
शुगर लेवल को नियंत्रित करने वाली दवा Publish Date : 30/03/2026
शुगर लेवल को नियंत्रित करने वाली दवा
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
शुगर लेवल को कन्ट्रोल करने के लिए P 1mg/500mg/15mg टैबलेट एक कॉम्बिनेशन दवाई है जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है। इस दवा का उपयोग टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस से पीडित वयस्कों में ब्लड शुगर नियंत्रण में सुधार करने के लिए आहार और व्यायाम के साथ किया जाता है। यह इंसुलिन के उचित उपयोग करने में मदद करता है, जिससे ब्लड शुगर के स्तर कम हो जाता हैं।
शुगर कन्ट्रोल P 1mg/500mg/15mg टैबलेट को आपके डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि के अनुसार ही लिया जाना चाहिए। पेट खराब होने से बचने के लिए इसे खाने के साथ लिया जाना उचित रहता है। अगर आप एक खुराक लेना भूल जाते हैं तो जितनी जल्दी याद आए वो खुराक लें। हालांकि, अगर अगली खुराक का समय हो गया है तो छूटी हुई खुराक को छोड़ दें और नियमित समय पर अगली खुराक लें, खुराक को डबल न करें। ओवरडोज के चलते कम ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) का कारण बन सकता है।
जब यह दवा अन्य डायबिटीज-रोधी दवाओं, शराब या भोजन छोड़ने पर ली जाती है तो कुछ लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया (कम ब्लड शुगर स्तर) हो सकता है। इसे लेते समय अपने ब्लड शुगर लेवल की नियमित रूप से निगरानी करें। इस दवा के अन्य सामान्य दुष्प्रभावों में मिचली आना, डायरिया, पेट दर्द, सिरदर्द, हड्डी का फ्रैक्चर और श्वासनली में संक्रमण शामिल हैं।
इस दवा को लेने से पहले, अगर आपको किडनी, लिवर या हार्ट से संबंधित कोई समस्या है तो अपने डॉक्टर को इसके बारे में बताएं। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसे लेने से पहले डॉक्टर से भी परामर्श करना चाहिए। आपका डॉक्टर इससे इलाज शुरू करने से पहले आपकी किडनी की कार्यक्षमता की जांच करेगा। इसे लेने के दौरान शराब का बहुत अधिक सेवन न करें क्योंकि इससे कुछ साइड इफेक्ट विकसित होने का जोखिम पैदा हो जाता है।
शुगर कंट्रोल पी टैबलेट के लाभः

शुगर कन्ट्रोल P 1mg/500mg/15mg टैबलेट एक दवा है जो उच्च ब्लड ग्लूकोज (शर्करा) के स्तरों को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह आपके शरीर से मूत्र के माध्यम से अतिरिक्त ग्लूकोज निकालने में मदद करती है। यह हार्माेन इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाती है, जो हमारे शरीर में ब्लड ग्लूकोज (शुगर) लेवल को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। इंसुलिन, आपके ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को कम करने में मदद करता है और खाना खाने के बाद उसके बढ़ने की रोकथाम करता है। इसलिए निर्धारित अवधि तक इसका सेवन जारी रखना चाहिए।
ब्लड ग्लूकोज के लेवल को कम करना डायबिटीज को नियंत्रित करने का प्रमुख हिस्सा है। अगर आप इन स्तरों को नियंत्रित कर सकते हैं, तो आपमें डायबिटीज के कारण होने वाली गंभीर जटिलताओं जैसे कि किडनी का नुकसान, आंखों में नुकसान, तंत्रिका संबंधी समस्याएं और हाथ-पैरों का नुकसान आदि जैसे जोखिमों की संभावनाएं कम हो जाएगी। उचित आहार और व्यायाम के साथ इस दवा का नियमित सेवन आपको स्वस्थ और सामान्य जीवन जीने में आपकी सहायता करता है।
शुगर कंट्रोल पी टैबलेट के साइड इफेक्ट-

इस दवा से होने वाले अधिकांश साइड इफेक्ट में डॉक्टर की सलाह लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती है और नियमित रूप से दवा का सेवन करने से साइड इफेक्ट अपने आप समाप्त हो जाते हैं। अगर साइड इफ़ेक्ट बने रहते हैं या लक्षण बिगड़ने लगते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
शुगर कन्ट्रोल पी के सामान्य साइड इफेक्टः-
- हाइपोग्लाइसीमिया (लो ब्लड ग्लूकोज लेवल)।
- सिरदर्द।
- मिचली आना।
- डायरिया।
- चक्कर आना।
- उल्टी।
- एनीमिया (लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी)।
- कमजोरी।
- साइनस संक्रमण।
शुगर कंट्रोल पी टैबलेट का उपयोग कैसे करें-
इस दवा की सही खुराक और इसे कितने समय तक लेना है, यह जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें, इसे साबुत निगल लें। इसे चबाएं, कुचलें या तोड़ें नहीं। आमतौर पर शुगर कन्ट्रोल P 1mg/500mg/15mg टैबलेट को खाने के साथ या खाने के बाद लेना चाहिए।
शुगर कंट्रोल पी टैबलेट किस प्रकार काम करता है-
शुगर कन्ट्रोल P 1mg/500mg/15mg टैबलेट तीन एंटीडायबेटिक दवाओं का मिश्रण हैः ग्लिमेंपिराइड, मेटफॉर्मिन और पिओग्लिटाजोन। जब सिंगल या डुअल थेरेपी प्रभावी नहीं होती है, तो वे ब्लड शुगर का बेहतर नियंत्रण प्रदान करने के लिए विभिन्न मेकनिज़्म से काम करते हैं। ग्लिमेंपिराइड एक सल्फोनील्यूरिया है जो ब्लड ग्लूकोज को कम करने के लिए पेंक्रियाज द्वारा रिलीज़ किए गए इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाकर काम करता है। मेटफॉर्मिन एक बिगुअनाइड है, यह लीवर में ग्लूकोज उत्पादन को कम करने, आंतों द्वारा ग्लूकोज अवशोषण में देरी करने और इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को बढ़ाने का काम करता है। पिओग्लिटाजोन एक थियाज़ोलिडिनेडियोन है जो इंसुलिन की संवेदनशीलता को और बढ़ाता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
