नैनो तकनीक के माध्यम से लिवर सिरोसिस का प्रभावी उपचार      Publish Date : 22/03/2026

नैनो तकनीक के माध्यम से लिवर सिरोसिस का प्रभावी उपचार

                                                                                                 डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आने वाले समय में नैनो तकनीक से लिवर सिरोसिस का आसान उपचार संभव हो सकेगा। इस संबंध में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक शोध किया है।

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नैनो तकनीक विकसित की है, जो लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी के उपचार करने में मदद करती है। जर्मनी के प्रतिष्ठित साईसफिट जर्नल नेचर के हालिया अंक में प्रकाशित इस शोध का नेतृत्व भौतिक विज्ञान की प्रो. प्रतिमा चौहान और रसायन विज्ञान के कमलाकांत बेहेरा ने किया है। उन्होंने सेलेनियम आधारित बहुत छोटे-छोटे कण तैयार किए हैं। ये कण इतने सूक्ष्म हैं कि शरीर के अंदर जाकर सीधे कोशिकाओं पर काम करते हैं। ये कण हानिकारक तत्वों को कम करते हैं और कोशिकाओं को सुरक्षित बनाए रखते रखते हैं।

                                  

एंजाइम का संतुलन: डॉ0 नवनीत यादव के अनुसार, इन कणों से लिवर के बिगड़े हुए एंजाइम संतुलन को फिर से संतुलित करने में मदद मिलती है। दरअसल, एंजाइम शरीर की जरूरी रासायनिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं, इनके असंतुलित होने से बीमारी होने की समस्या बढ़ सकती है।

इसके अलावा, विशेषज्ञों ने खास रुथेनियम आधारित कंपाउंड का भी इस्तेमाल किया। यह कंपाउंड कोशिकाओं का नुकसान होने से बचाता है, जिसे 'हेपेटोप्रोटेक्टिव' प्रभाव कहते हैं। इससे शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर बढ़ता और हानिकारक तत्व कम होते हैं।

सकारात्मक रहे नतीजे: यह शोध काफी कारगर साबित हुआ है, फिर भी इसे आम मरीजों तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। ऐसे में अगर आगे के परीक्षण सफल रहे, तो यह तकनीक लिवर सिरोसिस के इलाज में सकारात्मक बदलाव भी ला सकती है।

धीरे-धीरे खराब होता है लिवर

विशेषज्ञों ने बताया कि लिवर सिरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे लिवर खराब होता जाता है। यह बीमारी अक्सर लंबे समय तक शराब के सेवन, हेपेटाइटिस या अन्य कारणों से होती है। जब लिवर सही तरह से काम नहीं करता, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं भी आनी शुरू हो जाती हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही अगर समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है और लिवर फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

  • छोटे कण शरीर में जहरीले तत्वों को साफ करके कोशिकाओं को खराब होने से बचाते हैं।
  • यह तकनीक लिवर के बिगड़े एंजाइम को सुधारने में भी कारगर सबित हुई है।

दवा के विकास में महत्वपूर्ण: इस शोध में भौतिक और जैविक, दोनों पहलुओं को जोड़ा गया है, यानी विशेषज्ञों ने यह समझने की कोशिश की है कि पदार्थ की संरचना और उसका शरीर पर प्रभाव कैसे जुड़ा हुआ है।

यह प्रयोग दवाओं के विकास में महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके माध्यम से भविष्य में ऐसी दवाएं बनाई जा सकेंगी, जो ज्यादा असरदार होंगी और साइड इफेक्ट भी कम करेंगी। यह शोध भविष्य में गंभीर बीमारियों के बेहतर इलाज का रास्ता भी खोल सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।