छींक-छींक कर हो गया है बुरा हाल?      Publish Date : 09/03/2026

      छींक-छींक कर हो गया है बुरा हाल?

                                                                                                 डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

अगर आपको बार-बार छींक आ रही है या गले और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे सिर्फ जुकाम समझकर नजरअंदाज न करें। ये एलर्जिक राइनाइटिस के भी संकेत हो सकते हैं। ठंड में रूखापन बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इससे नाक बंद होना, लगातार छींक आना, आंखों में पानी, सिरदर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं अधिक होती हैं। ये कुछ ही दिनों में ठीक भी हो जाते हैं और कई बार लंबे समय तक बने रहते हैं। ये एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण हो सकते हैं।

एलर्जिक राइनाइटिस (हे फीवर) हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों के प्रति एक एलर्जिक प्रतिक्रिया है। जब नाक या मुंह से एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ (एलर्जेन) शरीर के अंदर प्रवेश करते हैं, तो प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया करते हुए रक्त में प्राकृतिक रसायन (हिस्टामाइन) छोड़कर एलर्जेन को बाहर निकालने का प्रयास करती है। इससे नाक, आंख और गले की म्यूकस मेम्ब्रेन (श्लेष्मा झिल्ली) में सूजन तथा खुजली होती है और नाक में बलगम बनने लगता है। इस रासायनिक बदलाव की वजह से लोगों को बुखार भी आ जाता है।

एलर्जिक राइनाइटिस का समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इलाज न मिलने पर इस एलर्जी के कारण अस्थमा, साइनोसाइटिस, नेजल पोलिप्स, साइनस और सूंघने की क्षमता कम हो सकती हैं।

ठंड में क्यों होती है समस्या

इस मौसम में बहने वाली ठंडी और शुष्क हवा नाक की नलियों को संवेदनशील बना देती है। घरों में धूल-मिट्टी का जमाव, हीटर का इस्तेमाल और कम वेंटिलेशन भी वातावरण में मौजूद एलर्जेन को अधिक सक्रिय बना देते हैं। इससे एलर्जिक राइनाइटिस ट्रिगर हो सकती है।

क्या हैं कारण

एलर्जिक राइनाइटिस तब होता है, जब इम्यून सिस्टम कुछ तत्वों को हानिकारक समझकर प्रतिक्रिया करता है। यह प्रतिक्रिया सबसे ज्यादा घर की कालीन, डोरमेट, पर्दे, बिस्तर और फर्नीचर के धूल के कण, धुआं, सर्दी, डस्टमाइट्स (धूल में रहने वाले छोटे जीव) और पौधों के परागकणों की वजह से हो सकती है। इनके अलावा सॉफ्ट टॉयज, पालतू जानवरों की रूसी, कॉकरोच, फंगस, किसी विशेष दवा या किसी खाद्य सामग्री से भी एलर्जी हो सकती है।

सिगरेट या लकड़ी-कोयले का धुआं, हेयर स्प्रे और इत्र भी इसका कारण बन सकता है। यदि परिवार में एलर्जी, अस्थमा या एक्जिमा का इतिहास है, तो इसका जोखिम बढ़ जाता है।

कब है इम्यूनोथेरेपी की जरूरत

इम्यूनोथेरेपी एक तरह का इलाज है, जिसमें शरीर को धीरे-धीरे एलर्जी वाले एलर्जेन के संपर्क में लाया जाता है। इससे शरीर उस एलर्जेन के प्रति सहनशील बन जाता है और एलर्जी की तीव्रता कम हो जाती है। यह थेरेपी शॉट्स या अंडर-द-टंग ड्रॉप्स/टैबलेट के रूप में दी जाती है। इसमें स्टेरॉयड या एंटीहिस्टामाइन नहीं होते, जिससे इसके दुष्प्रभाव कम होते हैं।

बचाव से मिलेगी मदद

                               

तापमान में अचानक परिवर्तन होने पर बचाव करें। एकदम गरम से ठंडे और ठंडे से गरम वातावरण में न जाएं। इससे बचने के लिए घर के बिस्तर की चादर और तकिए के कवर को बदलें। इसके साथ ही, बाहर से आने के बाद हाथ-पैरों को साबुन से धोएं। अक्सर धूल से यह समस्या होती है, इसलिए झाडू की जगह वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें या गीला पोछा लगाएं। मास्क का इस्तेमाल करें।

पर्दे, चादर एवं कालीन को समय-समय पर धूप दिखाएं। इसके अलावा घरेलू उपाय जैसे गरम पानी पीएं और अदरक, काली मिर्च और लौंग की चाय या काढ़े का सेवन भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप विटामिन सी से भरपूर फूड्स का सेवन करें। नियमित व्यायाम और विश्राम के लिए समय निकालें। गरम पानी के स्नान करें। इसके लक्षण दिखने पर जांच और उपचार करवाएं।

जुकाम है या एलर्जिक राइनाइटिस

एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण आम सर्दी-जुकाम जैसे लगते हैं. इसलिए इस संक्रमण की पहचान होने में देरी होती है। फर्क यह है कि एलर्जी के लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं और बार-बार लौट सकते हैं, जबकि जुकाम वायरस की वजह से होता है और कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। कई बार तो लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें किस चीज से एलर्जी है। ऐसे मामलों में स्किन संभावित एलर्जेन की थोड़ी मात्रा व्यक्ति की त्वचा में डाली जाती है। अगर व्यक्ति को उस चीज से एलर्जी होती है तो 15 से 20 मिनट में उस जगह पर मच्छर के काटने जैसा निशान बन जाता है।

इससे एलर्जी की वजह समझ पाना आसान होता है। इसके उपचार के लिए एंटीहिस्टामाइन, एंटी-एलर्जिक और एंटी-आईजीई जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।