत चिकित्सा के दौरान होने वाले रक्तस्राव को रोकने में मदद कर सकती है।
जीन थेरेपीः अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने गंभीर हीमोफिलिया ए के उपचार के लिए वैलोक्टोकोजीन रोक्सापारवोवेक (रोक्टेवियन) और हीमोफिलिया बी के लिए एट्रानाकोजीन डेज़ापारवोवेक-डीआरएलबी (हेमजेनिक्स) को मंजूरी दे दी है। ये दवाएं नसों में डाली जाती हैं ताकि शरीर में रक्त के थक्के जमने वाले आवश्यक तत्व को पहुंचाया जा सके। एक बार के इन उपचारों से शरीर में रक्त के थक्के जमने वाले आवश्यक तत्व का उत्पादन बढ़ जाता है।
फिजियोथेरेपीः अगर अंदरूनी रक्तस्राव से जोड़ों को नुकसान पहुंचा है तो इससे लक्षणों में आराम मिल सकता है। अधिक गंभीर क्षति होने पर सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
